पश्चिम चंपारण के योगापट्टी अंचल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को व्यापक प्रदर्शन हुआ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और गरीब, भूमिहीन, कटाव पीड़ित मोर्चा के संयुक्त बैनर तले सैकड़ों गरीब, भूमिहीन और गंडक नदी के कटाव पीड़ित परिवार अंचल कार्यालय के सामने सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर वर्षों से बसे गरीबों को उजाड़ने और उनकी जमीन छीनने की साजिश रचने का आरोप लगाया। अतिक्रमण का नोटिस थमाकर बेघर करने की तैयारी प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे बेतिया राज की जिस जमीन पर 50 वर्षों से अधिक समय से रह रहे हैं, वहां उनके घर, बिजली कनेक्शन, स्कूल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। वे विधिवत मतदाता भी हैं। इसके बावजूद उन्हें अचानक अतिक्रमण का नोटिस थमाकर बेघर करने की तैयारी की जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई गरीबों को हटाकर जमीन को बड़े पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को सौंपने की मंशा से की जा रही है। “बुलडोजर राज नहीं चलेगा” के लगे नारे धरना-प्रदर्शन के दौरान “गरीबों को उजाड़ना बंद करो”, “बास का पर्चा दो”, “बुलडोजर राज नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए गए। कटाव पीड़ित परिवारों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि गंडक नदी की तबाही के बाद वे जान बचाकर इस इलाके में बसे थे। उन्हें सरकार से राहत और पुनर्वास की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें बेदखली का नोटिस थमा दिया गया है। धरना सभा को संबोधित करते हुए भाकपा जिला सचिव ने कहा कि सरकार का दायित्व लोगों को बसाना है, न कि उजाड़ना। उन्होंने जोर दिया कि जिस जमीन पर दशकों से गरीब परिवार बसे हैं और जहां सरकार खुद सुविधाएं दे चुकी है, उसे अतिक्रमण बताना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बेदखली की कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो आंदोलन और तेज होगा तथा सांसद और विधायकों का घेराव किया जाएगा। इस धरना सभा में भाकपा नेता राधामोहन यादव, बब्लू दूबे, केदार चौधरी, इकबालजी पांडेय, हरेंद्र दूबे, साधु सिंह, अनिल तिवारी, जिला पार्षद लालबाबू चौधरी, पंचायत समिति सदस्य धनी लाल यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने मांग की कि वर्षों से बसे गरीब, भूमिहीन और कटाव पीड़ित परिवारों को बास का पर्चा दिया जाए, जबरन बेदखली पर रोक लगाई जाए और उनके लिए एक स्थायी पुनर्वास नीति बनाई जाए। पश्चिम चंपारण के योगापट्टी अंचल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को व्यापक प्रदर्शन हुआ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और गरीब, भूमिहीन, कटाव पीड़ित मोर्चा के संयुक्त बैनर तले सैकड़ों गरीब, भूमिहीन और गंडक नदी के कटाव पीड़ित परिवार अंचल कार्यालय के सामने सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर वर्षों से बसे गरीबों को उजाड़ने और उनकी जमीन छीनने की साजिश रचने का आरोप लगाया। अतिक्रमण का नोटिस थमाकर बेघर करने की तैयारी प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे बेतिया राज की जिस जमीन पर 50 वर्षों से अधिक समय से रह रहे हैं, वहां उनके घर, बिजली कनेक्शन, स्कूल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। वे विधिवत मतदाता भी हैं। इसके बावजूद उन्हें अचानक अतिक्रमण का नोटिस थमाकर बेघर करने की तैयारी की जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई गरीबों को हटाकर जमीन को बड़े पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को सौंपने की मंशा से की जा रही है। “बुलडोजर राज नहीं चलेगा” के लगे नारे धरना-प्रदर्शन के दौरान “गरीबों को उजाड़ना बंद करो”, “बास का पर्चा दो”, “बुलडोजर राज नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए गए। कटाव पीड़ित परिवारों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि गंडक नदी की तबाही के बाद वे जान बचाकर इस इलाके में बसे थे। उन्हें सरकार से राहत और पुनर्वास की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें बेदखली का नोटिस थमा दिया गया है। धरना सभा को संबोधित करते हुए भाकपा जिला सचिव ने कहा कि सरकार का दायित्व लोगों को बसाना है, न कि उजाड़ना। उन्होंने जोर दिया कि जिस जमीन पर दशकों से गरीब परिवार बसे हैं और जहां सरकार खुद सुविधाएं दे चुकी है, उसे अतिक्रमण बताना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बेदखली की कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो आंदोलन और तेज होगा तथा सांसद और विधायकों का घेराव किया जाएगा। इस धरना सभा में भाकपा नेता राधामोहन यादव, बब्लू दूबे, केदार चौधरी, इकबालजी पांडेय, हरेंद्र दूबे, साधु सिंह, अनिल तिवारी, जिला पार्षद लालबाबू चौधरी, पंचायत समिति सदस्य धनी लाल यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने मांग की कि वर्षों से बसे गरीब, भूमिहीन और कटाव पीड़ित परिवारों को बास का पर्चा दिया जाए, जबरन बेदखली पर रोक लगाई जाए और उनके लिए एक स्थायी पुनर्वास नीति बनाई जाए।


