सहरसा नगर निगम क्षेत्र के झपड़ा टोला में एक सरकारी पोखर को निजी संपत्ति बताकर भरने के प्रयास के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष सड़क पर उतर आए और भू-माफियाओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। पोखर लंबे समय से ग्रामीणों के उपयोग में रहा स्थानीय निवासी रोहिण दास ने बताया कि झपड़ा टोला का यह पोखर वर्ष 1902 से बिहार सरकार की संपत्ति है। 37 कट्ठा क्षेत्रफल का यह पोखर लंबे समय से ग्रामीणों के उपयोग में रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस सरकारी संपत्ति को निजी बताकर मिट्टी भर रहे थे, जिसका उद्देश्य इसे भू-माफियाओं को बेचकर निजी लाभ कमाना था। रोहिण दास के अनुसार, पोखर में मिट्टी भरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। उन्होंने एकजुट होकर सरकारी पोखर को बचाने का संकल्प लिया और भू-माफियाओं के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि यह पोखर सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आस्था और जरूरत से जुड़ा है। पोखर के पास एक शिव मंदिर भी, होता पूजा-पाठ स्थानीय लोगों ने बताया कि पोखर के पास एक शिव मंदिर भी है, जहां नियमित पूजा-पाठ होता है। ग्रामीण वर्षों से इस पोखर के पानी का उपयोग करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि पोखर को भरने से पर्यावरण को नुकसान होगा और धार्मिक व सामाजिक भावनाएं भी आहत होंगी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर पोखर को भरने नहीं देंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। रोहिण दास ने जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप कर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। सहरसा नगर निगम क्षेत्र के झपड़ा टोला में एक सरकारी पोखर को निजी संपत्ति बताकर भरने के प्रयास के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष सड़क पर उतर आए और भू-माफियाओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। पोखर लंबे समय से ग्रामीणों के उपयोग में रहा स्थानीय निवासी रोहिण दास ने बताया कि झपड़ा टोला का यह पोखर वर्ष 1902 से बिहार सरकार की संपत्ति है। 37 कट्ठा क्षेत्रफल का यह पोखर लंबे समय से ग्रामीणों के उपयोग में रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस सरकारी संपत्ति को निजी बताकर मिट्टी भर रहे थे, जिसका उद्देश्य इसे भू-माफियाओं को बेचकर निजी लाभ कमाना था। रोहिण दास के अनुसार, पोखर में मिट्टी भरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। उन्होंने एकजुट होकर सरकारी पोखर को बचाने का संकल्प लिया और भू-माफियाओं के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि यह पोखर सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आस्था और जरूरत से जुड़ा है। पोखर के पास एक शिव मंदिर भी, होता पूजा-पाठ स्थानीय लोगों ने बताया कि पोखर के पास एक शिव मंदिर भी है, जहां नियमित पूजा-पाठ होता है। ग्रामीण वर्षों से इस पोखर के पानी का उपयोग करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि पोखर को भरने से पर्यावरण को नुकसान होगा और धार्मिक व सामाजिक भावनाएं भी आहत होंगी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर पोखर को भरने नहीं देंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। रोहिण दास ने जिलाधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप कर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है।


