हरियाणा के हिसार जिले के खासा महाजनान गांव में श्मशान घाट विवादों में है। यहां एससी जाति का अलग और जनरल के अलग-अलग श्मशान घाट है। एससी समुदाय के व्यक्ति को जरनल श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की इजाजत नहीं है। इसी जातिगत भेदभाव के गंभीर मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव के श्मशान घाट में सामान्य वर्ग एवं अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अलग-अलग अंतिम संस्कार स्थल अवैध रूप से चिह्नित किए गए हैं और इस भेदभाव को लागू करने के लिए बोर्ड भी लगाए गए हैं। यह कृत्य न केवल असंवैधानिक है, बल्कि मानव गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। डीसी से 14 दिन में मांगी रिपोर्ट
वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे मानवाधिकारों का प्रथम दृष्टया उल्लंघन मानते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया है। आयोग ने हिसार के जिला उपायुक्त को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए। आयोग ने इसे संविधान का उल्लंघन माना
आयोग ने यह भी माना है कि इस प्रकार की प्रथाएं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का उल्लंघन हैं तथा अस्पृश्यता और सामाजिक बहिष्कार को बढ़ावा देती हैं, जो कि लोकतांत्रिक समाज में अस्वीकार्य है। शिकायतकर्ता सुशील वर्मा ने आयोग से मांग की है कि दोषी व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और देशभर में इस प्रकार की अमानवीय और असंवैधानिक प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं। सरपंच बोले-हमने बोर्ड हटा दिए हैं
वहीं सरपंच मंजू बाला फगेड़िया ने कहा कि गांव में काफी सालों से ही यह श्मशान घाट अलग-अलग बने हुए हैं। जनरल का श्मशान घाट गांव के नजदीक है और एससी का गांव से थोड़ी दूरी पर है। जरनल श्मशान घाट में एससी को छोड़कर सभी को अंतिम संस्कार की इजाजत है। यह पुरानी परंपरा चली आ रही है। हां बोर्ड को लेकर विवाद उठा था इसके बाद इसे हटा दिया गया है।


