मकर संक्राति पर लोगों ने लगाई बुढ़की, भगवान के समक्ष टेका माथा

मकर संक्राति पर लोगों ने लगाई बुढ़की, भगवान के समक्ष टेका माथा

जटाशंकर में उमड़ी भक्तों की भीड़

दमोह. सूर्य को समर्पित मकर संक्रांति पर्व जिले भर में उल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने नदी, सरोवरों के घाटों पर पहुंचकर देव दर्शन किए और आस्था की बुढ़की लगाई। हिंदू पुराणों के अनुसार इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान और दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। संक्रांति सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का असर मौसम में बदलाव के रूप में पड़ता है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस दिन के बाद मौसम में बदलाव आना शुरू हो जाता है।
धवार से शुरू हुआ संक्रांति का पर्व जिले में पूरे माह महेगा। इस दौरान जिले के अलग-अलग स्थानों पर मेले आयोजित होते हैं। यह मेले कहीं एक दिवसीय, कहीं दो से तीन, तो कहीं दस दिवसीय आयोजित होते हैं। वहीं कुछ मेले जिले की पहचान माने जाते हैं। शहर स्थित जटाशंकर मंदिर में विराजमान भगवान के दर्शन करने के लिए बुधवार को सुबह से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। सुबह ही बुढ़की या स्नान करने के बाद भी सबसे पहले मंदिर पहुंचे। जहां भोलेनाथ के समक्ष माथा टेका और मनोकामना की। इसके बाद सभी ने जटाशंकर मंदिर परिसर में लगे मेले का लुफ्त उठाया। इस दौरान लोगों ने जहां जमकर खरीदारी की, वहीं बच्चों ने झूले और चाट चौपाटी का लुफ्त लिया। जटाशंकर में १७ जनवरी तक मेला रहेगा। जिसमें जिले भर से लोग मेला का लुफ्त लेने आएंगे।

बांदकपुर में भी उमड़ी भीड़
संक्रांति पर जिला मुख्यालय में सबसे बड़ा मेला जागेश्वरधाम बांदकपुर में आयोजित होता है। संक्रांति के अवसर पर यहां कई जिलों से लोग पहुंचते हैं और जागेश्वरनाथ के दर्शन करते हैं व मेले का लुफ्त उठाते हैं। बुधवार को बांदकपुर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे। जहां भोलेबाबा के दर्शन के उपरांत मेले का लुफ्त लिया।मकर संक्राति पर लोगों ने लगाई बुढ़की, भगवान के समक्ष टेका माथा

जटाशंकर में उमड़ी भक्तों की भीड़
दमोह. सूर्य को समर्पित मकर संक्रांति पर्व जिले भर में उल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने नदी, सरोवरों के घाटों पर पहुंचकर देव दर्शन किए और आस्था की बुढ़की लगाई। हिंदू पुराणों के अनुसार इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान और दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। संक्रांति सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का असर मौसम में बदलाव के रूप में पड़ता है। बुजुर्ग बताते हैं कि इस दिन के बाद मौसम में बदलाव आना शुरू हो जाता है।
बुधवार से शुरू हुआ संक्रांति का पर्व जिले में पूरे माह महेगा। इस दौरान जिले के अलग-अलग स्थानों पर मेले आयोजित होते हैं। यह मेले कहीं एक दिवसीय, कहीं दो से तीन, तो कहीं दस दिवसीय आयोजित होते हैं। वहीं कुछ मेले जिले की पहचान माने जाते हैं। शहर स्थित जटाशंकर मंदिर में विराजमान भगवान के दर्शन करने के लिए बुधवार को सुबह से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। सुबह ही बुढ़की या स्नान करने के बाद भी सबसे पहले मंदिर पहुंचे। जहां भोलेनाथ के समक्ष माथा टेका और मनोकामना की। इसके बाद सभी ने जटाशंकर मंदिर परिसर में लगे मेले का लुफ्त उठाया। इस दौरान लोगों ने जहां जमकर खरीदारी की, वहीं बच्चों ने झूले और चाट चौपाटी का लुफ्त लिया। जटाशंकर में १७ जनवरी तक मेला रहेगा। जिसमें जिले भर से लोग मेला का लुफ्त लेने आएंगे।

बांदकपुर में भी उमड़ी भीड़
संक्रांति पर जिला मुख्यालय में सबसे बड़ा मेला जागेश्वरधाम बांदकपुर में आयोजित होता है। संक्रांति के अवसर पर यहां कई जिलों से लोग पहुंचते हैं और जागेश्वरनाथ के दर्शन करते हैं व मेले का लुफ्त उठाते हैं। बुधवार को बांदकपुर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे। जहां भोलेबाबा के दर्शन के उपरांत मेले का लुफ्त लिया।

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