Nipah Virus Update: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर एक बार फिर डर का माहौल बन गया है। बुधवार को दो और नर्सों को संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद कोलकाता के बेलियाघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों नर्सें पहले से संक्रमित एक स्वास्थ्यकर्मी के इलाज में शामिल थीं।
संक्रमित नर्स के इलाज के दौरान हुआ संपर्क
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, ये दोनों नर्सें उस नर्स का इलाज कर रही थीं, जिसकी रिपोर्ट बर्दवान मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में निपाह वायरस पॉजिटिव आई थी। इलाज के दौरान दोनों का उससे नजदीकी संपर्क हुआ, जिसके बाद उनमें भी निपाह जैसे लक्षण दिखाई देने लगे।
एक को देर रात, दूसरी को सुबह किया गया शिफ्ट
अधिकारी ने बताया कि दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को अलग-अलग समय पर कोलकाता लाया गया। एक नर्स को 13 जनवरी की देर रात बेलियाघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दूसरी नर्स, जो हाउस स्टाफ की सदस्य है, को बुधवार सुबह बर्दवान मेडिकल कॉलेज से शिफ्ट किया गया।
जांच के लिए भेजे गए सैंपल
दोनों नर्सों में निपाह वायरस के लक्षण नजर आने के बाद उनके सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इनमें नाक, गला, खून और अन्य जरूरी सैंपल शामिल हैं। फिलहाल एहतियात के तौर पर दोनों को आइसोलेशन में रखा गया है, ताकि संक्रमण आगे न फैले।
बारासात अस्पताल की दो नर्सों की हालत गंभीर
इस बीच, बारासात अस्पताल में भर्ती दो नर्सों की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। ये दोनों पहले ही निपाह वायरस से संक्रमित पाई गई थीं। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों नर्सें इस समय कोमा में हैं और उन्हें आईसीसीयू में रखा गया है। उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आरएमओ में भी दिखे निपाह जैसे लक्षण
बारासात अस्पताल के एक रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) में भी निपाह वायरस जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। यह आरएमओ भी संक्रमित नर्सों के संपर्क में आया था। एहतियातन उसे भी आइसोलेशन में रखा गया है।
शुरुआती जांच में रिपोर्ट निगेटिव
हालांकि राहत की बात यह है कि कलाईनी स्थित एम्स के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (VRDL) में आरएमओ की शुरुआती जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई है। नाक, गला, खून और पेशाब के सैंपल की जांच में निपाह वायरस की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी डॉक्टर पूरी सावधानी बरत रहे हैं।
नोटिफायबल डिजीज है निपाह वायरस
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निपाह वायरस एक गंभीर बीमारी है और इसे नोटिफायबल डिजीज की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि जैसे ही किसी मरीज में संक्रमण की पुष्टि होती है, इसकी जानकारी तुरंत केंद्र सरकार को देना अनिवार्य होता है।


