Army Day 2026 | सेना दिवस पर PM मोदी का सलाम! दुर्गम स्थलों से लेकर बर्फीली चोटियों तक सेना का शौर्य अतुलनीय

Army Day 2026 | सेना दिवस पर PM मोदी का सलाम! दुर्गम स्थलों से लेकर बर्फीली चोटियों तक सेना का शौर्य अतुलनीय

आज, 15 जनवरी 2026 को भारत अपना 78वाँ भारतीय सेना दिवस (Indian Army Day) मना रहा है। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को सेना दिवस के मौके पर भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि देश के सैनिक निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के तौर पर सबसे मुश्किल हालात में पक्के इरादे के साथ देश की रक्षा के लिए डटे रहते हैं।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि देश सैनिकों की हिम्मत और पक्के इरादे को सलाम करता है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘दुर्गम स्थलों से लेकर बर्फीली चोटियों तक हमारी सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। सरहद की सुरक्षा में डटे जवानों का हृदय से अभिनंदन!’’
मोदी ने लिखा, ‘‘हमारे सैनिक निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के तौर पर सबसे मुश्किल हालात में भी पक्के इरादे से देश की रक्षा के लिए डटे रहते हैं। उनकी कर्तव्य की भावना पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता बढ़ाती है।’’
उन्होंने कहा कि देश उन लोगों को बहुत सम्मान के साथ याद करता है जिन्होंने कर्तव्य पूरा करते हुए अपनी जान दे दी।
सेना दिवस 15 जनवरी को फील्ड मार्शल के एम करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने 1949 में ब्रिटिश जनरल सर एफआरआर बुचर की जगह ली थी।

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सेना दिवस क्यों मनाया जाता है?

15 जनवरी, 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा (फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा) ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस बुचर को भारतीय सेना की कमान सौंपी थी। इस तरह वह आजाद भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर साल सेना दिवस मनाया जाता है।

सेना दिवस 2026 की मुख्य विशेषताएं:

परेड का स्थान (जयपुर): इस वर्ष मुख्य सेना दिवस परेड जयपुर (राजस्थान) में आयोजित किया जा रहा है। इस परंपरा का हिस्सा है कि अब परेड को दिल्ली से बाहर के देशों की अलग-अलग विचारधारा में ले जाया जा रहा है, ताकि पूरी जनता सेना के शौर्य को देखा जा सके।

इस साल की थीम (थीम): साल 2026 को सेना “नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिकिटी का साल” के रूप में मना रही है। इसका मतलब है कि हमारी सेना अब तकनीक, डेटा और डिजिटल नेटवर्किंग के मामले में और भी आधुनिक हो रही है।

शौर्य कथा: जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) स्टेडियम में शाम को एक विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें 1,000 से अधिक डूबे लोगों के साथ ‘ड्रोन शो’ और युद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

सम्मान: इस दिन थल सेना प्रमुख को ‘सेना मेडल’ और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। 

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