नवादा रेलवे स्टेशन का जुलाई 2024 में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नए भवन के साथ उद्घाटन हुआ था। आधुनिक इमारत, चमकदार वेटिंग हॉल और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के ठहराव के बावजूद, जनवरी 2026 तक भी प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 पर पुरुष व महिलाओं के लिए अलग शौचालय और पेशाबघर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इससे रोजाना हजारों यात्री, विशेषकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग, भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। स्टेशन के वेटिंग हॉल में कुछ शौचालय उपलब्ध हैं, लेकिन वे अपर्याप्त हैं और अक्सर बंद या गंदे रहते हैं। शौच के लिए झाड़ियों में जाती है महिलाएं प्लेटफॉर्म पर शौचालयों की कमी के कारण महिलाओं को मजबूरन दूर या झाड़ियों में जाना पड़ता है, जो असुरक्षित और गरिमा के खिलाफ है। पुरुषों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है, लेकिन महिलाओं के लिए यह गंभीर समस्या है। इसके अतिरिक्त, फुट ओवर ब्रिज का निर्माण भी अधूरा है, जिससे यात्रियों को ट्रैक पार करके जाना पड़ता है, जो सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। छठ, कांवर यात्रा, परीक्षाओं या अन्य अवसरों पर भीड़ बढ़ने पर यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। बुनियादी सुविधाओं पर नहीं दिया गया ध्यान स्थानीय समाजसेवियों और यात्रियों ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, उद्घाटन की चमक तो दिखाई गई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टेशन मास्टर नीरज कुमार से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “इसकी डिटेल मेरे पास नहीं है।” यह बयान रेलवे की उदासीनता को दर्शाता है। अमृत भारत योजना के तहत शौचालय, फुट ओवर ब्रिज और लिफ्ट जैसी सुविधाएं शामिल हैं, लेकिन नवादा में इन पर काम की गति धीमी है। जबकि देश भर में 2025 तक 155 स्टेशन पूरे हो चुके हैं, नवादा अभी भी अधूरा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि काम जारी है और सुविधाएं जल्द पूरी होंगी। यात्री उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 तक ये समस्याएं हल हो जाएंगी, अन्यथा आधुनिकता की चमक के बीच यात्रियों की बदहाली जारी रहेगी। यह मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है, जिस पर रेल मंत्रालय को तत्काल ध्यान देना चाहिए। नवादा रेलवे स्टेशन का जुलाई 2024 में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नए भवन के साथ उद्घाटन हुआ था। आधुनिक इमारत, चमकदार वेटिंग हॉल और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के ठहराव के बावजूद, जनवरी 2026 तक भी प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 पर पुरुष व महिलाओं के लिए अलग शौचालय और पेशाबघर की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इससे रोजाना हजारों यात्री, विशेषकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग, भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। स्टेशन के वेटिंग हॉल में कुछ शौचालय उपलब्ध हैं, लेकिन वे अपर्याप्त हैं और अक्सर बंद या गंदे रहते हैं। शौच के लिए झाड़ियों में जाती है महिलाएं प्लेटफॉर्म पर शौचालयों की कमी के कारण महिलाओं को मजबूरन दूर या झाड़ियों में जाना पड़ता है, जो असुरक्षित और गरिमा के खिलाफ है। पुरुषों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है, लेकिन महिलाओं के लिए यह गंभीर समस्या है। इसके अतिरिक्त, फुट ओवर ब्रिज का निर्माण भी अधूरा है, जिससे यात्रियों को ट्रैक पार करके जाना पड़ता है, जो सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। छठ, कांवर यात्रा, परीक्षाओं या अन्य अवसरों पर भीड़ बढ़ने पर यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। बुनियादी सुविधाओं पर नहीं दिया गया ध्यान स्थानीय समाजसेवियों और यात्रियों ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, उद्घाटन की चमक तो दिखाई गई, लेकिन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टेशन मास्टर नीरज कुमार से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “इसकी डिटेल मेरे पास नहीं है।” यह बयान रेलवे की उदासीनता को दर्शाता है। अमृत भारत योजना के तहत शौचालय, फुट ओवर ब्रिज और लिफ्ट जैसी सुविधाएं शामिल हैं, लेकिन नवादा में इन पर काम की गति धीमी है। जबकि देश भर में 2025 तक 155 स्टेशन पूरे हो चुके हैं, नवादा अभी भी अधूरा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि काम जारी है और सुविधाएं जल्द पूरी होंगी। यात्री उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 तक ये समस्याएं हल हो जाएंगी, अन्यथा आधुनिकता की चमक के बीच यात्रियों की बदहाली जारी रहेगी। यह मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है, जिस पर रेल मंत्रालय को तत्काल ध्यान देना चाहिए।


