बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्य सचिव ने सभी विभागों को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की जियो स्पैशियल सेवाओं का व्यवस्थित एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कहा कि इसके तहत 50 करोड़ रुपए या उससे अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं की डीपीआर में जियो स्पैशियल एनालिटिक्स को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके अंतर्गत संबंधित विभाग द्वारा बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की सेवाओं के उपयोग के लिए कुल परियोजना लागत का मात्र 0.25 प्रतिशत शुल्क देना होगा। साथ ही मुख्य सचिव ने बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की जियो स्पैशियल क्षमताओं को राज्य की अवसंरचना योजना प्रक्रिया से औपचारिक रूप से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अवसंरचना विकास को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिए बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की सेवाओं का उपयोग अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि योजना निर्माण के स्तर पर ही जियो-स्पैशियल इनपुट को शामिल किया जाए, ताकि बाद के चरणों में तकनीकी, प्रशासनिक और भूमि संबंधी बाधाओं से बचा जा सके। डिजिटल टूल बनाया जा रहा बैठक में विभागीय सचिव ने बताया कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान के सहयोग से अवसंरचना परियोजनाओं के लिए डीपीआर निर्माण के लिए एक डिजिटल टूल बनाया जा रहा है। यह टूल पीएम गति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागीय डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना, अलाइनमेंट एवं आकलन में सहायता करेगा और डीपीआर निर्माण को अधिक सटीक बनाएगा। इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी। बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा और अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव मौजूद थे। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान मुख्य सचिव ने सभी विभागों को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की जियो स्पैशियल सेवाओं का व्यवस्थित एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कहा कि इसके तहत 50 करोड़ रुपए या उससे अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं की डीपीआर में जियो स्पैशियल एनालिटिक्स को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके अंतर्गत संबंधित विभाग द्वारा बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की सेवाओं के उपयोग के लिए कुल परियोजना लागत का मात्र 0.25 प्रतिशत शुल्क देना होगा। साथ ही मुख्य सचिव ने बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की जियो स्पैशियल क्षमताओं को राज्य की अवसंरचना योजना प्रक्रिया से औपचारिक रूप से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अवसंरचना विकास को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिए बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की सेवाओं का उपयोग अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि योजना निर्माण के स्तर पर ही जियो-स्पैशियल इनपुट को शामिल किया जाए, ताकि बाद के चरणों में तकनीकी, प्रशासनिक और भूमि संबंधी बाधाओं से बचा जा सके। डिजिटल टूल बनाया जा रहा बैठक में विभागीय सचिव ने बताया कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान के सहयोग से अवसंरचना परियोजनाओं के लिए डीपीआर निर्माण के लिए एक डिजिटल टूल बनाया जा रहा है। यह टूल पीएम गति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागीय डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना, अलाइनमेंट एवं आकलन में सहायता करेगा और डीपीआर निर्माण को अधिक सटीक बनाएगा। इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी। बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा और अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव मौजूद थे।


