पर्यटक ध्यान रखें : लाइफ जैकेट मांगें। नाव पलटने या अचानक लहरों में गिरने पर इससे बचेंगे। लाइफ जैकेट आईएसओ मानक वाली हो। बोट की क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाए तो विरोध करें और बैठने से बचें। लाइफ रिंग पानी में गिरे व्यक्ति को पकड़ने और बाहर निकालने के काम आता है। पटना|दीघा घाट से गंगा में पर्यटकों की सुरक्षा ताक पर रखकर स्पीड बोट चलाई जा रही है। बिना लाइफ जैकेट स्पीड बोट पर बैठा दिया जाता है। पर्यटकों ने बताया कि मांगने के बाद भी लाइफ जैकेट नहीं मिली। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि रोज बिना लाइफ जैकेट के स्पीड बोट पर बैठाया जा रहा है। कई बार तो हादसा होते-होते बचा है। दीघा घाट शहर का पर्यटक स्थल बन गया है। लेकिन, प्रशासन द्वारा निगरानी नहीं होने से स्पीड बोट का परिचालन करने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जनार्दन घाट से भी स्पीड बोट का परिचालन किया जा रहा है। जीवनरक्षक रिंग भी नहीं रहती है। पूछने पर पर्यटन निगम की ओर से बताया कि स्पीड बोट हमलोगों की नहीं है। कौन चला रहा है, इसकी भी जानकारी नहीं है। पर्यटक ध्यान रखें : लाइफ जैकेट मांगें। नाव पलटने या अचानक लहरों में गिरने पर इससे बचेंगे। लाइफ जैकेट आईएसओ मानक वाली हो। बोट की क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाए तो विरोध करें और बैठने से बचें। लाइफ रिंग पानी में गिरे व्यक्ति को पकड़ने और बाहर निकालने के काम आता है। पटना|दीघा घाट से गंगा में पर्यटकों की सुरक्षा ताक पर रखकर स्पीड बोट चलाई जा रही है। बिना लाइफ जैकेट स्पीड बोट पर बैठा दिया जाता है। पर्यटकों ने बताया कि मांगने के बाद भी लाइफ जैकेट नहीं मिली। वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि रोज बिना लाइफ जैकेट के स्पीड बोट पर बैठाया जा रहा है। कई बार तो हादसा होते-होते बचा है। दीघा घाट शहर का पर्यटक स्थल बन गया है। लेकिन, प्रशासन द्वारा निगरानी नहीं होने से स्पीड बोट का परिचालन करने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जनार्दन घाट से भी स्पीड बोट का परिचालन किया जा रहा है। जीवनरक्षक रिंग भी नहीं रहती है। पूछने पर पर्यटन निगम की ओर से बताया कि स्पीड बोट हमलोगों की नहीं है। कौन चला रहा है, इसकी भी जानकारी नहीं है।


