मेरठ के दो गांव में धारा 163 लागू:2 बड़ी वारदात के बाद प्रशासन का एक्शन, ज्वालागढ़ और कपसाड़ में 26 जनवरी तक रोक

मेरठ के सरधना का दो गांव ज्वालागढ़ और कपसाड़ इन दिनों सुर्खियों में है। इन दोनों ही जगह पिछले दिनों हुई दो बड़ी वारदात के बाद पूरे प्रदेश की निगाहें लगी हैं। नेताओं का आना लगा हुआ है। पुलिस ने एंट्री पर लगा रखी है। इसी बीच किसी भी तरह के टकराव और संघर्ष को ध्यान में रखते हुए प्रशास ने इन दोनों गांव में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी है। पहले यह धारा 144 थी। इसके तहत इन दो गांव में 26 जनवरी तक किसी बाहरी के आने पर रोक रहेगी। गांव में भी लोगों को इकट्‌ठा नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से बुधवार को जारी आदेश के अनुसार दोनों गांवों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही किसी भी सामाजिक, राजनीतिक अथवा अन्य प्रकार के संगठन या समूह द्वारा किसी तरह का कार्यक्रम आयोजित करने पर भी रोक लगा दी गई है। किसी संगठन से जुड़े व्यक्तियों का गांवों में आवागमन भी प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन की परमिशन से ही मिलेगी एंट्री
हालांकि बिजली, चिकित्सा, खाद्य आपूर्ति, पोस्ट व पार्सल सहित अन्य आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इस आदेश से मुक्त रखा गया है। किसी अपरिहार्य स्थिति में बाहरी व्यक्ति को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बाद ही गांव में प्रवेश की अनुमति होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियां आपातकालीन और संवेदनशील होने के कारण यह आदेश जन सुरक्षा, शांति व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है। क्षेत्र में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। जानिए क्या है बीएनएस की धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 144 का नया रूप है, जो जिला मजिस्ट्रेट को उपद्रव या आसन्न खतरे (nuisance or apprehended danger) की स्थिति में तत्काल आदेश जारी करने का अधिकार देती है। जिससे सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके, जैसे भीड़ इकट्ठा होने, हथियार ले जाने, या किसी विशेष गतिविधि (जैसे डीजे, पटाखे) पर रोक लगाना। यह धारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगा सकती है, जिसमें लोगों की आवाजाही, संचार उपकरणों का उपयोग, या कुछ स्थानों पर जाने से रोकना शामिल है। धारा 163 BNSS के मुख्य प्रावधान और उद्देश्य जानिए
कानून व्यवस्था बनाना: यह धारा मजिस्ट्रेट को सार्वजनिक शांति भंग होने से रोकने के लिए आपातकालीन आदेश जारी करने की शक्ति देती है।
प्रतिबंध लगाने की शक्ति: मजिस्ट्रेट व्यक्तियों को कुछ कार्यों से दूर रहने या संपत्ति के संबंध में विशेष कार्य करने का निर्देश दे सकते हैं। यह इन स्थितियों में लागू होती है-
मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा।
सार्वजनिक शांति में बाधा, दंगे या झगड़े रोकना।
गैरकानूनी सभा, रैली, जुलूस, या धरने रोकना।
हथियार, लाठी, या अन्य आपत्तिजनक सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध।
लाउडस्पीकर, पोस्टर, बैनर के उपयोग पर रोक।
इन मौकों पर लगता है प्रतिबंध
​​​​​​​त्योहारों, चुनावों या संवेदनशील घटनाओं के दौरान शांति बनाए रखने के लिए धारा 163 के तहत अक्सर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जैसे हथियार और डीजे पर रोक लगाना।
संक्षेप में, BNSS की धारा 163 एक निवारक उपाय है जो अधिकारियों को किसी भी संभावित अशांति या खतरे को रोकने के लिए त्वरित और अस्थायी आदेश जारी करने में सक्षम बनाती है, जैसा कि पहले धारा 144 CrPC करती थी

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