बुलंदशहर रोड स्थित श्री मां मनसा देवी मंदिर परिसर में 16वें वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा व्यास आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज महाराज ने प्रभु के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया, जिससे पूरा वातावरण ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने झूमते-गाते हुए कन्हैया के जन्म की खुशियां मनाईं। कथा के दौरान आचार्य राजीव कृष्ण भारद्वाज ने वामन अवतार और समुद्र मंथन की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा बलि का अहंकार बढ़ने पर भगवान ने वामन रूप धारण कर तीन पग में उनका सर्वस्व नाप लिया। उन्होंने संदेश दिया कि भगवान केवल प्रेम और समर्पण के भूखे हैं। इसके बाद गजेंद्र मोक्ष के प्रसंग के माध्यम से समझाया गया कि संकट में परमात्मा को पुकारने पर ईश्वर रक्षा के लिए आते हैं। व्यास पीठ से महाराज जी ने कंस के अत्याचारों, देवकी-वासुदेव के कारावास और आकाशवाणी का जीवंत चित्रण किया। उन्होंने कहा कि जब समाज में अधर्म बढ़ता है, तब प्रभु स्वयं अवतार लेते हैं। रात्रि के घनघोर अंधेरे और बारिश के बीच वासुदेव जी के बाल रूप कृष्ण को लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। भगवान के जन्म की घोषणा होते ही पूरा पंडाल गोकुल धाम में परिवर्तित हो गया। भव्य झांकी के साथ बाल कृष्ण को पालने में झुलाया गया। आयोजन समिति ने खिलौने, माखन-मिश्री, फल और मिठाइयां वितरित कीं। मंदिर प्रांगण को रंग-बिरंगी लाइटों, फूल बंगला और गुब्बारों से भव्य रूप से सजाया गया था। कथावाचक ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर सोई हुई चेतना के जागने का प्रतीक है।


