मकर संक्रांति का त्योहार नजदीक आते ही गोपालगंज के बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। तिलकुट और चूड़ा की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। विभिन्न किस्मों के तिलकुट और चूड़ा से बाजार पूरी तरह सज चुके हैं, जहां लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। ठंड के बावजूद सुबह से ही दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। गोपालगंज के बाजारों की एक खास विशेषता यह है कि यहां गया के प्रसिद्ध तिलकुट कारीगरों को विशेष रूप से बुलाया गया है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, मकर संक्रांति के लिए ये कारीगर पहले से ही गया से बुलाए गए हैं, जो सुबह से देर शाम तक तिल और गुड़-चीनी के मिश्रण को कूटने में व्यस्त हैं। इस वर्ष तिलकुट की कीमतों में पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल के दामों में हुई वृद्धि है। बाजार में तिलकुट की दरें गुणवत्ता और प्रकार के आधार पर 400 रुपये से लेकर 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। खोआ तिलकुट 800 रुपये प्रति किलो, स्पेशल खस्ता 460 रुपये, तिल पापड़ी 400 रुपये, काला तिल 400 रुपये, लड्डू 400 रुपये, गजक 200 रुपये, प्लेन तिलकुट 360 रुपये और अनारकली तिलकुट 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। तिलकुट के साथ-साथ चूड़ा की मांग भी चरम पर है। बाजार में 45 रुपये से लेकर 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक के चूड़ा उपलब्ध हैं। भागलपुरी चूड़ा 70 रुपये, मालभोग 180 रुपये, मरचईया चैंपटिया 160 रुपये, मरचईया 120 रुपये, कतरनी 100 रुपये, पत्ती चूड़ा और मोटा चूड़ा 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। मकर संक्रांति का त्योहार नजदीक आते ही गोपालगंज के बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। तिलकुट और चूड़ा की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। विभिन्न किस्मों के तिलकुट और चूड़ा से बाजार पूरी तरह सज चुके हैं, जहां लोग अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। ठंड के बावजूद सुबह से ही दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। गोपालगंज के बाजारों की एक खास विशेषता यह है कि यहां गया के प्रसिद्ध तिलकुट कारीगरों को विशेष रूप से बुलाया गया है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, मकर संक्रांति के लिए ये कारीगर पहले से ही गया से बुलाए गए हैं, जो सुबह से देर शाम तक तिल और गुड़-चीनी के मिश्रण को कूटने में व्यस्त हैं। इस वर्ष तिलकुट की कीमतों में पिछले साल की तुलना में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल के दामों में हुई वृद्धि है। बाजार में तिलकुट की दरें गुणवत्ता और प्रकार के आधार पर 400 रुपये से लेकर 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। खोआ तिलकुट 800 रुपये प्रति किलो, स्पेशल खस्ता 460 रुपये, तिल पापड़ी 400 रुपये, काला तिल 400 रुपये, लड्डू 400 रुपये, गजक 200 रुपये, प्लेन तिलकुट 360 रुपये और अनारकली तिलकुट 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। तिलकुट के साथ-साथ चूड़ा की मांग भी चरम पर है। बाजार में 45 रुपये से लेकर 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक के चूड़ा उपलब्ध हैं। भागलपुरी चूड़ा 70 रुपये, मालभोग 180 रुपये, मरचईया चैंपटिया 160 रुपये, मरचईया 120 रुपये, कतरनी 100 रुपये, पत्ती चूड़ा और मोटा चूड़ा 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं।


