पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर बेतिया से भाजपा सांसद डॉ. संजय जयसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ममता बनर्जी पर चुनावी राजनीति के लिए भ्रम फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया। सांसद जयसवाल ने स्पष्ट किया कि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का कार्य राज्य सरकार के अधीन शिक्षकों द्वारा ही किया जाता है, न कि केंद्र सरकार या किसी बाहरी एजेंसी द्वारा। इसके बावजूद, ममता बनर्जी इसे जानबूझकर विवादित बना रही हैं। सीमा पर कार्रवाई करना BSF का अधिकार डॉ. जयसवाल ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश सीमा पर कोई बांग्लादेशी नागरिक पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई करना BSF का अधिकार है। इसमें किसी प्रकार की राजनीति को घसीटना अनुचित है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की असली परेशानी SIR या सीमा सुरक्षा नहीं, बल्कि उनका वोट बैंक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कभी भारत के बंगालियों पर भरोसा करके चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि वे हमेशा बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को आधार बनाकर सत्ता में बनी रही हैं। सत्यापन और अवैध नामों के हटाने से वोट बैंक होगा कमजोर डॉ. जयसवाल के अनुसार, अब जब मतदाता सूची के सत्यापन और अवैध नामों को हटाने की प्रक्रिया तेज हो रही है, तो उन्हें डर सता रहा है कि इससे उनका वोट बैंक कमजोर पड़ जाएगा। यही कारण है कि ममता बनर्जी बार-बार SIR और BSF जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयान दे रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में शुद्ध और निष्पक्ष चुनाव आवश्यक हैं। मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाना एक संविधानसम्मत प्रक्रिया है और इससे किसी भी भारतीय नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी का वोट छीनना नहीं डॉ. जयसवाल ने यह भी कहा कि जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें संरक्षण देना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। भाजपा सांसद ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी का वोट छीनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि केवल भारतीय नागरिक ही चुनाव में मतदान करें। अंत में, संजय जयसवाल ने ममता बनर्जी को सलाह दी कि वे भ्रम फैलाने के बजाय सच्चाई स्वीकार करें और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करें। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर बेतिया से भाजपा सांसद डॉ. संजय जयसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ममता बनर्जी पर चुनावी राजनीति के लिए भ्रम फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया। सांसद जयसवाल ने स्पष्ट किया कि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का कार्य राज्य सरकार के अधीन शिक्षकों द्वारा ही किया जाता है, न कि केंद्र सरकार या किसी बाहरी एजेंसी द्वारा। इसके बावजूद, ममता बनर्जी इसे जानबूझकर विवादित बना रही हैं। सीमा पर कार्रवाई करना BSF का अधिकार डॉ. जयसवाल ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश सीमा पर कोई बांग्लादेशी नागरिक पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई करना BSF का अधिकार है। इसमें किसी प्रकार की राजनीति को घसीटना अनुचित है। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की असली परेशानी SIR या सीमा सुरक्षा नहीं, बल्कि उनका वोट बैंक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कभी भारत के बंगालियों पर भरोसा करके चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि वे हमेशा बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या अल्पसंख्यकों को आधार बनाकर सत्ता में बनी रही हैं। सत्यापन और अवैध नामों के हटाने से वोट बैंक होगा कमजोर डॉ. जयसवाल के अनुसार, अब जब मतदाता सूची के सत्यापन और अवैध नामों को हटाने की प्रक्रिया तेज हो रही है, तो उन्हें डर सता रहा है कि इससे उनका वोट बैंक कमजोर पड़ जाएगा। यही कारण है कि ममता बनर्जी बार-बार SIR और BSF जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयान दे रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में शुद्ध और निष्पक्ष चुनाव आवश्यक हैं। मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाना एक संविधानसम्मत प्रक्रिया है और इससे किसी भी भारतीय नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी का वोट छीनना नहीं डॉ. जयसवाल ने यह भी कहा कि जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें संरक्षण देना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। भाजपा सांसद ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी का वोट छीनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि केवल भारतीय नागरिक ही चुनाव में मतदान करें। अंत में, संजय जयसवाल ने ममता बनर्जी को सलाह दी कि वे भ्रम फैलाने के बजाय सच्चाई स्वीकार करें और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करें।


