एसआरएन (स्वरूप रानी नेहरू) अस्पताल में हुई एक गंभीर मारपीट की घटना के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में दो रेजिडेंट डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह के निर्देश पर की गई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और रिपोर्ट आने तक दोनों डॉक्टरों को चिकित्सकीय और शैक्षणिक कार्यों से अलग रखा गया है। मामला 11 जनवरी की शाम का है, जब कौशांबी जिले के ऊंचाहार निवासी 55 वर्षीय सपत राम पेट में तेज दर्द की शिकायत के साथ एसआरएन अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने आंत फटने की आशंका जताते हुए तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। आरोप है कि ऑपरेशन के लिए मरीज को करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई। देर रात लगभग 12 बजे सर्जरी की गई, लेकिन तब तक संक्रमण फैल चुका था।इसी बीच मरीज की बेटी किरण ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन में देरी के कारण पिता की हालत गंभीर हो गई और उनके मुंह से झाग आने लगा। इससे गुस्साए परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो बाद में मारपीट में बदल गई। तकनीशियन छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच भी झड़प हुई, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।जांच में सामने आया कि उस समय ड्यूटी पर तैनात कुछ तकनीशियन छात्र मौजूद नहीं थे। इस पर अस्पताल प्रशासन ने उनकी अनुपस्थिति दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोनों सस्पेंड रेजिडेंट डॉक्टरों को प्राचार्य कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। एसआरएन अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि कॉलेज और अस्पताल में अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने समय पर ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन तकनीशियन छात्रों के सहयोग न मिलने से देरी हुई।फिलहाल मामले की विस्तृत जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मरीजों की सुरक्षा और समय पर इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा


