किराएदार से कमरा खाली कराने में मकान मालिक को 24 साल लग गए। सिविल कोर्ट, ट्रायल कोर्ट से मिली हार के बाद मकान मालिक अनिल कुमार कुशवाह ने 2010 में हाई कोर्ट में अपील पेश की। 13 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार की और किराएदार को कमरा खाली करने का निर्देश दिया। कमरा एक माह के भीतर खाली करना होगा। मामला तानसेन रोड स्थित इंटक कार्यालय के सामने स्थित भवन का है। इसमें बने एक कमरे को अनिल कुमार कुशवाह ने 17 अक्टूबर 2001 को अनिल कुमार गुप्ता को किराए पर दिया था। हाई कोर्ट में दायर अपील में बताया गया कि कुछ समय के लिए ही कमरा किराए पर दिया गया था। जब किराएदार ने कमरा खाली नहीं किया तो 2001 के अंत में ही सिविल कोर्ट में केस लगाया गया। इसमें फैसला आने में आठ साल लग गए। सिविल कोर्ट ने किराएदार के पक्ष में फैसला दिया। मकान मालिक ने अपील की, वो भी खारिज हो गई जिसके बाद हाई कोर्ट में अपील पेश की गई। लगभग 15 साल कोर्ट में केस की सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने कमरा खाली कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही 6 माह में इजरा पूरा करने का निर्देश भी दिया है। ताकि वास्तविक कब्जा मिलने में और देरी ना हो।


