अहिल्या महोत्सव पर 30 लाख खर्च, उठे सवाल:आध्यात्मिक नगरी में भक्ति की जगह फूहड़ मनोरंजन का आरोप

अहिल्या महोत्सव पर 30 लाख खर्च, उठे सवाल:आध्यात्मिक नगरी में भक्ति की जगह फूहड़ मनोरंजन का आरोप

दरभंगा में आयोजित 14वां अहिल्या महोत्सव गहरे सवालों के घेरे में है। रामायण-काल से जुड़े और नारी सशक्तिकरण के प्रतीक इस आध्यात्मिक स्थल पर हुए तीन दिवसीय राजकीय महोत्सव पर करीब 30 लाख रुपये खर्च किए गए। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस आयोजन से न तो स्थल की गरिमा बढ़ी और न ही धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य पूरे हुए। स्थानीय जनमानस का कहना है कि महोत्सव का मूल उद्देश्य—माता अहिल्या के प्रसंग, गौतम ऋषि की तपस्या और रामायण से जुड़े इस पवित्र स्थल की महत्ता को जीवंत करना—पूरी तरह गौण हो गया। पंडाल में प्रवचन, भक्ति संगीत और धार्मिक विमर्श के स्थान पर कथित तौर पर अश्लील भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति ने लोगों को आहत किया। नारी सशक्तिकरण के प्रतीक अहिल्यास्थान में अश्लील गाने, महोत्सव पर उठे सवाल महोत्सव के दौरान पंडाल में “कमरिया करे लपालप” और “तू लगावेलू जब लिपस्टिक…” जैसे गीतों की प्रस्तुति पर खासा आक्रोश है। स्थानीय महिलाओं और प्रबुद्धजनों का कहना है कि नारी सशक्तिकरण की प्रतीक माता अहिल्या की भूमि पर ऐसे गीत शर्मनाक हैं। कई लोगों ने इसे स्थल की मर्यादा के साथ खिलवाड़ बताया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, राज्यसभा सांसद धर्मशिला गुप्ता, स्थानीय विधायक जीवेश कुमार सहित कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम सूची में रहे, लेकिन अधिकांश प्रमुख अतिथि अहिल्यास्थान नहीं पहुंचे। वहीं, ठंड से बचाव के लिए विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों के लिए गैस हीटर लगाए गए, जबकि दर्शक कड़ाके की ठंड में अलाव तक के बिना बैठे रहे। एक ओर ठंड के कारण विद्यालय बंद कराए गए, तो दूसरी ओर छोटी-छोटी बच्चियों को कलश यात्रा में शामिल कराए जाने पर भी सवाल उठे। अहिल्यास्थान में फिल्मी गीतों पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराज़गी मशहूर ग़ज़ल गायक कुमार सत्यम और बॉलीवुड सिंगर जॉली मुखर्जी जैसे कलाकारों की मौजूदगी पर भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि आध्यात्मिक नगरी में फिल्मी गीतों की क्या आवश्यकता थी? बताया गया कि जॉली मुखर्जी के गायन के दौरान दो-तीन गीतों के बाद ही श्रोता पंडाल छोड़कर चले गए। धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य विफल, मनोरंजन कार्यक्रम बनाने का आरोप सिया-पिया मंदिर के महंथ बजरंगी सदा ने कहा, “महोत्सव अहिल्या माता के नाम पर था, लेकिन इसे प्रशासनिक निर्देश पर मनोरंजन कार्यक्रम बना दिया गया। भक्ति के बजाय फिल्मी गाने गाए गए।” गौतम कुंड आश्रम के महंथ किशोरी शरण ने बताया कि “हमें न निमंत्रण मिला, न सहभागिता। कथा, झांकी और भजन होने चाहिए थे, लेकिन पूरा कार्यक्रम फिल्मी गीतों में खो गया।” पूर्व मुखिया अनिल राम ने बताया कि “यह तीर्थ स्थल है। प्रशासन की मौजूदगी में अश्लील गीत गाए गए, जो अशोभनीय है।” स्थानीय निवासी पवन कुमार ठाकुर ने बताया कि “यह 14वां महोत्सव था, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में फिल्मी गीतों का बोलबाला रहा।” स्थानीय बोले- भक्ति, विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी स्थानीय लोगों के अनुसार, इस महोत्सव से अहिल्यास्थान ने पैसा, मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा खोई है। अहिल्या स्मारिका भी इस बार वह गरिमामयी स्वरूप नहीं पा सकी, जो पहले मिलता रहा है। लोगों का कहना है कि मनोरंजन के मंच हजारों हैं, लेकिन अहिल्यास्थान जैसा आध्यात्मिक केंद्र बहुत दुर्लभ है—जहां भक्ति, विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। अब सवाल यह है कि 30 लाख रुपए के इस आयोजन से अहिल्यास्थान को वास्तव में क्या मिला? इसका जवाब प्रशासन और सरकार को देना होगा। दरभंगा में आयोजित 14वां अहिल्या महोत्सव गहरे सवालों के घेरे में है। रामायण-काल से जुड़े और नारी सशक्तिकरण के प्रतीक इस आध्यात्मिक स्थल पर हुए तीन दिवसीय राजकीय महोत्सव पर करीब 30 लाख रुपये खर्च किए गए। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस आयोजन से न तो स्थल की गरिमा बढ़ी और न ही धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य पूरे हुए। स्थानीय जनमानस का कहना है कि महोत्सव का मूल उद्देश्य—माता अहिल्या के प्रसंग, गौतम ऋषि की तपस्या और रामायण से जुड़े इस पवित्र स्थल की महत्ता को जीवंत करना—पूरी तरह गौण हो गया। पंडाल में प्रवचन, भक्ति संगीत और धार्मिक विमर्श के स्थान पर कथित तौर पर अश्लील भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति ने लोगों को आहत किया। नारी सशक्तिकरण के प्रतीक अहिल्यास्थान में अश्लील गाने, महोत्सव पर उठे सवाल महोत्सव के दौरान पंडाल में “कमरिया करे लपालप” और “तू लगावेलू जब लिपस्टिक…” जैसे गीतों की प्रस्तुति पर खासा आक्रोश है। स्थानीय महिलाओं और प्रबुद्धजनों का कहना है कि नारी सशक्तिकरण की प्रतीक माता अहिल्या की भूमि पर ऐसे गीत शर्मनाक हैं। कई लोगों ने इसे स्थल की मर्यादा के साथ खिलवाड़ बताया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, राज्यसभा सांसद धर्मशिला गुप्ता, स्थानीय विधायक जीवेश कुमार सहित कुछ जनप्रतिनिधियों के नाम सूची में रहे, लेकिन अधिकांश प्रमुख अतिथि अहिल्यास्थान नहीं पहुंचे। वहीं, ठंड से बचाव के लिए विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों के लिए गैस हीटर लगाए गए, जबकि दर्शक कड़ाके की ठंड में अलाव तक के बिना बैठे रहे। एक ओर ठंड के कारण विद्यालय बंद कराए गए, तो दूसरी ओर छोटी-छोटी बच्चियों को कलश यात्रा में शामिल कराए जाने पर भी सवाल उठे। अहिल्यास्थान में फिल्मी गीतों पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराज़गी मशहूर ग़ज़ल गायक कुमार सत्यम और बॉलीवुड सिंगर जॉली मुखर्जी जैसे कलाकारों की मौजूदगी पर भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि आध्यात्मिक नगरी में फिल्मी गीतों की क्या आवश्यकता थी? बताया गया कि जॉली मुखर्जी के गायन के दौरान दो-तीन गीतों के बाद ही श्रोता पंडाल छोड़कर चले गए। धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य विफल, मनोरंजन कार्यक्रम बनाने का आरोप सिया-पिया मंदिर के महंथ बजरंगी सदा ने कहा, “महोत्सव अहिल्या माता के नाम पर था, लेकिन इसे प्रशासनिक निर्देश पर मनोरंजन कार्यक्रम बना दिया गया। भक्ति के बजाय फिल्मी गाने गाए गए।” गौतम कुंड आश्रम के महंथ किशोरी शरण ने बताया कि “हमें न निमंत्रण मिला, न सहभागिता। कथा, झांकी और भजन होने चाहिए थे, लेकिन पूरा कार्यक्रम फिल्मी गीतों में खो गया।” पूर्व मुखिया अनिल राम ने बताया कि “यह तीर्थ स्थल है। प्रशासन की मौजूदगी में अश्लील गीत गाए गए, जो अशोभनीय है।” स्थानीय निवासी पवन कुमार ठाकुर ने बताया कि “यह 14वां महोत्सव था, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में फिल्मी गीतों का बोलबाला रहा।” स्थानीय बोले- भक्ति, विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी स्थानीय लोगों के अनुसार, इस महोत्सव से अहिल्यास्थान ने पैसा, मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा खोई है। अहिल्या स्मारिका भी इस बार वह गरिमामयी स्वरूप नहीं पा सकी, जो पहले मिलता रहा है। लोगों का कहना है कि मनोरंजन के मंच हजारों हैं, लेकिन अहिल्यास्थान जैसा आध्यात्मिक केंद्र बहुत दुर्लभ है—जहां भक्ति, विमर्श और सांस्कृतिक चेतना को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। अब सवाल यह है कि 30 लाख रुपए के इस आयोजन से अहिल्यास्थान को वास्तव में क्या मिला? इसका जवाब प्रशासन और सरकार को देना होगा।  

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