सारण जिले में गंभीर अपराधों के निपटारे की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए 13 जनवरी 2026 को हत्या के एक पुराने मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही उसे 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। पुलिस और न्यायालय की संयुक्त कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के निर्देश के तहत वर्ष 2026 में सारण जिले में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को चिन्हित कर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसमें साक्षियों की समय पर पेशी और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के आधार पर न्यायालय में मजबूत पक्ष रखा जा रहा है। जनता-बाजार थाना का पुराना मामला इस कड़ी में जनताबाजार थाना कांड संख्या 69/10, दिनांक 13 सितंबर 2010 का मामला शामिल था। यह मामला धारा 302/201/34 भारतीय दंड संहिता (भादंवि) से संबंधित था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-13 श्री श्रीकांत सिंह की अदालत ने अभियुक्त सरोज चौधरी को धारा 302 भादंवि के तहत दोषी ठहराया। इसके लिए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड की राशि जमा न करने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 201 भादंवि के तहत तीन वर्ष का कारावास भी दिया गया। अनुसंधान और साक्ष्य की भूमिका अदालत ने पुलिस द्वारा किए गए अनुसंधान को सुदृढ़ और प्रमाणिक माना। अभियोजन पक्ष ने कुल आठ साक्षियों की गवाही कराई, जिनके आधार पर अभियुक्त का अपराध सिद्ध हुआ। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा और अपर लोक अभियोजक प्रियरंजन सिन्हा ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा। अभियुक्त की पहचान सजायाफ्ता अभियुक्त की पहचान इस प्रकार है: पुलिस का संदेश सारण पुलिस ने कहा कि भविष्य में गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित विचारण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि दोषियों को समय पर सजा दिलाई जा सके और आम जनता में कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो। सारण जिले में गंभीर अपराधों के निपटारे की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए 13 जनवरी 2026 को हत्या के एक पुराने मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही उसे 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। पुलिस और न्यायालय की संयुक्त कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के निर्देश के तहत वर्ष 2026 में सारण जिले में गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को चिन्हित कर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसमें साक्षियों की समय पर पेशी और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के आधार पर न्यायालय में मजबूत पक्ष रखा जा रहा है। जनता-बाजार थाना का पुराना मामला इस कड़ी में जनताबाजार थाना कांड संख्या 69/10, दिनांक 13 सितंबर 2010 का मामला शामिल था। यह मामला धारा 302/201/34 भारतीय दंड संहिता (भादंवि) से संबंधित था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-13 श्री श्रीकांत सिंह की अदालत ने अभियुक्त सरोज चौधरी को धारा 302 भादंवि के तहत दोषी ठहराया। इसके लिए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड की राशि जमा न करने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 201 भादंवि के तहत तीन वर्ष का कारावास भी दिया गया। अनुसंधान और साक्ष्य की भूमिका अदालत ने पुलिस द्वारा किए गए अनुसंधान को सुदृढ़ और प्रमाणिक माना। अभियोजन पक्ष ने कुल आठ साक्षियों की गवाही कराई, जिनके आधार पर अभियुक्त का अपराध सिद्ध हुआ। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा और अपर लोक अभियोजक प्रियरंजन सिन्हा ने प्रभावी रूप से पक्ष रखा। अभियुक्त की पहचान सजायाफ्ता अभियुक्त की पहचान इस प्रकार है: पुलिस का संदेश सारण पुलिस ने कहा कि भविष्य में गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित विचारण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि दोषियों को समय पर सजा दिलाई जा सके और आम जनता में कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो।


