64 स्थानों पर भूजल संकेत, 55 बिल्कुल नए संभावित स्रोत उभरे

64 स्थानों पर भूजल संकेत, 55 बिल्कुल नए संभावित स्रोत उभरे

जैसलमेर जिले की पोकरण विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2021 में कराए गए हेलीबोर्न सर्वे के परिणाम उत्साहजनक पाए गए हैं। पश्चिम राजस्थान के जल-विहीन हिस्सों में जल संकट के स्थायी समाधान की संभावनाएं इस सर्वे के साथ और सशक्त हुई हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट जिला कलक्टर, जैसलमेर को भेजी गई है। सर्वे भारत सरकार के केंद्रीय भूजल बोर्ड, एनजीआरआइ हैदराबाद और राज्य के भूजल विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया।

सर्वे के दौरान फलसूंड से छायण और धुडसर से राजगढ़ तक विस्तृत भू-भाग में भूजल संभावनाओं को वैज्ञानिक तरीके से खंगाला गया। वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक नारायण दास इणखिया ने बताया कि पोकरण तहसील का अधिकांश हिस्सा भूजल की दृष्टि से अल्प जल वाला माना जाता रहा है, पर सर्वे में ऐसे गांवों में भी भूजल मिलने की संभावना सामने आई है जहां पहले उम्मीद नहीं थी।

क्या है हेलीबोर्न सर्वे

यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल तकनीक से हेलीकॉप्टर के माध्यम से भूजल की खोज की प्रक्रिया है। कम समय में बड़े भू-भाग पर अत्यंत सटीक परिणाम मिल जाते हैं। रिपोर्ट में 64 स्थानों पर भूजल उपलब्धता के संकेत मिले हैं, जिनमें 55 ऐसे क्षेत्र हैं जहां पूर्व में कोई स्रोत नहीं मिला था। लगभग 15 हजार वर्ग किलोमीटर में किए गए इस सर्वे ने न सिर्फ संभावित स्रोतों की पहचान की बल्कि भूजल पुनर्भरण के अनुकूल क्षेत्रों का भी निर्धारण किया।
यद्यपि पोकरण और भनियाणा उपखंड में नहर का पेयजल उपलब्ध है, फिर भी चिन्हित स्थलों पर नलकूप निर्माण भविष्य में आपात स्थितियों में राहत दे सकता है। विशेष रूप से फलसूंड क्षेत्र में भूजल उपलब्धता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय जल सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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