शेखपुरा के सदर प्रखंड अंतर्गत कुसुंभा रेलवे हॉल्ट के समीप स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित अंडरपास निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग मोर्चा की एक अहम बैठक क्रॉसिंग के पास आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और एक स्वर में अंडरपास निर्माण का विरोध करते हुए इसके स्थान पर ओवरब्रिज या समपार (लेवल क्रॉसिंग) बनाने की मांग की। मोर्चा ने भी ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन किया। जेसीबी पहुंचते ही ग्रामीणों ने रोका काम मोर्चा के संयोजक नील मोहन ने बताया कि दो दिन पहले रेलवे विभाग द्वारा नियुक्त ठेकेदार अंडरपास निर्माण शुरू कराने के लिए जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे थे। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और काम शुरू करने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित अंडरपास अव्यावहारिक है और इससे भविष्य में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होंगी। खासकर बरसात के दिनों में जलजमाव, वाहनों की आवाजाही में कठिनाई और पैदल यात्रियों के लिए खतरा बना रहेगा। पिछले तीन वर्षों से ओवरब्रिज की मांग नील मोहन ने कहा कि कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग पर पिछले 3 सालों से लगातार ओवरब्रिज की मांग की जा रही है। इसके लिए रेलवे विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग मनमाने तरीके से कहीं ओवरब्रिज तो कहीं अंडरपास बना रहा है, जो न तो समान नीति के अनुरूप है और न ही स्थानीय जरूरतों के अनुसार। कुसुंभा जैसी व्यस्त क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज ही एकमात्र स्थायी और सुरक्षित समाधान है। अंडरपास से बढ़ेंगी समस्याएं : ग्रामीण बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, किसान, बुजुर्ग और महिलाएं गुजरते हैं। अंडरपास बनने से खासकर साइकिल, मोटरसाइकिल और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी होगी। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय अंडरपास में पानी भरने की आशंका रहती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा ट्रैक्टर, एंबुलेंस और अन्य बड़े वाहनों के आवागमन में भी कठिनाई होगी। ट्रेन ठहराव की भी उठी मांग बैठक के दौरान मोर्चा के नेता कमलेश मानव ने कुसुंभा हॉल्ट पर नवादा–पटना मेमो और गया–जमालपुर फास्ट पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव की मांग भी जोर-शोर से उठाई। उन्होंने कहा कि कुसुंभा क्षेत्र की आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए इन ट्रेनों का ठहराव जरूरी है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुविधाओं के अभाव में यहां के लोगों को शेखपुरा या अन्य स्टेशनों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। आंदोलन तेज करने का संकेत मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर रेलवे अधिकारियों का घेराव, धरना-प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में ये रहे मौजूद यह बैठक मोर्चा के संयोजक नील मोहन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें मोर्चा नेता कमलेश मानव, डॉ. संतोष कुमार, ईश्वर दयाल कश्यप, कुसुंभा पंचायत के मुखिया संजय पासवान, काशीचक सरपंच संघ के अध्यक्ष दयानंद साव, उमेश ठाकुर, कोसरा पंचायत के मुखिया सुधीर कुमार, अशोक राम, रंजीत शर्मा, शिव कुमार, भोला बिंद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। शेखपुरा के सदर प्रखंड अंतर्गत कुसुंभा रेलवे हॉल्ट के समीप स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित अंडरपास निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग मोर्चा की एक अहम बैठक क्रॉसिंग के पास आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और एक स्वर में अंडरपास निर्माण का विरोध करते हुए इसके स्थान पर ओवरब्रिज या समपार (लेवल क्रॉसिंग) बनाने की मांग की। मोर्चा ने भी ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन किया। जेसीबी पहुंचते ही ग्रामीणों ने रोका काम मोर्चा के संयोजक नील मोहन ने बताया कि दो दिन पहले रेलवे विभाग द्वारा नियुक्त ठेकेदार अंडरपास निर्माण शुरू कराने के लिए जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे थे। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और काम शुरू करने से मना कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित अंडरपास अव्यावहारिक है और इससे भविष्य में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होंगी। खासकर बरसात के दिनों में जलजमाव, वाहनों की आवाजाही में कठिनाई और पैदल यात्रियों के लिए खतरा बना रहेगा। पिछले तीन वर्षों से ओवरब्रिज की मांग नील मोहन ने कहा कि कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग पर पिछले 3 सालों से लगातार ओवरब्रिज की मांग की जा रही है। इसके लिए रेलवे विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग मनमाने तरीके से कहीं ओवरब्रिज तो कहीं अंडरपास बना रहा है, जो न तो समान नीति के अनुरूप है और न ही स्थानीय जरूरतों के अनुसार। कुसुंभा जैसी व्यस्त क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज ही एकमात्र स्थायी और सुरक्षित समाधान है। अंडरपास से बढ़ेंगी समस्याएं : ग्रामीण बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि कुसुंभा रेलवे क्रॉसिंग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, किसान, बुजुर्ग और महिलाएं गुजरते हैं। अंडरपास बनने से खासकर साइकिल, मोटरसाइकिल और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी होगी। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय अंडरपास में पानी भरने की आशंका रहती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा ट्रैक्टर, एंबुलेंस और अन्य बड़े वाहनों के आवागमन में भी कठिनाई होगी। ट्रेन ठहराव की भी उठी मांग बैठक के दौरान मोर्चा के नेता कमलेश मानव ने कुसुंभा हॉल्ट पर नवादा–पटना मेमो और गया–जमालपुर फास्ट पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव की मांग भी जोर-शोर से उठाई। उन्होंने कहा कि कुसुंभा क्षेत्र की आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए इन ट्रेनों का ठहराव जरूरी है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुविधाओं के अभाव में यहां के लोगों को शेखपुरा या अन्य स्टेशनों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। आंदोलन तेज करने का संकेत मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर रेलवे अधिकारियों का घेराव, धरना-प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में ये रहे मौजूद यह बैठक मोर्चा के संयोजक नील मोहन की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इसमें मोर्चा नेता कमलेश मानव, डॉ. संतोष कुमार, ईश्वर दयाल कश्यप, कुसुंभा पंचायत के मुखिया संजय पासवान, काशीचक सरपंच संघ के अध्यक्ष दयानंद साव, उमेश ठाकुर, कोसरा पंचायत के मुखिया सुधीर कुमार, अशोक राम, रंजीत शर्मा, शिव कुमार, भोला बिंद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।


