नाबालिग के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सुपौल की पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को 24 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला भीमपुर थाना कांड संख्या 02/2021 और पॉक्सो वाद संख्या 02/2021 में करीब पांच साल बाद आया है। अदालत ने इस निर्णय के साथ महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को सख्त संदेश दिया है। मंगलवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संतोष कुमार दुबे की अदालत ने आरोपी गुलाबचंद मुखिया को सभी आरोपों में दोषी पाते हुए सजा सुनाई। दोषी करार दिया गया 35 वर्षीय आरोपी अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया आरोपी गुलाबचंद मुखिया (35 वर्ष), पिता लक्ष्मण मुखिया, निवासी ग्राम बरदाहा, थाना नरपतगंज है। न्यायालय ने पाया कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता का अपहरण कर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत आरोपी को कुल 24 वर्ष का सश्रम कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजाएं इसके अलावा अदालत ने आरोपी को अन्य धाराओं में भी दोषी ठहराया है।भा.द.वि. की न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा। 9 जनवरी को दोष सिद्ध, मंगलवार को सजा इस मामले में अदालत ने 9 जनवरी 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह कठोर फैसला सुनाया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में सफल रही। 8 गवाहों की हुई थी गवाही इस संवेदनशील मामले में कुल 8 गवाहों ने अदालत में अपनी गवाही दी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने प्रभावी तरीके से बहस की और साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार दास ने आरोपी के पक्ष में दलीलें रखीं, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। पीड़िता को 3.5 लाख रुपये मुआवजा अदालत ने पीड़िता को न्याय दिलाते हुए उसे 3.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में ऐसे अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश भी है। महिला एवं बाल अपराधों पर सख्त रुख का संकेत इस फैसले को महिला और बाल अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। जिला प्रशासन और अभियोजन पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है। स्थानीय स्तर पर भी इस निर्णय की सराहना हो रही है और लोग उम्मीद जता रहे हैं कि ऐसे फैसलों से भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगेगा। नाबालिग के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म और अपहरण के मामले में सुपौल की पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को 24 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला भीमपुर थाना कांड संख्या 02/2021 और पॉक्सो वाद संख्या 02/2021 में करीब पांच साल बाद आया है। अदालत ने इस निर्णय के साथ महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को सख्त संदेश दिया है। मंगलवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो संतोष कुमार दुबे की अदालत ने आरोपी गुलाबचंद मुखिया को सभी आरोपों में दोषी पाते हुए सजा सुनाई। दोषी करार दिया गया 35 वर्षीय आरोपी अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया आरोपी गुलाबचंद मुखिया (35 वर्ष), पिता लक्ष्मण मुखिया, निवासी ग्राम बरदाहा, थाना नरपतगंज है। न्यायालय ने पाया कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता का अपहरण कर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत आरोपी को कुल 24 वर्ष का सश्रम कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजाएं इसके अलावा अदालत ने आरोपी को अन्य धाराओं में भी दोषी ठहराया है।भा.द.वि. की न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा। 9 जनवरी को दोष सिद्ध, मंगलवार को सजा इस मामले में अदालत ने 9 जनवरी 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह कठोर फैसला सुनाया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में सफल रही। 8 गवाहों की हुई थी गवाही इस संवेदनशील मामले में कुल 8 गवाहों ने अदालत में अपनी गवाही दी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने प्रभावी तरीके से बहस की और साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार दास ने आरोपी के पक्ष में दलीलें रखीं, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। पीड़िता को 3.5 लाख रुपये मुआवजा अदालत ने पीड़िता को न्याय दिलाते हुए उसे 3.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में ऐसे अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश भी है। महिला एवं बाल अपराधों पर सख्त रुख का संकेत इस फैसले को महिला और बाल अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। जिला प्रशासन और अभियोजन पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है। स्थानीय स्तर पर भी इस निर्णय की सराहना हो रही है और लोग उम्मीद जता रहे हैं कि ऐसे फैसलों से भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगेगा।


