शतरंज की दुनिया में साल 2026 को लेकर पहले से ही काफी चर्चा है। आने वाले साल में एक नहीं, बल्कि कई अलग-अलग प्रतियोगिताओं में “विश्व चैंपियन” घोषित किए जाने की तैयारी है। लेकिन इस पूरे परिदृश्य पर अमेरिका के दिग्गज ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो ने खुलकर सवाल उठाए हैं। उनका साफ कहना है कि मौजूदा समय में अगर किसी के पास आधिकारिक तौर पर विश्व चैंपियन कहलाने का हक है, तो वह केवल डी गुकेश है।बता दें कि हाल ही में टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट के ब्लिट्ज वर्ग का खिताब जीतने वाले वेस्ली सो ने कहा कि 2026 में क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियनशिप, रैपिड, ब्लिट्ज, फ्रीस्टाइल और प्रस्तावित टोटल चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे कई खिताब होंगे, लेकिन इससे असली विश्व चैंपियन की पहचान कमजोर पड़ती है। गौरतलब है कि गुकेश ने 2024 में क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर यह मुकाम हासिल किया था और इसी साल के अंत में वह अपने खिताब का बचाव करेंगे।मौजूद जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 में जर्मनी में होने वाली फिडे फ्रीस्टाइल चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। यह आयोजन फ्रीस्टाइल चेस आयोजकों और FIDE के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बाद तय हुआ है। वेस्ली सो का मानना है कि इतनी सारी “विश्व” उपाधियां शुरू करके फिडे ने खुद अपने सबसे प्रतिष्ठित क्लासिकल खिताब की अहमियत कम कर दी है।सो ने कहा कि शतरंज में केवल एक ही विश्व चैंपियन होना चाहिए और फिलहाल वह गुकेश हैं, क्योंकि उन्होंने पूरी प्रक्रिया से गुजरकर यह खिताब जीता है। उनके अनुसार रैपिड, ब्लिट्ज या फ्रीस्टाइल जैसे खिताब द्वितीयक हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि FIDE का कामकाज काफी हद तक राजनीतिक और व्यावसायिक हितों से प्रेरित नजर आता है।वेस्ली सो ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका सहित कई देशों में ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि क्लासिकल वर्ल्ड चैंपियनशिप अब पुरानी सोच है और शतरंज को तेज़, सालाना और ज्यादा “मनोरंजक” बनना चाहिए। हालांकि, वह खुद इस विचार से सहमत नहीं हैं। उन्होंने खुद को पारंपरिक शतरंज प्रेमी बताया, जो बॉबी फिशर, अनातोली कार्पोव और गैरी कास्पारोव जैसे दिग्गजों को देखकर बड़े हुए हैं।फ्रीस्टाइल चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप के चयन को लेकर भी सो ने नाराज़गी जताई। गौरतलब है कि 2019 और 2022 में फिशर रैंडम फॉर्मेट के विश्व चैंपियन रहे वेस्ली सो और हिकारू नाकामुरा को इस बार आमंत्रित नहीं किया गया है। इसके बजाय अधिकतर खिलाड़ी पहले से तय सूची के आधार पर चुने गए हैं। सो का कहना है कि अगर किसी प्रतियोगिता को विश्व चैंपियनशिप कहा जाता है, तो सभी स्थानों के लिए क्वालिफिकेशन होना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि फ्रीस्टाइल चेस को आम दर्शकों के लिए आसान बताना सही नहीं है, क्योंकि शुरुआती स्थितियां याद रखना खुद अनुभवी खिलाड़ियों के लिए भी मुश्किल होता है। अंत में सो ने यह आशंका भी जताई कि मौजूदा फ्रीस्टाइल आयोजन शायद इस प्रारूप का आखिरी बड़ा इवेंट साबित हो सकता है।
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