बैतूल में स्कूल भवन पर चली जेसीबी, किया जमींदोज:पंचायत की अनुमति के बिना किया था निर्माण; मालिक ने दी थी आत्मदाह की चेतावनी

बैतूल में स्कूल भवन पर चली जेसीबी, किया जमींदोज:पंचायत की अनुमति के बिना किया था निर्माण; मालिक ने दी थी आत्मदाह की चेतावनी

बैतूल जिले की भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ग्राम ढाबा में मंगलवार शाम प्रशासन ने एक निजी स्कूल भवन पर जेसीबी से कार्रवाई कर उसका कुछ हिस्सा ध्वस्त कर दिया। यह वही भवन है, जिसे लेकर मुस्लिम युवक नईम ने कलेक्ट्रेट में आत्मदाह की चेतावनी दी थी। कार्रवाई भैंसदेही एसडीएम अजीत मरावी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और राजस्व अमले की मौजूदगी में की गई। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भवन अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर इमारत के एक हिस्से और सामने बने शेड को तोड़ा गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से गांव में तनाव और चर्चा का माहौल बन गया। 20 लाख की लागत से बनाया था स्कूल भवन नईम ने बताया कि उन्होंने अपनी निजी भूमि पर करीब 20 लाख रुपए की लागत से स्कूल भवन का निर्माण कराया था। यहां नर्सरी से आठवीं तक की पढ़ाई शुरू करने की योजना थी। उनका दावा है कि भूमि का व्यावसायिक डायवर्शन पहले से है और पंचायत से एनओसी भी ली गई थी। नईम के अनुसार उन्होंने 30 दिसंबर को माध्यमिक शिक्षा मंडल और स्कूल शिक्षा विभाग में स्कूल संचालन की अनुमति के लिए आवेदन भी किया था। इसके बावजूद 11 जनवरी को पंचायत ने पत्र जारी कर निर्माण को बिना अनुमति बताया और भवन स्वयं हटाने के निर्देश दिए। जुर्माना भरने को तैयार, भवन न तोड़ने की अपील नईम का कहना था कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो वे जुर्माना भरने और स्कूल खोलने का आवेदन वापस लेने को भी तैयार हैं, लेकिन भवन न तोड़ा जाए। नोटिस मिलने के बाद रविवार को वे कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों से कहा कि भवन तोड़ा गया तो वे परिवार सहित आत्मदाह कर लेंगे। आत्मदाह की चेतावनी के बाद कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया था। स्थिति को संभालने के लिए तत्काल कोतवाली पुलिस बल तैनात किया गया था। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों के साथ नईम जब कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे, तब कलेक्टर ने स्पष्ट किया था कि यदि निर्माण अवैध पाया गया तो नियमों के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने मामले की जांच के निर्देश एसडीएम को दिए थे। मंगलवार को एसडीएम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद मामला और तूल पकड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन गांव के बच्चों की शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था, जबकि प्रशासन इसे अवैध निर्माण बता रहा है।

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