गयाजी में पहली बार आयोजित शिक्षक जनसुनवाई में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, लेटलतीफी और भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आ गई। डीएम शशांक शुभंकर के सामने रिटायर्ड शिक्षकों ने अपनी परेशानी रखीं। किसी टीचर का भुगतान चार साल से अटका है, तो कोई दो-दो साल से विभाग के चक्कर काट रहा है। किसी की फाइल गायब है, तो किसी की विभागीय चिट्ठी ही गुम हो गई। कई शिक्षकों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देने का आरोप है। डीएम शशांक शुभंकर ने मौके पर ही कड़ा रुख अपनाया। शिक्षा विभाग के क्लर्क अंगरिका को तत्काल प्रभाव से मुक्त करने का आदेश जिला शिक्षा अधिकारी को दिया गया। एफआईआर दर्ज कर भेजा जाएगा जेल आदेश सुनते ही शिक्षा विभाग के परिसर में हड़कंप मच गया। डीएम यहीं नहीं रुके। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो संबंधित क्लर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेजी जाएगी। साथ ही लापरवाह अफसरों को भी जमकर फटकार लगाई गई। डीएम ने डीपीओ स्थापना आनंद कुमार को भी शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। इसके अलावा जिला निगरानी की धावा दल को लंबे समय से लंबित मामलों की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। सेवानिवृत्त शिक्षकों का भुगतान लटकने का पूछा कारण जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया कि किस कारण और किसकी लापरवाही से सेवानिवृत्त शिक्षकों का भुगतान लटका रहा। साथ ही यह भी जांच होगी कि कहीं शिक्षकों से अवैध रूप से पैसे की मांग तो नहीं की गई।दोपहर 12 बजे शुरू हुई जनसुनवाई शाम चार बजे तक चली। 180 शिक्षकों की शिकायतें एक-एक कर सुनी गईं। शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर डीएम शशांक शुभंकर खासे नाराज दिखे। उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को कार्यप्रणाली सुधारने का सख्त निर्देश दिया। डीएम ने बताया कि भुगतान से जुड़े कई मामलों को 15 दिनों के भीतर हर हाल में सुलझाया जाएगा। इसके लिए ट्रेजरी विभाग को भी शामिल किया गया है और एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करेगी। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत करने वाले सभी शिक्षकों का डेटा और मोबाइल नंबर विभाग के पास है। अधिकारी स्वयं करेंगे फॉलोअप अधिकारी स्वयं फॉलोअप करेंगे। समस्या के समाधान की सूचना पीड़ित शिक्षक को दी जाएगी। यदि समाधान नहीं हुआ, तो इसकी रिपोर्ट सीधे डीएम को दी जाएगी। जनसुनवाई की सबसे अहम बात यह रही कि बड़ी संख्या में शिक्षकों ने खुले तौर पर कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। पैसे के बिना फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। कभी मुख्यालय की रिपोर्ट, कभी ट्रेजरी तो कभी स्कूल स्तर की प्रक्रिया का बहाना बनाकर रिटायर्ड शिक्षकों को सालों तक परेशान किया जाता है। डीएम ने सभी की बातें पूरे धैर्य से सुनीं और भरोसा दिलाया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। गयाजी में पहली बार आयोजित शिक्षक जनसुनवाई में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, लेटलतीफी और भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आ गई। डीएम शशांक शुभंकर के सामने रिटायर्ड शिक्षकों ने अपनी परेशानी रखीं। किसी टीचर का भुगतान चार साल से अटका है, तो कोई दो-दो साल से विभाग के चक्कर काट रहा है। किसी की फाइल गायब है, तो किसी की विभागीय चिट्ठी ही गुम हो गई। कई शिक्षकों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देने का आरोप है। डीएम शशांक शुभंकर ने मौके पर ही कड़ा रुख अपनाया। शिक्षा विभाग के क्लर्क अंगरिका को तत्काल प्रभाव से मुक्त करने का आदेश जिला शिक्षा अधिकारी को दिया गया। एफआईआर दर्ज कर भेजा जाएगा जेल आदेश सुनते ही शिक्षा विभाग के परिसर में हड़कंप मच गया। डीएम यहीं नहीं रुके। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो संबंधित क्लर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेजी जाएगी। साथ ही लापरवाह अफसरों को भी जमकर फटकार लगाई गई। डीएम ने डीपीओ स्थापना आनंद कुमार को भी शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। इसके अलावा जिला निगरानी की धावा दल को लंबे समय से लंबित मामलों की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। सेवानिवृत्त शिक्षकों का भुगतान लटकने का पूछा कारण जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया कि किस कारण और किसकी लापरवाही से सेवानिवृत्त शिक्षकों का भुगतान लटका रहा। साथ ही यह भी जांच होगी कि कहीं शिक्षकों से अवैध रूप से पैसे की मांग तो नहीं की गई।दोपहर 12 बजे शुरू हुई जनसुनवाई शाम चार बजे तक चली। 180 शिक्षकों की शिकायतें एक-एक कर सुनी गईं। शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर डीएम शशांक शुभंकर खासे नाराज दिखे। उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को कार्यप्रणाली सुधारने का सख्त निर्देश दिया। डीएम ने बताया कि भुगतान से जुड़े कई मामलों को 15 दिनों के भीतर हर हाल में सुलझाया जाएगा। इसके लिए ट्रेजरी विभाग को भी शामिल किया गया है और एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जो तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करेगी। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत करने वाले सभी शिक्षकों का डेटा और मोबाइल नंबर विभाग के पास है। अधिकारी स्वयं करेंगे फॉलोअप अधिकारी स्वयं फॉलोअप करेंगे। समस्या के समाधान की सूचना पीड़ित शिक्षक को दी जाएगी। यदि समाधान नहीं हुआ, तो इसकी रिपोर्ट सीधे डीएम को दी जाएगी। जनसुनवाई की सबसे अहम बात यह रही कि बड़ी संख्या में शिक्षकों ने खुले तौर पर कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। पैसे के बिना फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। कभी मुख्यालय की रिपोर्ट, कभी ट्रेजरी तो कभी स्कूल स्तर की प्रक्रिया का बहाना बनाकर रिटायर्ड शिक्षकों को सालों तक परेशान किया जाता है। डीएम ने सभी की बातें पूरे धैर्य से सुनीं और भरोसा दिलाया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।


