एमपी में बनेंगे सेटेलाइट, स्पेसटेक पर 628 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

एमपी में बनेंगे सेटेलाइट, स्पेसटेक पर 628 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

MP Space Tech- स्पेसटेक के क्षेत्र में मध्यप्रदेश, जल्द ही देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। प्रदेश में उपग्रह निर्माण सहित अन्य गतिविधियों के लिए सीएम मोहन यादव ने रुचि दिखाई है। मंगलवार को हुई मंत्रि परिषद की बैठक में इस संबंध में बड़ा फैसला लिया गया। केबिनेट ने प्रदेश की स्पेसटेक नीति-2026 को अपनी स्वीकृति दे दी। अगले 5 सालों में इसपर 1 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा।। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अन्य अनेक अहम निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी सौगात देते हुए चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान देने की मंजूरी दी गई। इसके लिए 322 करोड़ 34 लाख रुपए स्वीकृत किए गए। सीएम मोहन यादव और मंत्रि-परिषद के सभी सदस्य बैठक में पहली बार टैबलेट लेकर आए।

मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेसटेक) क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। यहां उपग्रह निर्माण, भू स्थानिक विश्लेषण और डाउन स्ट्रीम अनुप्रयोगों में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए मंत्रि-परिषद द्वारा स्पेसटेक नीति-2026 लागू करने की स्वीकृति दे दी गई है।

स्पेसटेक के क्षेत्र में प्रदेश में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। यहां 322 औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर हैं। प्रदेश में 31 गीगावाट की बिजली आपूर्ति के साथ ही उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान भी हैं। स्पेस टेक के ऐसे अनुकूल वातावरण में प्रदेश में अंतरिक्ष-ग्रेड विनिर्माण की प्रचुर संभावनाएं हैं। इसको दृष्टिगत रखते हुए राज्य में मप्र स्पेसटेक नीति-2026 लागू की जाने की स्वीकृति दी गई।

अनुमानित वित्तीय भार 628 करोड़ रुपए

मंत्रि परिषद के मुताबिक प्रदेश में स्पेसटेक के क्षेत्र में आगामी 5 सालों में 1 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। इससे लगभग 8 हजार का रोजगार सृजन होगा। इस पर अनुमानित वित्तीय भार 628 करोड़ रुपए आंका गया है।

एमपी में उपग्रह निर्माण की राह खुलेगी

स्पेसटेक नीति-2026 के लागू होने से राज्य अंतरिक्ष उद्योग को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे और अनुसंधान सहायता के माध्यम से अपनी रणनीति बना सकेगा। एमपी में उपग्रह निर्माण की राह खुलेगी। कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन जैसे डाउन स्ट्रीम अनुप्रयोगों में यह नीति नवाचार को बढ़ावा देगी। भू-स्थानिक विश्लेषण में भी सहायक साबित होगी। इससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक मान्यता प्राप्त होगी।

एकीकृत स्पेसटेक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना

स्पेसटेक नीति-2026 के क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश के माध्यम से नए रोजगार सृजित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी। नव प्रवर्तन और अनुसंधान अंतर्गत स्पेसटेक उत्कृष्टता केंद्र और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित होगा। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा एकीकृत स्पेसटेक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा सकेगी।

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