Jalore Accident: खुशियां मातम में बदली, परिवार को लेने आ रहे व्यापारी की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत

Jalore Accident: खुशियां मातम में बदली, परिवार को लेने आ रहे व्यापारी की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत

जालोर। दिल्ली से सांचौर आ रही निजी बस सांडेराव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कम विजिबिलिटी के कारण सुबह बस ट्रेलर से टकरा गई। हादसे में बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में रानीवाड़ा क्षेत्र के पहाड़पुरा गांव के वैरसीराम (28) पुत्र गोपाराम देवासी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार यात्री घायल हुए।

सूचना पर पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, जहां मशक्कत कर घायल यात्रियों को बाहर निकाला गया और घायलों को सांडेराव सरकारी अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और मौके पर लोगों की भीड़ भी जुट गई।

अपने गांव लौट रहा था

मूल रूप से पहाड़पुरा निवासी वैरसीराम का दिल्ली के करोलबाग क्षेत्र में मोबाइल का व्यवसाय है। मृतक के दो लड़के व एक लड़की है, जो सर्दी की छुट्टियां होने पर पहाड़पुरा गांव आए थे। पत्नी व बच्चों को लेने के लिए ही वैरसीराम गांव आ रहा था। गांव पहुंचने से पहले ही हादसे में उसकी मौत हो गई।

खुशियों पर मातम ने फेरा पानी

अपने सुहाग के गांव लौटने का इंतजार कर रही पत्नी के लिए वैरसीराम की मौत की खबर बुरे सपने से भी ज्यादा हृदयविदारक थी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिससे कुछ घंटे पहले फोन पर बात हुई, वह अब दुनिया से विदा हो चुका है। पिता के गांव लौटने की बाट जोह रहे बच्चे भी यकीन नहीं कर पा रहे थे कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

रुदन फूटा तो गांव भी रोया

दोपहर बाद मृतक का शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। घर के आहाते में जैसे ही शव पहुंचा, मृतक की पत्नी का रुदन फूट पड़ा। मासूमों की चित्कारें वहां मौजूद लोगों को भावुक कर रही थीं।

फिर मौत का सफर बनी निजी बस

5 जनवरी को सांचौर से करौली जा रही निजी बस का नेशनल हाईवे 325 पर गुड़ा बालोतान और अगवरी प्याऊ के बीच देर रात हादसा हुआ था। इस हादसे में जालोर जिले के पति-पत्नी की मौत हुई थी। ये अपने पुत्र से मिलने अजमेर जा रहे थे। वहीं एक अन्य मौत भी इस हादसे में हुई थी।

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सुरक्षा पर उठ रहे सवाल, जिम्मेदार कौन

लंबे रूट पर चलने वाली निजी बसों के संचालकों में रोस्टर की पालना की कमी रहती है। अक्सर लंबे रूट पर रोस्टर के अनुसार चालक को पर्याप्त विश्राम नहीं दिया जाता। कई मौकों पर चालक कई घंटे तक लगातार बस का संचालन करते हैं। लंबे रूट पर अक्सर नींद की कमी भी हादसों का कारण बनती है।

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