बिहार सरकार के उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल सोमवार को दरभंगा पहुंचे। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिले। मुख्यमंत्री की आगामी समृद्धि यात्रा, राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश, भूमि अधिग्रहण और युवाओं के रोजगार से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से लगातार जनता के सुख-दुख को समझने और शासन तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलों का दौरा करते रहे हैं। अब ‘विकसित बिहार’ के सपने को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री एक बार फिर यात्रा पर निकल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी प्रगति यात्रा की थी, जिसमें उन्होंने प्रत्येक जिले की जरूरतों को अपनी आंखों से देखा और जनता की समस्याओं को अपने कानों से सुना। प्रगति यात्रा के दौरान जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, लैंड बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहां योजनाएं तय की गईं। इसके बाद महज 15 दिनों के भीतर कैबिनेट की बैठक बुलाकर वित्तीय स्वीकृति दी गई। सभी योजनाओं के टेंडर पूरे किए गए और आज वे योजनाएं धरातल पर उतरती दिख रही हैं। प्रगति यात्रा के दौरान किए गए लगभग सभी वादे अब पूरे होने की कगार पर हैं। 37 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर काम उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस शासन व्यवस्था को और मजबूत करने पर है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को हर जिले की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आती है। लगभग 26 हजार करोड़ रुपए की लागत से राज्य में भूमि अधिग्रहण कर लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है। कई जिलों में जमीन खरीदी जा चुकी है। बिहार में करीब 37 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अडानी समूह की एसीसी सीमेंट फैक्ट्री लगभग तैयार है। इसके अलावा जेके सीमेंट, कोका-कोला और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियां भी बिहार में निवेश कर रही हैं। इससे राज्य में औद्योगिक माहौल मजबूत हुआ है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। युवाओं को दी जा रही है ट्रेनिंग मंत्री दिलीप जायसवाल ने युवाओं के लिए सरकार की योजनाओं पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार केवल बड़े उद्योगों को ही नहीं, बल्कि लघु, कुटीर और घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा दे रही है। पहले स्टार्टअप के लिए युवाओं को 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाती थी, जिसे अब और बढ़ाने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बने। 21 जिलों में यह तय किया जा रहा है कि किस क्षेत्र में कौन सा उद्योग लगाया जा सकता है, उसका मार्केटिंग कैसे होगा और कच्चा माल कहां से आएगा। इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। आईआईटी पटना, चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों और सबौर कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है, जहां युवाओं को उद्योग लगाने से जुड़ी पूरी जानकारी और ट्रेनिंग दी जा रही है। रोजगार और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान मंत्री ने कहा कि आजादी के 78 वर्षों में जितने उद्योग बिहार में नहीं लगे, उससे कहीं ज्यादा उद्योग आने वाले पांच वर्षों में लगने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर में छोटा उद्योग पहुंचे, जिससे आत्मनिर्भर बिहार का सपना साकार हो सके। बिहार में एनडीए सरकार भारी बहुमत से बनी है। देश और दुनिया को यह संदेश गया है कि बिहार की जनता ‘जंगल राज’ नहीं, बल्कि कानून के राज और सुशासन को पसंद करती है। एनडीए सरकार की दो प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं, कानून का राज और युवाओं को रोजगार। इसी कारण निवेशकों के बीच बिहार को लेकर विश्वास बढ़ा है और वे यहां निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। 14 जनवरी के बाद खेल होगा, इस सवाल पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि वे किसी खेल को नहीं जानते। सिर्फ काम करना जानते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाना जानते हैं। सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में जो 78 सालों मे नही हुआ वो बिहार औद्योगिक विकास, रोजगार और सुशासन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा। बिहार सरकार के उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल सोमवार को दरभंगा पहुंचे। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिले। मुख्यमंत्री की आगामी समृद्धि यात्रा, राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश, भूमि अधिग्रहण और युवाओं के रोजगार से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से लगातार जनता के सुख-दुख को समझने और शासन तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलों का दौरा करते रहे हैं। अब ‘विकसित बिहार’ के सपने को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री एक बार फिर यात्रा पर निकल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी प्रगति यात्रा की थी, जिसमें उन्होंने प्रत्येक जिले की जरूरतों को अपनी आंखों से देखा और जनता की समस्याओं को अपने कानों से सुना। प्रगति यात्रा के दौरान जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, लैंड बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहां योजनाएं तय की गईं। इसके बाद महज 15 दिनों के भीतर कैबिनेट की बैठक बुलाकर वित्तीय स्वीकृति दी गई। सभी योजनाओं के टेंडर पूरे किए गए और आज वे योजनाएं धरातल पर उतरती दिख रही हैं। प्रगति यात्रा के दौरान किए गए लगभग सभी वादे अब पूरे होने की कगार पर हैं। 37 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर काम उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस शासन व्यवस्था को और मजबूत करने पर है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को हर जिले की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आती है। लगभग 26 हजार करोड़ रुपए की लागत से राज्य में भूमि अधिग्रहण कर लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है। कई जिलों में जमीन खरीदी जा चुकी है। बिहार में करीब 37 बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अडानी समूह की एसीसी सीमेंट फैक्ट्री लगभग तैयार है। इसके अलावा जेके सीमेंट, कोका-कोला और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियां भी बिहार में निवेश कर रही हैं। इससे राज्य में औद्योगिक माहौल मजबूत हुआ है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। युवाओं को दी जा रही है ट्रेनिंग मंत्री दिलीप जायसवाल ने युवाओं के लिए सरकार की योजनाओं पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार केवल बड़े उद्योगों को ही नहीं, बल्कि लघु, कुटीर और घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा दे रही है। पहले स्टार्टअप के लिए युवाओं को 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाती थी, जिसे अब और बढ़ाने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बने। 21 जिलों में यह तय किया जा रहा है कि किस क्षेत्र में कौन सा उद्योग लगाया जा सकता है, उसका मार्केटिंग कैसे होगा और कच्चा माल कहां से आएगा। इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। आईआईटी पटना, चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों और सबौर कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है, जहां युवाओं को उद्योग लगाने से जुड़ी पूरी जानकारी और ट्रेनिंग दी जा रही है। रोजगार और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान मंत्री ने कहा कि आजादी के 78 वर्षों में जितने उद्योग बिहार में नहीं लगे, उससे कहीं ज्यादा उद्योग आने वाले पांच वर्षों में लगने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर में छोटा उद्योग पहुंचे, जिससे आत्मनिर्भर बिहार का सपना साकार हो सके। बिहार में एनडीए सरकार भारी बहुमत से बनी है। देश और दुनिया को यह संदेश गया है कि बिहार की जनता ‘जंगल राज’ नहीं, बल्कि कानून के राज और सुशासन को पसंद करती है। एनडीए सरकार की दो प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं, कानून का राज और युवाओं को रोजगार। इसी कारण निवेशकों के बीच बिहार को लेकर विश्वास बढ़ा है और वे यहां निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। 14 जनवरी के बाद खेल होगा, इस सवाल पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि वे किसी खेल को नहीं जानते। सिर्फ काम करना जानते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाना जानते हैं। सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में जो 78 सालों मे नही हुआ वो बिहार औद्योगिक विकास, रोजगार और सुशासन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा।


