नीतीश सरकार बिहार में हाईवे के बाद अब एक्सप्रेस वे का नया नेटवर्क तैयार करेगी। ये एक्सप्रेस वे राज्य सरकार के होंगे। शुरुआत में 5 नए एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इसका प्रपोजल तैयार कर CM के पास भेजा गया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इसके एलाइनमेंट और डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे के आधार पर बिहार में नए एक्सप्रेस वे बनेंगे। इनपर गाड़ियां 100km/h की रफ्तार से दौड़ेंगी। इन्हें बनाने के लिए पैसे जुटाने का तरीका मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे जैसा होगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। इन पर चलने के लिए आम लोगों को ज्यादा पैसे देने होंगे। इससे सड़क बनाने की लागत वसूल होगी। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, बिहार में एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में सरकार कौन सी नई पहल कर रही है। सबसे पहले समझिए, मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे का मॉडल बिहार में क्यों? दरअसल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे देश का पहला सिक्स लेन एक्सप्रेस वे है। लगभग 95km लंबी इस सड़क का निर्माण 1994 में शुरू हुआ था। 2002 में काम पूरा हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका उद्घाटन किया था। इसे बनाने का श्रेय मौजूदा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को जाता है। सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने में होने वाला खर्च है। देश की पहली हाई स्पीड सड़क का निर्माण BOT (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के तहत कराया गया था। निजी भागीदारी के तहत सड़क बनाने के इस मॉडल में सरकार को निर्माण के लिए बेहद कम राशि देनी होती है। इसे बनाने की पूरी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होती है। कंपनी अपनी लागत और प्रॉफिट तय समय में टॉल टैक्स वसूलकर निकालती है। पहले से तय पैसा मिलने के बाद सड़क सरकार को ट्रांसफर कर देती है। सड़क बनाने से लेकर मरम्मत तक की जिम्मेदारी कंपनी की होगी बिहार सरकार यही BOT मॉडल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए लागू कर सकती है। यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल है। इसके तहत रोड बनाने के लिए निर्माण कंपनी बैंक से लोन लेती है। सड़क बन जाने के बाद सरकार एक निश्चित समय के लिए कंपनी को इस पर टोल लगाने देगी। सड़क की मरम्मत और इसके संचालन की जिम्मेदारी उसी कंपनी की होगी। इसका फायदा यह होगा कि सड़क बनाने के लिए सरकार को बहुत अधिक पैसा निवेश नहीं करना होगा। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे के साथ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का निर्माण भी इसी मॉडल के तहत किया गया है। बिहार में बनेंगे 5 नए एक्सप्रेस वे 7 निश्चय योजना के तहत बिहार में 5 नए एक्सप्रेस वे बनेंगे। पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने भास्कर को बताया, ‘मुख्यमंत्री का फोकस राज्य में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने पर है। सरकार की कोशिश है कि राज्य के किसी भी जिले से 5 घंटे के भीतर पटना पहुंचा जा सके। एक्सप्रेस वे कई जिलों को एक साथ बेहतर कनेक्टिविटी दे इसका ध्यान रखा जा रहा है।’ जहां ज्यादा एक्सप्रेस वे वहां की स्टडी करेगी टीम एक्सप्रेस वे निर्माण प्रक्रिया समझने के लिए बिहार सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। इसमें पथ निर्माण विभाग के सचिव, बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) के महाप्रबंधक और विभाग के मुख्य कार्यपालक अभियंता शामिल हैं। कमेटी के लोग पहले उन राज्यों में जाएंगे जहां सबसे ज्यादा एक्सप्रेस वे हैं। कमेटी के सदस्य मुख्य तौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और यूपी का दौरा करेंगे। इन राज्यों में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस वे का निर्माण हुआ है या हो रहा है। महाराष्ट्र में अभी 11 एक्सप्रेस वे परियोजनाएं चल रही हैं। यूपी में इनकी संख्या 12 और गुजरात में 7 है। कमेटी एक्सप्रेस वे निर्माण की स्टडी करेगी। टेक्निकल से लेकर फाइनेंस और सोशल इम्पैक्ट तक, हर तरह के असर को समझेगी। इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार बिहार में एक्सप्रेस वे निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। एक्सप्रेस वे अथॉरिटी का गठन कर सकती है सरकार एक्सप्रेस वे का निर्माण तय समय से हो, इसकी निगरानी की जा सके। इसके लिए बिहार सरकार अलग से एक अथॉरिटी बना सकती है। यह उत्तर प्रदेश की ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)’ के मॉडल पर होगा। इसका उद्देश्य नई अथॉरिटी से निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के जरिए एक्सप्रेस वे का निर्माण और भूमि अधिग्रहण करना है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले भी बिहार में सड़क निर्माण के लिए अलग से निगम का गठन हो चुका है। बिहार में केंद्र की मदद से बन रहे 4 एक्सप्रेस-वे बिहार में अभी केंद्र सरकार के स्तर पर चार एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित है। ये हैं… 2006 से ADB से लोन लेकर बिहार की सड़क बेहतर बना रही सरकार 2006 से बिहार सरकार ADB (एशियन डेवलपमेंट बैंक) से लोन लेकर राज्य की सड़कों को बेहतर बना रही है। 2026 की बात करें तो 6 जिलों से गुजरने वाली ये 5 अहम सड़कें दो लेन चौड़ी होंगी। इसके लिए बिहार सरकार एडीबी से लोन लेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और डीईए (डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर) की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार एडीबी से 251 मिलियन डॉलर (2263 करोड़ रुपए) लोन लेगी। यह पूरी परियोजना की कुल लागत का करीब 70 फीसदी है। पूरी परियोजना की कुल लागत 3645 करोड़ रुपए है। पथ निर्माण विभाग की एजेंसी BSRDC ये सड़कें बनाएगी। इन 5 परियोजनाओं के लिए करीब 110 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा। BSRDC इनमें 3 परियोजनाओं गणपतगंज-प्रतापगंज-परवाहा रोड, मधुबनी-राजनगर-बाबूबरही-खुटौना रोड और सीतामढ़ी-पुपरी-घोघराहा-बेनीपट्टी रोड का अभी डीपीआर बना रही है। ब्रह्मपुर-इटाढ़ी-सरेंजा-जालीपुर रोड (बक्सर-समधा रोड की कनेक्टिविटी भी) का एस्टीमेट फाइनल किया जा रहा है। अतरबेल-जैली-घोघराचट्टी रोड की प्रशासनिक स्वीकृति ली जा रही है। नीतीश सरकार बिहार में हाईवे के बाद अब एक्सप्रेस वे का नया नेटवर्क तैयार करेगी। ये एक्सप्रेस वे राज्य सरकार के होंगे। शुरुआत में 5 नए एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इसका प्रपोजल तैयार कर CM के पास भेजा गया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इसके एलाइनमेंट और डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे के आधार पर बिहार में नए एक्सप्रेस वे बनेंगे। इनपर गाड़ियां 100km/h की रफ्तार से दौड़ेंगी। इन्हें बनाने के लिए पैसे जुटाने का तरीका मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे जैसा होगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। इन पर चलने के लिए आम लोगों को ज्यादा पैसे देने होंगे। इससे सड़क बनाने की लागत वसूल होगी। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, बिहार में एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में सरकार कौन सी नई पहल कर रही है। सबसे पहले समझिए, मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे का मॉडल बिहार में क्यों? दरअसल मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे देश का पहला सिक्स लेन एक्सप्रेस वे है। लगभग 95km लंबी इस सड़क का निर्माण 1994 में शुरू हुआ था। 2002 में काम पूरा हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका उद्घाटन किया था। इसे बनाने का श्रेय मौजूदा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को जाता है। सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने में होने वाला खर्च है। देश की पहली हाई स्पीड सड़क का निर्माण BOT (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) मॉडल के तहत कराया गया था। निजी भागीदारी के तहत सड़क बनाने के इस मॉडल में सरकार को निर्माण के लिए बेहद कम राशि देनी होती है। इसे बनाने की पूरी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होती है। कंपनी अपनी लागत और प्रॉफिट तय समय में टॉल टैक्स वसूलकर निकालती है। पहले से तय पैसा मिलने के बाद सड़क सरकार को ट्रांसफर कर देती है। सड़क बनाने से लेकर मरम्मत तक की जिम्मेदारी कंपनी की होगी बिहार सरकार यही BOT मॉडल एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए लागू कर सकती है। यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल है। इसके तहत रोड बनाने के लिए निर्माण कंपनी बैंक से लोन लेती है। सड़क बन जाने के बाद सरकार एक निश्चित समय के लिए कंपनी को इस पर टोल लगाने देगी। सड़क की मरम्मत और इसके संचालन की जिम्मेदारी उसी कंपनी की होगी। इसका फायदा यह होगा कि सड़क बनाने के लिए सरकार को बहुत अधिक पैसा निवेश नहीं करना होगा। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे के साथ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का निर्माण भी इसी मॉडल के तहत किया गया है। बिहार में बनेंगे 5 नए एक्सप्रेस वे 7 निश्चय योजना के तहत बिहार में 5 नए एक्सप्रेस वे बनेंगे। पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने भास्कर को बताया, ‘मुख्यमंत्री का फोकस राज्य में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने पर है। सरकार की कोशिश है कि राज्य के किसी भी जिले से 5 घंटे के भीतर पटना पहुंचा जा सके। एक्सप्रेस वे कई जिलों को एक साथ बेहतर कनेक्टिविटी दे इसका ध्यान रखा जा रहा है।’ जहां ज्यादा एक्सप्रेस वे वहां की स्टडी करेगी टीम एक्सप्रेस वे निर्माण प्रक्रिया समझने के लिए बिहार सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। इसमें पथ निर्माण विभाग के सचिव, बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) के महाप्रबंधक और विभाग के मुख्य कार्यपालक अभियंता शामिल हैं। कमेटी के लोग पहले उन राज्यों में जाएंगे जहां सबसे ज्यादा एक्सप्रेस वे हैं। कमेटी के सदस्य मुख्य तौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और यूपी का दौरा करेंगे। इन राज्यों में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस वे का निर्माण हुआ है या हो रहा है। महाराष्ट्र में अभी 11 एक्सप्रेस वे परियोजनाएं चल रही हैं। यूपी में इनकी संख्या 12 और गुजरात में 7 है। कमेटी एक्सप्रेस वे निर्माण की स्टडी करेगी। टेक्निकल से लेकर फाइनेंस और सोशल इम्पैक्ट तक, हर तरह के असर को समझेगी। इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार बिहार में एक्सप्रेस वे निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। एक्सप्रेस वे अथॉरिटी का गठन कर सकती है सरकार एक्सप्रेस वे का निर्माण तय समय से हो, इसकी निगरानी की जा सके। इसके लिए बिहार सरकार अलग से एक अथॉरिटी बना सकती है। यह उत्तर प्रदेश की ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)’ के मॉडल पर होगा। इसका उद्देश्य नई अथॉरिटी से निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के जरिए एक्सप्रेस वे का निर्माण और भूमि अधिग्रहण करना है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले भी बिहार में सड़क निर्माण के लिए अलग से निगम का गठन हो चुका है। बिहार में केंद्र की मदद से बन रहे 4 एक्सप्रेस-वे बिहार में अभी केंद्र सरकार के स्तर पर चार एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित है। ये हैं… 2006 से ADB से लोन लेकर बिहार की सड़क बेहतर बना रही सरकार 2006 से बिहार सरकार ADB (एशियन डेवलपमेंट बैंक) से लोन लेकर राज्य की सड़कों को बेहतर बना रही है। 2026 की बात करें तो 6 जिलों से गुजरने वाली ये 5 अहम सड़कें दो लेन चौड़ी होंगी। इसके लिए बिहार सरकार एडीबी से लोन लेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और डीईए (डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर) की मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार एडीबी से 251 मिलियन डॉलर (2263 करोड़ रुपए) लोन लेगी। यह पूरी परियोजना की कुल लागत का करीब 70 फीसदी है। पूरी परियोजना की कुल लागत 3645 करोड़ रुपए है। पथ निर्माण विभाग की एजेंसी BSRDC ये सड़कें बनाएगी। इन 5 परियोजनाओं के लिए करीब 110 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होगा। BSRDC इनमें 3 परियोजनाओं गणपतगंज-प्रतापगंज-परवाहा रोड, मधुबनी-राजनगर-बाबूबरही-खुटौना रोड और सीतामढ़ी-पुपरी-घोघराहा-बेनीपट्टी रोड का अभी डीपीआर बना रही है। ब्रह्मपुर-इटाढ़ी-सरेंजा-जालीपुर रोड (बक्सर-समधा रोड की कनेक्टिविटी भी) का एस्टीमेट फाइनल किया जा रहा है। अतरबेल-जैली-घोघराचट्टी रोड की प्रशासनिक स्वीकृति ली जा रही है।


