प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (सदाकत आश्रम) में ‘दही-चूड़ा स्नेह भोज’ के दौरान पार्टी की तनातनी वाली अंदरूनी स्थिति फिर खुले में आई। इस आयोजन में पार्टी के सभी 6 विधायक नहीं आए। इससे संगठन और विधायकों के बीच बढ़ती दूरी की चर्चा और तेज हुई। दरअसल यह लगातार दूसरा मौका रहा, जब पार्टी के आयोजन में उसके विधायक नहीं आए। कुछ दिन पहले मनरेगा बचाओ संग्राम की तैयारी को लेकर बुलाई गई बैठक में 3 विधायक नहीं आए थे। स्नेह भोज, प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष संजय यादव की ओर से था। इसमें प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मंच से प्रदेश अध्यक्ष ने मकर संक्रांति को समरसता, भाईचारे और सामाजिक एकता का पर्व बताते हुए लोकसंस्कृति और आपसी सौहार्द पर जोर दिया। उन्होंने कहा- ‘दही-चूड़ा बिहार की सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं।’ हालांकि, पार्टी खुद जुड़ी हुई नहीं दिखी। राजनीतिक नजरिए से सबसे अहम मसला विधायकों की गैरहाजिरी रही। लगातार दो बड़े आयोजनों से विधायकों की दूरी ने पार्टी के अंदर समन्वय और अनुशासन को लेकर सवाल खड़े किए। दही-चूड़ा भोज से विधायकों की दूरी ने अंदरूनी खींचतान की चर्चा को और ताकत दी। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (सदाकत आश्रम) में ‘दही-चूड़ा स्नेह भोज’ के दौरान पार्टी की तनातनी वाली अंदरूनी स्थिति फिर खुले में आई। इस आयोजन में पार्टी के सभी 6 विधायक नहीं आए। इससे संगठन और विधायकों के बीच बढ़ती दूरी की चर्चा और तेज हुई। दरअसल यह लगातार दूसरा मौका रहा, जब पार्टी के आयोजन में उसके विधायक नहीं आए। कुछ दिन पहले मनरेगा बचाओ संग्राम की तैयारी को लेकर बुलाई गई बैठक में 3 विधायक नहीं आए थे। स्नेह भोज, प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष संजय यादव की ओर से था। इसमें प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। मंच से प्रदेश अध्यक्ष ने मकर संक्रांति को समरसता, भाईचारे और सामाजिक एकता का पर्व बताते हुए लोकसंस्कृति और आपसी सौहार्द पर जोर दिया। उन्होंने कहा- ‘दही-चूड़ा बिहार की सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं।’ हालांकि, पार्टी खुद जुड़ी हुई नहीं दिखी। राजनीतिक नजरिए से सबसे अहम मसला विधायकों की गैरहाजिरी रही। लगातार दो बड़े आयोजनों से विधायकों की दूरी ने पार्टी के अंदर समन्वय और अनुशासन को लेकर सवाल खड़े किए। दही-चूड़ा भोज से विधायकों की दूरी ने अंदरूनी खींचतान की चर्चा को और ताकत दी।


