सिटी रिपोर्टर|बेतिया जिले के ग्रामीण विकास विभाग अभिकरण के कर्मी अपनी वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले अगस्त माह से ही वेतन बकाया है। बिना वेतन के दहशहारा, दीपावली व छठ पर्व बीत गए हैं। अब बच्चों के फीस भी जमा नहीं हो पा रहे हैं। जिससे उनकी बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। परिवार के बड़े बुजुर्ग की दवा आदि नहीं हो पा रही है। अब तो वे यह सोचने लगे हैं कि उनकी नौकरी है भी या नहीं भी। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने, उनकी निगरानी करने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए बनाया गया यह विभाग अब सवालों के घेरे में आ गया है, की क्या यह कार्यरत है या इसे बंद कर दिया गया है। डीआरडीए के शेष कर्मियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। डीआरडीए में वरीय लेखा पदाधिकारी, लेखा पदाधिकारी, तकनीकी सहायक, लेखापाल,सहायक और आशु लिपिकों को वेतन किस मद से मिलेगा, इस पर अब तक विभाग ने चुप्पी साध रखी है। यह भी जानकारी हो ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नवंबर 2021 को सभी राज्यों को पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि एक अप्रैल 2022 से डीआरडीए एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम से अब केंद्र को कोई वास्ता नहीं रहेगा।पश्चिम चंपारण के डीआरडीए डायरेक्टर अरुण प्रकाश ने कहा कि इनके वेतन के लिए आवंटन नहीं है, इसी वजह से वेतन भुगतान नहीं हो रहा है। आवंटन आते ही वेतन का भुगतान हो जायेगा। वहीं, डीआरडीए कर्मी संघ राज्य अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो परामर्श दिया था, उसी आधार पर कई राज्यों ने डीआरडीए कर्मियों का समायोजन कर लिया है। बिहार में भी स्टेट लेवल से प्रस्ताव आया है। सिटी रिपोर्टर|बेतिया जिले के ग्रामीण विकास विभाग अभिकरण के कर्मी अपनी वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले अगस्त माह से ही वेतन बकाया है। बिना वेतन के दहशहारा, दीपावली व छठ पर्व बीत गए हैं। अब बच्चों के फीस भी जमा नहीं हो पा रहे हैं। जिससे उनकी बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। परिवार के बड़े बुजुर्ग की दवा आदि नहीं हो पा रही है। अब तो वे यह सोचने लगे हैं कि उनकी नौकरी है भी या नहीं भी। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने, उनकी निगरानी करने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए बनाया गया यह विभाग अब सवालों के घेरे में आ गया है, की क्या यह कार्यरत है या इसे बंद कर दिया गया है। डीआरडीए के शेष कर्मियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। डीआरडीए में वरीय लेखा पदाधिकारी, लेखा पदाधिकारी, तकनीकी सहायक, लेखापाल,सहायक और आशु लिपिकों को वेतन किस मद से मिलेगा, इस पर अब तक विभाग ने चुप्पी साध रखी है। यह भी जानकारी हो ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नवंबर 2021 को सभी राज्यों को पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि एक अप्रैल 2022 से डीआरडीए एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम से अब केंद्र को कोई वास्ता नहीं रहेगा।पश्चिम चंपारण के डीआरडीए डायरेक्टर अरुण प्रकाश ने कहा कि इनके वेतन के लिए आवंटन नहीं है, इसी वजह से वेतन भुगतान नहीं हो रहा है। आवंटन आते ही वेतन का भुगतान हो जायेगा। वहीं, डीआरडीए कर्मी संघ राज्य अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो परामर्श दिया था, उसी आधार पर कई राज्यों ने डीआरडीए कर्मियों का समायोजन कर लिया है। बिहार में भी स्टेट लेवल से प्रस्ताव आया है।


