Breast Cancer: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी हेल्थ को इग्नोर कर देते हैं। हम सोचते हैं कि कैंसर तो सिर्फ जेनेटिक होता है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा अलग है। ICMR की लेटेस्ट स्टडी के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर के 6% सालाना इजाफे के पीछे हमारे जींस (Genes) नहीं, बल्कि हमारी खराब लाइफस्टाइल है। अब यह बीमारी सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं तक नहीं रही है, बल्कि 30 साल की लड़कियां भी इसकी शिकार हो रही है। आइए जानते हैं आपकी लाइफस्टाइल की वो 3 बड़ी गलतियां जो जोखिम बढ़ा रही हैं।
नींद की कमी पड़ रही है भारी
अगर आप रात 2 बजे तक वेब सीरीज देख रही हैं या ऑफिस का काम कर रही हैं, तो आप अपने शरीर की ‘सर्केडियन रिद्म’ (जैविक घड़ी) से खिलवाड़ कर रही है। साइंस कहती है कि नींद की कमी से ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन कम बनता है। यह हार्मोन कैंसर सेल्स को रोकने में मदद करता है। जब यह कम होता है, तो एस्ट्रोजन का लेवल बिगड़ जाता है, जो ब्रेस्ट कैंसर का मेन ट्रिगर पॉइंट है।
डेस्क जॉब और पेट की चर्बी का कनेक्शन
बिना फिजिकल एक्टिविटी और बैठे रहने की वजह से पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी (Belly Fat) सिर्फ कपड़ों की फिटिंग ही नहीं बिगाड़ती, बल्कि बॉडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी पैदा करती है। मेनोपॉज के बाद यही पेट का फैट एस्ट्रोजन बनाने लगता है। बॉडी में जितना ज्यादा एस्ट्रोजन होगा, हार्मोन सेंसिटिव कैंसर का खतरा उतना ही बढ़ सकता है।
स्ट्रेस और ‘सैंडविच जनरेशन’ का प्रेशर
घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी के बीच महिलाएं जिस मेंटल स्ट्रेस से गुजर रही है, वह उनके इम्यून सिस्टम को खराब कर रहा है। देर से शादी, लेट प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग न करा पाना भी मॉर्डन लाइफस्टाइल के वो पार्ट है जो अनजाने में इस बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं।
बचाव के कुछ आसान टिप्स
डॉक्टर के अनुसार, हम कैंसर को पूरी तरह रोक तो नहीं सकते, लेकिन लाइफस्टाइल बदलकर जोखिम को 60-70% तक कम कर सकते हैं-
- रात में 11 बजे तक सो जाने की आदत डालें।
- अगर आप रोज जिम नहीं जा सकते तो कम से कम आधा घंटा तेज पैदल चलें।
- अगर आप 30+ है और स्ट्रेसफुल लाइफ जी रही है, तो साल में एक बार अपना क्लीनिकल चेकअप जरूर कराएं।
- महिने में एक बार खुदको कांच के सामने अपने आपको ऑब्जर्व जरूर करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


