ठंडे बस्ते में NH-139 पर चौड़ीकरण का प्रस्ताव:औरंगाबाद में 2025 में सड़क हादसों में 362 लोगों की मौत; इस साल 12 दिन में छह की गई जान

ठंडे बस्ते में NH-139 पर चौड़ीकरण का प्रस्ताव:औरंगाबाद में 2025 में सड़क हादसों में 362 लोगों की मौत; इस साल 12 दिन में छह की गई जान

औरंगाबाद जिले में पिछले एक साल अलग-अलग सड़क हादसों में 362 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नए साल की शुरुआत के महज 12 दिनों में ही 6 लोगों की जान चली गई है। इसके बावजूद एनएच-139 के चौड़ीकरण को लेकर न तो एनएचएआई गंभीर दिख रहा है और न ही जिला प्रशासन। जिले में सड़क हादसों का सबसे बड़ा केंद्र औरंगाबाद-पटना पथ एनएच-139 बना हुआ है। वर्ष 2026 में पहली जनवरी से ही दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया, जो 10 जनवरी तक लगातार जारी रहा। इन 10 दिनों में एनएच-139 पर लगभग रोज दुर्घटनाएं हुईं और लोगों की जान जाती रही। लगातार हो रही मौतों ने आमजन में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। नए साल में अब तक 6 लोगों की हो चुकी है मौत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को अंबा के हरदता गांव के समीप हुई सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई थी। दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा एनएच-139 पर हुए अलग-अलग सड़क हादसों में इस साल अब तक छह लोगों की मौत हो गई। 10 जनवरी को एनएच-139 पर अलग-अलग स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में तीन और लोगों की जान चली गई। जिले के अन्य जगहों पर हुए सड़क हादसों की बात करें तो अंबा थाना क्षेत्र के हरदत्ता गांव के पास रफीगंज निवासी पवन कुमार(18) की भी जान चली गई। रिसियप थाना क्षेत्र के बभंडीह गांव के पास देवपति कुंवर(65) की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रामाबांध-बिजौली के बीच हाइवा की चपेट में आने से बाइक सवार शिक्षक जितेंद्र राम की मौत हो गई। उसी दिन दोमुहान पुल के पास भी एक युवक की जान चली गई। पटना पहुंचने में 5 घंटे का समय जिले के अंबा निवासी रवि कुमार सिंह, पैक्स अध्यक्ष अभिजीत कुमार का कहना है कि एनएच-139 पर प्रतिदिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। तेज रफ्तार वाहन, ओवरलोडिंग, सड़क पर गड्ढे, जगह-जगह अधूरा निर्माण कार्य और यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी हादसों के प्रमुख कारण बन चुके हैं। कई स्थानों पर सड़क की हालत बेहद जर्जर है। कहीं गड्ढों की भरमार है तो कहीं साइन बोर्ड और सड़क चिह्न तक नहीं हैं। रात के समय स्ट्रीट लाइट की कमी हालात को और भयावह बना देती है। औरंगाबाद से पटना की दूरी महज 120 किलोमीटर है, लेकिन सड़क खराब होने के कारण पटना पहुंचने में 4 से 5 घंटे का समय लगता है। पटना से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को जोड़ती है यह सड़क यह मार्ग छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड को जोड़ता है। संकीर्ण सड़क और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही दुर्घटनाओं को लगातार बढ़ावा दे रही है। बावजूद इसके, दुर्घटना संभावित स्थानों पर न तो स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं और न ही चेतावनी बोर्ड। परिवहन विभाग और एनएचएआई की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लंबे समय से सड़क के चौड़ीकरण की मांग की जाती रही है। लेकिन इसके बावजूद भी इसका चौड़ीकरण नहीं कराया जा रहा है। जिसके कारण आए दिन लोगों को जान माल का नुकसान झेलना पड़ रहा है। घोषणा के बावजूद भी नहीं कराया जा रहा है सड़क का चौड़ीकरण पूर्व विधायक आनंद शंकर सिंह का कहना है कि चौड़ीकरण की घोषणा के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। कभी 9 किलोमीटर बाइपास तो कभी 19 किलोमीटर ग्रीन फील्ड बाइपास की बात कहकर लोगों को सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए एनएच-139 के चौड़ीकरण की मांग वर्षों से उठ रही है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान गयाजी की एक सभा में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 5500 करोड़ रुपए की लागत से सड़क चौड़ीकरण की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव के बाद यह घोषणा ठंडे बस्ते में चली गई। हाल में औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने भी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर फोरलेन निर्माण और स्पीड लिमिट के सख्त पालन की मांग उठाई है। सड़क दुर्घटना के आंकड़ों पर एक नजर आंकड़े बताते हैं कि जिले में पिछले 5 वर्षों में 1490 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है। वर्ष 2025 में सबसे अधिक 362 मौतें, 2024 में 310, 2023 में 290, 2022 में 302 और 2021 में 284 लोगों की जान गई। इन आंकड़ों के बावजूद यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एनएच-139 आगे भी मौत का हाईवे बना रहेगा। औरंगाबाद जिले में पिछले एक साल अलग-अलग सड़क हादसों में 362 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नए साल की शुरुआत के महज 12 दिनों में ही 6 लोगों की जान चली गई है। इसके बावजूद एनएच-139 के चौड़ीकरण को लेकर न तो एनएचएआई गंभीर दिख रहा है और न ही जिला प्रशासन। जिले में सड़क हादसों का सबसे बड़ा केंद्र औरंगाबाद-पटना पथ एनएच-139 बना हुआ है। वर्ष 2026 में पहली जनवरी से ही दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया, जो 10 जनवरी तक लगातार जारी रहा। इन 10 दिनों में एनएच-139 पर लगभग रोज दुर्घटनाएं हुईं और लोगों की जान जाती रही। लगातार हो रही मौतों ने आमजन में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। नए साल में अब तक 6 लोगों की हो चुकी है मौत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को अंबा के हरदता गांव के समीप हुई सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई थी। दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा एनएच-139 पर हुए अलग-अलग सड़क हादसों में इस साल अब तक छह लोगों की मौत हो गई। 10 जनवरी को एनएच-139 पर अलग-अलग स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में तीन और लोगों की जान चली गई। जिले के अन्य जगहों पर हुए सड़क हादसों की बात करें तो अंबा थाना क्षेत्र के हरदत्ता गांव के पास रफीगंज निवासी पवन कुमार(18) की भी जान चली गई। रिसियप थाना क्षेत्र के बभंडीह गांव के पास देवपति कुंवर(65) की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रामाबांध-बिजौली के बीच हाइवा की चपेट में आने से बाइक सवार शिक्षक जितेंद्र राम की मौत हो गई। उसी दिन दोमुहान पुल के पास भी एक युवक की जान चली गई। पटना पहुंचने में 5 घंटे का समय जिले के अंबा निवासी रवि कुमार सिंह, पैक्स अध्यक्ष अभिजीत कुमार का कहना है कि एनएच-139 पर प्रतिदिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। तेज रफ्तार वाहन, ओवरलोडिंग, सड़क पर गड्ढे, जगह-जगह अधूरा निर्माण कार्य और यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी हादसों के प्रमुख कारण बन चुके हैं। कई स्थानों पर सड़क की हालत बेहद जर्जर है। कहीं गड्ढों की भरमार है तो कहीं साइन बोर्ड और सड़क चिह्न तक नहीं हैं। रात के समय स्ट्रीट लाइट की कमी हालात को और भयावह बना देती है। औरंगाबाद से पटना की दूरी महज 120 किलोमीटर है, लेकिन सड़क खराब होने के कारण पटना पहुंचने में 4 से 5 घंटे का समय लगता है। पटना से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को जोड़ती है यह सड़क यह मार्ग छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड को जोड़ता है। संकीर्ण सड़क और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही दुर्घटनाओं को लगातार बढ़ावा दे रही है। बावजूद इसके, दुर्घटना संभावित स्थानों पर न तो स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं और न ही चेतावनी बोर्ड। परिवहन विभाग और एनएचएआई की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लंबे समय से सड़क के चौड़ीकरण की मांग की जाती रही है। लेकिन इसके बावजूद भी इसका चौड़ीकरण नहीं कराया जा रहा है। जिसके कारण आए दिन लोगों को जान माल का नुकसान झेलना पड़ रहा है। घोषणा के बावजूद भी नहीं कराया जा रहा है सड़क का चौड़ीकरण पूर्व विधायक आनंद शंकर सिंह का कहना है कि चौड़ीकरण की घोषणा के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। कभी 9 किलोमीटर बाइपास तो कभी 19 किलोमीटर ग्रीन फील्ड बाइपास की बात कहकर लोगों को सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए एनएच-139 के चौड़ीकरण की मांग वर्षों से उठ रही है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान गयाजी की एक सभा में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 5500 करोड़ रुपए की लागत से सड़क चौड़ीकरण की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव के बाद यह घोषणा ठंडे बस्ते में चली गई। हाल में औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने भी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर फोरलेन निर्माण और स्पीड लिमिट के सख्त पालन की मांग उठाई है। सड़क दुर्घटना के आंकड़ों पर एक नजर आंकड़े बताते हैं कि जिले में पिछले 5 वर्षों में 1490 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो चुकी है। वर्ष 2025 में सबसे अधिक 362 मौतें, 2024 में 310, 2023 में 290, 2022 में 302 और 2021 में 284 लोगों की जान गई। इन आंकड़ों के बावजूद यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एनएच-139 आगे भी मौत का हाईवे बना रहेगा।  

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