पर्यटन मंत्री फुलहर गिरजा मंदिर का करेंगे भूमिपूजन:राम-सीता प्रथम मिलन स्थल का होगा कायाकल्प, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

पर्यटन मंत्री फुलहर गिरजा मंदिर का करेंगे भूमिपूजन:राम-सीता प्रथम मिलन स्थल का होगा कायाकल्प, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

मधुबनी के हरलाखी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक फुलहर गिरजा स्थान को पर्यटन विभाग विकसित करेगा। बिहार सरकार ने भगवान राम और माता सीता के प्रथम मिलन स्थल के रूप में चर्चित इस स्थान को पर्यटन स्थल घोषित किया है। पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद 14 जनवरी को यहां भूमि पूजन करेंगे। इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल को पर्यटन मानचित्र पर लाने के उद्देश्य से बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने करोड़ों रुपये की राशि आवंटित की है। इस राशि से फुलहर गिरजा स्थान पर एक भव्य मंदिर और फुलवारी का निर्माण किया जाएगा।भूमि पूजन समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। जानकी मंदिर जनकपुर और विश्वामित्र स्थान के महंतों के साथ-साथ ग्रामीण समाजसेवी भी इसमें सक्रिय रूप से जुटे हैं। शिलान्यास मिथिलांचल की आध्यात्मिक परंपराओं को करेगी मजबूत रविवार शाम को एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता बिशौल विश्वामित्र आश्रम के महंत ब्रजमोहन दास ने की। इसमें दर्जनों संत-महंत शामिल हुए।विश्वामित्र स्थान के महंत बृजमोहन दास ने बताया कि यह शिलान्यास मिथिलांचल की आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मंदिर के महंत ने कहा कि फुलहर गिरजा रामायण कालीन महत्व का स्थान है, जहां भगवान राम ने माता जानकी से पहली बार दर्शन किए थे।भव्य मंदिर के निर्माण से यहां पूजा-अर्चना की सुविधा बढ़ेगी, जबकि फुलवारी पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करेगी। बिहार सरकार की इस पहल से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और मिथिला की धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं मजबूत होंगी। हरलाखी प्रखंड के ग्रामीणों में इस विकास को लेकर उत्साह व्याप्त है।कार्यक्रम में मधुबनी जिले सहित पूरे मिथिला क्षेत्र के साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण नेता और भक्तगण उपस्थित रहेंगे। पर्यटन विभाग ने इस स्थान को विकसित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास शुरू कर दिए हैं। जानकी मंदिर जनकपुर के महंतों को भी शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया गया है। मधुबनी के हरलाखी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक फुलहर गिरजा स्थान को पर्यटन विभाग विकसित करेगा। बिहार सरकार ने भगवान राम और माता सीता के प्रथम मिलन स्थल के रूप में चर्चित इस स्थान को पर्यटन स्थल घोषित किया है। पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद 14 जनवरी को यहां भूमि पूजन करेंगे। इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल को पर्यटन मानचित्र पर लाने के उद्देश्य से बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने करोड़ों रुपये की राशि आवंटित की है। इस राशि से फुलहर गिरजा स्थान पर एक भव्य मंदिर और फुलवारी का निर्माण किया जाएगा।भूमि पूजन समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। जानकी मंदिर जनकपुर और विश्वामित्र स्थान के महंतों के साथ-साथ ग्रामीण समाजसेवी भी इसमें सक्रिय रूप से जुटे हैं। शिलान्यास मिथिलांचल की आध्यात्मिक परंपराओं को करेगी मजबूत रविवार शाम को एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता बिशौल विश्वामित्र आश्रम के महंत ब्रजमोहन दास ने की। इसमें दर्जनों संत-महंत शामिल हुए।विश्वामित्र स्थान के महंत बृजमोहन दास ने बताया कि यह शिलान्यास मिथिलांचल की आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मंदिर के महंत ने कहा कि फुलहर गिरजा रामायण कालीन महत्व का स्थान है, जहां भगवान राम ने माता जानकी से पहली बार दर्शन किए थे।भव्य मंदिर के निर्माण से यहां पूजा-अर्चना की सुविधा बढ़ेगी, जबकि फुलवारी पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करेगी। बिहार सरकार की इस पहल से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और मिथिला की धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं मजबूत होंगी। हरलाखी प्रखंड के ग्रामीणों में इस विकास को लेकर उत्साह व्याप्त है।कार्यक्रम में मधुबनी जिले सहित पूरे मिथिला क्षेत्र के साधु-संत, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण नेता और भक्तगण उपस्थित रहेंगे। पर्यटन विभाग ने इस स्थान को विकसित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास शुरू कर दिए हैं। जानकी मंदिर जनकपुर के महंतों को भी शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया गया है।  

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