टॉप-10 कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹3.63 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹1.58 लाख करोड़ कम हुई; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

टॉप-10 कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹3.63 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹1.58 लाख करोड़ कम हुई; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 3.63 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है। रिलायंस का मार्केट कैप 1.58 लाख करोड़ रुपए घटकर ₹19.96 लाख करोड़ पर आ गया। HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू ₹96,153 करोड़ घटकर ₹14.44 लाख करोड़ पर आ गई है। वहीं भारती एयरटेल का मार्केट कैप ₹45,274 करोड़ घटकर ₹11.55 लाख करोड़ पर आ गया है। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, TCS और इंफोसिस की वैल्यू भी घटी है। ICICI बैंक का मार्केट कैप बढ़ा वहीं ICICI बैंक का मार्केट कैप 34,901 करोड़ रुपए बढ़कर ₹10.03 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। HUL की वैल्यू 6,097 करोड़ रुपए बढ़कर ₹5.57 लाख करोड़ पर आ गई है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI की मार्केट वैल्यू भी बढ़ी है। SBI की मार्केट वैल्यू भी 600 करोड़ रुपए बढ़ी है, यह 9.23 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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