गोपालगंज जिले में एक मुस्लिम महिला फरीदा ने अपने बीमार पिता की ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने का जिम्मा उठाया है। दो बच्चों की मां फरीदा ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने बीमार माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनकर एक मिसाल पेश की है। फरीदा गोपालगंज के मांझा प्रखंड के पिठौरी गांव निवासी फूल मोहम्मद की बेटी हैं। उनके पिता पहले ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन एक साल पहले उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। बीमारी के कारण फूल मोहम्मद ई-रिक्शा चलाने में असमर्थ हो गए। इससे घर की आय का एकमात्र जरिया बंद होने की कगार पर आ गया और परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया। चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करने का फैसला
इस कठिन समय में, दो बच्चों की मां होने के बावजूद, फरीदा ने अपने ससुराल की चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करने का फैसला लिया। उन्होंने समाज की परवाह किए बिना अपने पिता के ई-रिक्शा की कमान संभाली। शुरुआत में लोगों ने इसे आश्चर्य से देखा और कुछ ने सवाल भी उठाए। ई रिक्शा को चलाना सीखकर कमाना शुरू की
फरीदा खातून की शादी 2022 में आशिक अली से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। फरीदा के सास-ससुर पंजाब में रहते हैं, जबकि उनके पति विदेश में कमाने गए हुए हैं। फरीदा अपनी जेठानी के साथ ससुराल में रहती हैं।लेकिन जैसे ही फरीदा को इसकी जानकारी मिली वैसे ही वो अपने दो बच्चों के साथ पति और सास ससुर के आदेश लेकर अपने मैके आ गई जहां अपने पिता के ई रिक्शा को चलाना सीखकर कमाना शुरू की। माता-पिता को सम्मानजनक जीवन देने का सपना
आज वह प्रतिदिन गोपालगंज की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती हैं। इससे होने वाली कमाई से वह न केवल अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने बीमार पिता की दवा और माता-पिता की हर सुख-सुविधा का ख्याल भी रख रही हैं। इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी आंखों में अपने माता-पिता को सम्मानजनक जीवन देने का सपना है। उनके इस जज्बे ने यह सिद्ध कर दिया है कि मेहनत का कोई धर्म या लिंग नहीं होता। गोपालगंज जिले में एक मुस्लिम महिला फरीदा ने अपने बीमार पिता की ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने का जिम्मा उठाया है। दो बच्चों की मां फरीदा ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने बीमार माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनकर एक मिसाल पेश की है। फरीदा गोपालगंज के मांझा प्रखंड के पिठौरी गांव निवासी फूल मोहम्मद की बेटी हैं। उनके पिता पहले ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन एक साल पहले उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। बीमारी के कारण फूल मोहम्मद ई-रिक्शा चलाने में असमर्थ हो गए। इससे घर की आय का एकमात्र जरिया बंद होने की कगार पर आ गया और परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया। चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करने का फैसला
इस कठिन समय में, दो बच्चों की मां होने के बावजूद, फरीदा ने अपने ससुराल की चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करने का फैसला लिया। उन्होंने समाज की परवाह किए बिना अपने पिता के ई-रिक्शा की कमान संभाली। शुरुआत में लोगों ने इसे आश्चर्य से देखा और कुछ ने सवाल भी उठाए। ई रिक्शा को चलाना सीखकर कमाना शुरू की
फरीदा खातून की शादी 2022 में आशिक अली से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। फरीदा के सास-ससुर पंजाब में रहते हैं, जबकि उनके पति विदेश में कमाने गए हुए हैं। फरीदा अपनी जेठानी के साथ ससुराल में रहती हैं।लेकिन जैसे ही फरीदा को इसकी जानकारी मिली वैसे ही वो अपने दो बच्चों के साथ पति और सास ससुर के आदेश लेकर अपने मैके आ गई जहां अपने पिता के ई रिक्शा को चलाना सीखकर कमाना शुरू की। माता-पिता को सम्मानजनक जीवन देने का सपना
आज वह प्रतिदिन गोपालगंज की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती हैं। इससे होने वाली कमाई से वह न केवल अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि अपने बीमार पिता की दवा और माता-पिता की हर सुख-सुविधा का ख्याल भी रख रही हैं। इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी आंखों में अपने माता-पिता को सम्मानजनक जीवन देने का सपना है। उनके इस जज्बे ने यह सिद्ध कर दिया है कि मेहनत का कोई धर्म या लिंग नहीं होता।


