केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने नरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर विपक्ष के विरोध पर भी जवाब दिया। नरेगा के भ्रष्टाचार को लेकर कहा कि सरकार का हजारों करोड़ रुपए नरेगा में हर साल खर्च हो रहा है। नरेगा में भयानक भ्रष्टाचार है। जिसे दूर करने के लिए ये योजना लाई गई है। इस योजना में 100 की जगह 125 दिन रोजगार का प्रावधान किया गया है। सरपंच और सरकारी अधिकारी मिलकर के मजदूरों के जॉब कार्ड अपने पास रखते थे, भ्रष्टाचार करते थे। एक ही काम कई बार दिखाकर पैसे उठाते थे। बिना काम के भुगतान किया जाता था। इसके चलते 11 लाख से ज्यादा शिकायत भारत सरकार के पास नरेगा के कामों को लेकर पहुंची थी। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने इस योजना को दुधारू गाय की तरह बना दिया था। कुछ राज्यों ने इसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया था। कई जगहों पर सिर्फ कागजों में काम चलता था। मजदूर को नहीं मिलता फायदा उन्होंने कहा कि इस योजना में मजदूर को रोजगार की गारंटी दी गई है। पहले की सरकारों में मजदूरों को पार्टी विचारधारा के आधार पर रोजगार दिया जाता था। इस योजना में नए बदलाव से अब भ्रष्टाचार रुकेगा। अब प्रशासनिक खर्चों को लेकर 13 हजार करोड़ रुपए नियोजित किए गए हैं।


