ट्रैक मेंटेनर राजन को मिली हाइली स्पेशलाइज्ड रेल सर्विस अवॉर्ड:ट्रैक में दरार देखकर संभावित बड़ा हादसा टाला था, अभी सीवान में हैं कार्यरत

ट्रैक मेंटेनर राजन को मिली हाइली स्पेशलाइज्ड रेल सर्विस अवॉर्ड:ट्रैक में दरार देखकर संभावित बड़ा हादसा टाला था, अभी सीवान में हैं कार्यरत

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में कार्यरत ट्रैक मेंटेनर राजन कुमार यादव को उनकी असाधारण सतर्कता, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर सूझबूझ के लिए प्रतिष्ठित 70वां अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार-2025 प्रदान किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर(यशोभूमि), द्वारका में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा प्रदान किया गया। इस साल भारतीय रेलवे में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान देने वाले देशभर के कुल 100 कर्मियों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें राजन कुमार यादव का नाम शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे पूर्वोत्तर रेलवे और वाराणसी मंडल के लिए गर्व की बात है। गश्ती के दौरान दिखाई खतरनाक दरार, बचा बड़ा हादसा राजन कुमार यादव वर्तमान में सीवान कचहरी स्टेशन पर ट्रैक मेंटेनर के पद पर कार्यरत हैं। 29 दिसंबर 2024 को वे नियमित गश्ती कार्य पर थे। इसी दौरान कीमैन ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने किलोमीटर संख्या 8/14-15 पर रेलवे ट्रैक के ए.टी. वेल्ड में एक खतरनाक क्रेक देखा। यह दरार इतनी गंभीर थी कि यदि समय रहते उस पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो किसी भी समय बड़ा रेल हादसा हो सकता था। खतरे की गंभीरता को समझते हुए राजन कुमार यादव ने बिना किसी देरी के तत्काल लाइन सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने संबंधित ट्रैक को ब्लॉक कराया और उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी। उनके त्वरित निर्णय और सजगता के कारण समय रहते मरम्मत कार्य कराया गया और संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। हजारों यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि ट्रैक में आई इस दरार को नजरअंदाज कर दिया जाता, तो तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के दौरान यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इससे हजारों यात्रियों की जान और करोड़ों की रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। राजन की सतर्कता ने न सिर्फ रेल संचालन को सुरक्षित रखा, बल्कि यात्रियों के भरोसे को भी मजबूत किया। अधिकारियों ने बताया प्रेरणास्रोत वाराणसी मंडल के रेल प्रबंधक आशीष जैन ने राजन कुमार यादव को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी सतर्कता और जिम्मेदारी भावना रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की असली ताकत मैदानी स्तर पर काम करने वाले ऐसे ही कर्मचारी हैं, जो हर परिस्थिति में सजग रहकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे यात्रियों का भरोसा तभी कायम रहता है, जब ट्रैक से लेकर ट्रेन संचालन तक हर स्तर पर कर्मचारी पूरी निष्ठा से काम करें। रेलवे का सर्वोच्च सेवा सम्मान अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार भारतीय रेलवे द्वारा सुरक्षा, नवाचार, दक्षता और उत्कृष्ट सेवा के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। यह पुरस्कार उन कर्मचारियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्य से रेलवे की गरिमा को बढ़ाया हो और जिनका योगदान असाधारण रहा हो। धरातल पर काम करने वाले कर्मियों की पहचान राजन कुमार यादव की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रेलवे की असली रीढ़ वे कर्मचारी हैं, जो ट्रैक, सिग्नल और संरक्षा से जुड़े कार्यों में दिन-रात लगे रहते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सावधानी, निष्ठा और तत्परता से किया गया एक छोटा सा प्रयास भी लाखों जिंदगियों को सुरक्षित कर सकता है। राजन की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र के लिए एक मिसाल भी है। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल में कार्यरत ट्रैक मेंटेनर राजन कुमार यादव को उनकी असाधारण सतर्कता, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर सूझबूझ के लिए प्रतिष्ठित 70वां अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार-2025 प्रदान किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर(यशोभूमि), द्वारका में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा प्रदान किया गया। इस साल भारतीय रेलवे में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान देने वाले देशभर के कुल 100 कर्मियों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें राजन कुमार यादव का नाम शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे पूर्वोत्तर रेलवे और वाराणसी मंडल के लिए गर्व की बात है। गश्ती के दौरान दिखाई खतरनाक दरार, बचा बड़ा हादसा राजन कुमार यादव वर्तमान में सीवान कचहरी स्टेशन पर ट्रैक मेंटेनर के पद पर कार्यरत हैं। 29 दिसंबर 2024 को वे नियमित गश्ती कार्य पर थे। इसी दौरान कीमैन ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने किलोमीटर संख्या 8/14-15 पर रेलवे ट्रैक के ए.टी. वेल्ड में एक खतरनाक क्रेक देखा। यह दरार इतनी गंभीर थी कि यदि समय रहते उस पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो किसी भी समय बड़ा रेल हादसा हो सकता था। खतरे की गंभीरता को समझते हुए राजन कुमार यादव ने बिना किसी देरी के तत्काल लाइन सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने संबंधित ट्रैक को ब्लॉक कराया और उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी। उनके त्वरित निर्णय और सजगता के कारण समय रहते मरम्मत कार्य कराया गया और संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई। हजारों यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि ट्रैक में आई इस दरार को नजरअंदाज कर दिया जाता, तो तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के दौरान यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इससे हजारों यात्रियों की जान और करोड़ों की रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। राजन की सतर्कता ने न सिर्फ रेल संचालन को सुरक्षित रखा, बल्कि यात्रियों के भरोसे को भी मजबूत किया। अधिकारियों ने बताया प्रेरणास्रोत वाराणसी मंडल के रेल प्रबंधक आशीष जैन ने राजन कुमार यादव को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनकी सतर्कता और जिम्मेदारी भावना रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की असली ताकत मैदानी स्तर पर काम करने वाले ऐसे ही कर्मचारी हैं, जो हर परिस्थिति में सजग रहकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे यात्रियों का भरोसा तभी कायम रहता है, जब ट्रैक से लेकर ट्रेन संचालन तक हर स्तर पर कर्मचारी पूरी निष्ठा से काम करें। रेलवे का सर्वोच्च सेवा सम्मान अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार भारतीय रेलवे द्वारा सुरक्षा, नवाचार, दक्षता और उत्कृष्ट सेवा के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। यह पुरस्कार उन कर्मचारियों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्य से रेलवे की गरिमा को बढ़ाया हो और जिनका योगदान असाधारण रहा हो। धरातल पर काम करने वाले कर्मियों की पहचान राजन कुमार यादव की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रेलवे की असली रीढ़ वे कर्मचारी हैं, जो ट्रैक, सिग्नल और संरक्षा से जुड़े कार्यों में दिन-रात लगे रहते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सावधानी, निष्ठा और तत्परता से किया गया एक छोटा सा प्रयास भी लाखों जिंदगियों को सुरक्षित कर सकता है। राजन की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र के लिए एक मिसाल भी है।  

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