पूर्णिया में 12 साल की बच्ची की शादी उससे 3 गुना उम्र के युवक से कराई जा रही थी। शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थी। 35 साल का युवक दुल्हा बन मंडप पर बैठा था। फेरे की तैयारी चल रही थी। इस बीच प्रशासन और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीम पहुंच गई और बच्ची का रेस्क्यू कराया। बच्ची शादी के दलदल में फंसने से बच गई। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा कि किसी ग्रामीण ने फोन कर जबरन शादी कराए जाने की बात बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरे निर्देश पर प्रशासन और सामाजिक संगठनों की टीम गठित की गई। गठित टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि जबरन उसकी शादी कटिहार के टिंकू कुमार(35) से कराई जा रही थी। मेरे विरोध करने पर भी मम्मी-पापा कुछ समझने को तैयार नहीं थे। माता-पिता की काउंसलिंग छापेमारी में जिला हब के मिशन समन्वयक, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक, संबंधित थाना की पुलिस और कटिहार जिले की महिला और बाल विकास से जुड़ी टीम शामिल थी। रेड कर आपसी समन्वय के बाद बच्ची का कटिहार से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल संरक्षण का आदेश दिया गया। समिति के निर्देश पर अब बच्ची के आवासन, शिक्षा और मानसिक परामर्श की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उसके माता-पिता की भी काउंसलिंग शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी कोशिश न हो। मैं पढ़ना चाहती हूं रेस्क्यू के बाद बच्ची ने कहा कि मुझे बताया गया था कि अब मेरी शादी होगी और मुझे घर छोड़ना पड़ेगा। मैं पढ़ना चाहती हूं, स्कूल जाना चाहती हूं। मैं बहुत डर गई थी। जब दीदी लोग मुझे लेने आए, तब लगा कि अब मैं सुरक्षित हूं। कुछ लोग बेटियों की शादी मजबूरी मान लेते हैं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने आगे कहा कि ये घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार के कई इलाकों की हकीकत को उजागर करती है। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक दबाव के चलते आज भी कई परिवार कम उम्र में ही बेटियों की शादी को मजबूरी मान लेते हैं। कई मामलों में यह शादी नहीं, बल्कि मानव तस्करी की शुरुआत साबित होती है। बच्चियों को रिश्ते के नाम पर सौंप दिया जाता है और बाद में उनका शोषण होता है, यहां तक कि उन्हें बाहर के राज्यों या देशों तक बेच दिया जाता है। इस मामले में समय रहते हस्तक्षेप होने से एक बच्ची का भविष्य अंधेरे में जाने से बच गया। पूर्णिया में 12 साल की बच्ची की शादी उससे 3 गुना उम्र के युवक से कराई जा रही थी। शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थी। 35 साल का युवक दुल्हा बन मंडप पर बैठा था। फेरे की तैयारी चल रही थी। इस बीच प्रशासन और सामाजिक संगठनों की संयुक्त टीम पहुंच गई और बच्ची का रेस्क्यू कराया। बच्ची शादी के दलदल में फंसने से बच गई। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा कि किसी ग्रामीण ने फोन कर जबरन शादी कराए जाने की बात बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरे निर्देश पर प्रशासन और सामाजिक संगठनों की टीम गठित की गई। गठित टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी की। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि जबरन उसकी शादी कटिहार के टिंकू कुमार(35) से कराई जा रही थी। मेरे विरोध करने पर भी मम्मी-पापा कुछ समझने को तैयार नहीं थे। माता-पिता की काउंसलिंग छापेमारी में जिला हब के मिशन समन्वयक, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक, संबंधित थाना की पुलिस और कटिहार जिले की महिला और बाल विकास से जुड़ी टीम शामिल थी। रेड कर आपसी समन्वय के बाद बच्ची का कटिहार से रेस्क्यू किया गया। इसके बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल संरक्षण का आदेश दिया गया। समिति के निर्देश पर अब बच्ची के आवासन, शिक्षा और मानसिक परामर्श की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उसके माता-पिता की भी काउंसलिंग शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी कोशिश न हो। मैं पढ़ना चाहती हूं रेस्क्यू के बाद बच्ची ने कहा कि मुझे बताया गया था कि अब मेरी शादी होगी और मुझे घर छोड़ना पड़ेगा। मैं पढ़ना चाहती हूं, स्कूल जाना चाहती हूं। मैं बहुत डर गई थी। जब दीदी लोग मुझे लेने आए, तब लगा कि अब मैं सुरक्षित हूं। कुछ लोग बेटियों की शादी मजबूरी मान लेते हैं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने आगे कहा कि ये घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार के कई इलाकों की हकीकत को उजागर करती है। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक दबाव के चलते आज भी कई परिवार कम उम्र में ही बेटियों की शादी को मजबूरी मान लेते हैं। कई मामलों में यह शादी नहीं, बल्कि मानव तस्करी की शुरुआत साबित होती है। बच्चियों को रिश्ते के नाम पर सौंप दिया जाता है और बाद में उनका शोषण होता है, यहां तक कि उन्हें बाहर के राज्यों या देशों तक बेच दिया जाता है। इस मामले में समय रहते हस्तक्षेप होने से एक बच्ची का भविष्य अंधेरे में जाने से बच गया।


