रायपुर से सटी पंचायतें देवपुरी, डूंडा, बोरियाखुर्द और डूमरतराई वर्ष 2011-12 में नगर निगम में शामिल की गई थीं। पंचायत से निगम में शामिल होने के बाद यहां के निवासियों पर संपत्तिकर लागू हुआ, लेकिन इन चारों गांवों के करीब 70 प्रतिशत से अधिक मूल निवासी और संपत्ति मालिकों ने अब तक टैक्स जमा नहीं किया है। कुछ लोग जब टैक्स जमा करने जोन कार्यालय पहुंचते हैं, तो उनसे 14 वर्षों का एकमुश्त टैक्स मांगा जा रहा है, जो बेहद अधिक है। कई मामलों में यह राशि 5 से 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग संपत्तिकर जमा नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र के सभी व्यावसायिक परिसरों और वर्ष 2012 के बाद निर्मित आवासों का टैक्स नियमित रूप से वसूला जा रहा है। गौरतलब है कि निगम में सम्मिलन के समय बाबू जगजीवनराम वार्ड-53 में देवपुरी, डूंडा और डूमरतराई की बस्तियों को शामिल किया गया था। वहीं, कामरेड सुधीर आजाद वार्ड-54 में बोरियाखुर्द और बोरियाखुर्द बस्ती को जोड़ा गया। ये सभी बस्तियां तत्कालीन पंचायतों की मूल आबादी क्षेत्र थीं। इन चारों पंचायतों के 2000 से अधिक संपत्ति मालिकों ने अब तक टैक्स अदा नहीं किया है। इसे लेकर पार्षदों के माध्यम से लोगों ने कम से कम पांच वर्षों की टैक्स छूट की मांग की है। इस संबंध में पार्षदों ने महापौर और निगम आयुक्त को पत्र भी लिखा है। अवैध बसाहट भी बन रही समस्या
वार्ड 53 और 54 में अवैध बसाहट और अवैध प्लाटिंग भी बड़ी समस्या बनी हुई है। अवैध प्लाटिंग में प्लाट खरीदकर मकान बनाने वाले लोग सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। दूसरी ओर, निगम भी इनसे नियमित टैक्स वसूली नहीं कर पा रहा है। इसी क्रम में निगम ने देवपुरी व बोरियाखुर्द में 7.42 एकड़ जमीन पर हुई अवैध प्लाटिंग को लेकर प्रबंध अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की है। पार्षदों ने कहा- कोई खास काम नहीं हुआ वार्ड-53 के पार्षद मनोज जांगड़े ने बताया कि निगम में शामिल होने के बाद वर्षों तक इन इलाकों में काम ही नहीं हुआ। अब गलियों में सड़कें बन रही हैं। मुक्तिधाम का रास्ता 13 साल बाद बना है।
वार्ड-54 की पार्षद सुषमा तिलक साहू ने कहा कि निगम में शामिल तो हुए, लेकिन विकास नहीं हुआ। पिछले कुछ समय से काम शुरू हुआ है। 14 साल का एकमुश्त टैक्स भारी
स्थानीय निवासी राजेश साहू का कहना है कि 14 वर्षों का एकमुश्त टैक्स उनके लिए बेहद भारी है। निगम अधिकारी भले ही 2-2 या 5-5 साल में टैक्स जमा करने का विकल्प दे रहे हों, लेकिन जब निगम स्तर का विकास ही नहीं हुआ तो 14 साल का टैक्स क्यों दिया जाए। तस्वीर डूंडा की, यहां पक्की सड़क ही नहीं देवपुरी, डूंडा, बोरियाखुर्द और डूमरतराई में बुनियादी सुविधाओं का ही संकट है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि डूंडा के कई मोहल्लों में आज भी सीसी सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। बरसात में हर साल जलभराव की गंभीर समस्या सामने आती है। मुख्य मार्ग के आसपास नए मोहल्ले बस चुके हैं, जहां बड़ी आबादी रहती है, लेकिन सड़क और नाली नहीं होने से घुटनों तक पानी भर जाता है। स्थानीय निवासी नरेश सिन्हा ने बताया कि कचरा वाहन अनियमित आता है। बोरियाखुर्द के नए इलाकों में सुविधाएं दिखती हैं, जबकि पुरानी बस्तियों में गंदगी और बदहाली है। आगे क्या… किस्तों में टैक्स जमा कर सकेंगे जोन-10 के जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे ने बताया कि वार्ड क्रमांक 53 में करीब 1200 संपत्तियों का टैक्स वर्षों से जमा नहीं हुआ है। ऐसे लोगों को 2-2 या 5-5 साल में टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। व्यावसायिक परिसरों और नई संपत्तियों का टैक्स नियमित रूप से जमा हो रहा है। वार्ड क्रमांक 54 में भी अब पुराने निवासी टैक्स जमा करना शुरू कर रहे हैं। निगम के पास छूट का अधिकार नहीं
पिछली सरकारों ने नए क्षेत्रों के विकास पर ध्यान नहीं दिया। अब वर्क ऑर्डर जारी किए गए हैं। दोनों वार्डों से पांच साल की टैक्स छूट की मांग आई है, लेकिन टैक्स में छूट देने का अधिकार निगम के पास नहीं है। यह निर्णय शासन स्तर पर होता है। -मीनल चौबे, महापौर


