‘बुआ, मौसी हम लोगों से जबरन देह व्यापार कराती थी’:जो पैसे मिलते थे, उसी भी रख लेती थीं; रेस्क्यू की गई 6 नाबालिगों की आपबीती

‘बुआ, मौसी हम लोगों से जबरन देह व्यापार कराती थी’:जो पैसे मिलते थे, उसी भी रख लेती थीं; रेस्क्यू की गई 6 नाबालिगों की आपबीती

‘बुआ और मौसी हम लोगों से जबरन गंदा काम कराती हैं, हम लोगों को बचा लीजिए। कहती हैं कि तुम अगर हम लोगों के कहे के मुताबिक काम करोगी, तो तुम लोगों को ढेर सारा पैसा मिलेगा, लेकिन अगर तुम लोगों ने हमारा कहना नहीं माना तो फिर तुम लोगों की पिटाई होगी, खाना भी नहीं देंगे, न ही तुम्हारे माता-पिता को पैसे भेजेंगे।’ ‘हम लोग जो कुछ करते थे, बुआ और मौसी के कहने पर ही करते थे। अगर इनकी बात नहीं मानते थे तो हमारी पिटाई भी होती थी। प्लीज दीदी, हम लोगों को जेल मत भेजिएगा। हम लोगों के माता-पिता काफी गरीब हैं। हम लोगों को घर का काम करने के बहाने यहां लाया जाता था, फिर जबरन हम लोगों से मारपीट कर गंदा काम कराया जा रहा था।’ ये बातें रेड लाइट एरिया से रेस्क्यू की गई लड़कियों ने कही। नाम न छापने की शर्त पर छापेमारी टीम में शामिल एक पुलिस कर्मी ने दैनिक भास्कर को ये बातें बताई हैं। पुलिस ने छापेमारी के दौरान दो महिलाओं शबाना खातून उर्फ सुनीता और बानो खातून को गिरफ्तार किया है, जबकि एक फरार महिला कुमारी पल्लवी की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू की गई लड़कियों ने शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार दोनों महिलाओं को बुआ और मौसी बता रही थी, लेकिन जब NGO और पुलिस की टीम ने उनसे किसी से न डरने और सब कुछ बताने को कहा, तो उन्होंने सारी सच्चाई बयां कर दी। रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियां कहां की रहने वाली थीं, पुलिस की टीम को छापेमारी के दौरान क्या मिला, कितने लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, रेस्क्यू के बाद नाबालिग लड़कियों ने पुलिस को क्या बताया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले नाबालिग लड़कियों ने जो कहा, वो पढ़िए रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियों ने शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार दोनों महिलाओं को रिश्तेदार बताया। कहा कि हम लोग अपनी बुआ और मौसी के घर रहते हैं। लेकिन जब उनसे विस्तार से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि शबाना खातून और बानो खातून हमलोगों से जबरन देह व्यापार करने को कहती हैं और ऐसा नहीं करने पर हमारे साथ मारपीट की जाती है। नाबालिग बच्चियों ने बताया कि देह व्यापार के बदले जो भी रुपए कस्टमर देते थे, वो भी बुआ और मौसी रख लेती हैं। मांगने पर हम लोगों को पुलिस से पकड़वाने की धमकी दी जाती थी। छापेमारी के बाद गिरफ्तार बानो खातून के घर में उसकी नाबालिग बेटी भी मिली, जो किसी निजी स्कूल में पढ़ाई करती है। बानो के घर से रेस्क्यू की गई तीन बच्चियों को वो अपनी बेटी के साथ ही रखती थी, ताकि अगर किसी दिन पुलिस की छापेमारी भी हो तो पुलिस को ये न पता चल पाए कि इन बच्चियों से देह व्यापार कराया जा रहा था। छापेमारी के दौरान बानो की बेटी के कमरे से स्कूल की कॉपी और किताबें भी मिली। रेस्क्यू की गई एक लड़की ने बताया, ‘मुझे पढ़ाई का बहुत शौक है, मैं पढ़-लिखकर कुछ ऐसा करना चाहती हूं कि मेरे माता-पिता अच्छे घर में रह सके। बुजुर्ग हो तो उन्हें किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसलिए मैं बानो बुआ की बेटी की स्कूल की किताबें भी पढ़ती थी। जब भी पढ़ाई में मन लगता था, बुआ किसी कस्टमर को मुझे सौंप देती थी। मुझे काफी गुस्सा आता था, लेकिन फिर माता-पिता की मजबूरी देखकर मुझे चुप रहना पड़ता था।’ मौसी ने कहा था- कोई आए तो बताना कि ये मेरी आंटी है वहीं, शबाना के घर से रेस्क्यू की गई लड़कियों ने शुरुआत में अपना पता मधुबनी के राजनगर बताया, लेकिन जब उनसे दोबारा पूछताछ की गई तो उन्होंने खुद को मुजफ्फरपुर का ही रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि हमसे जोर जबरदस्ती कराई जाती है। एक नाबालिग ने बताया, ‘जब मैं यहां करीब एक साल पहले आई थी, तब मौसी ने मुझे डरा धमकाकर समझाया था कि कोई अचानक आ जाए, भले ही सादे लिबास में आए, हो सकता है कि वो पुलिस का आदमी हो, कितना भी प्रेशर दे, कितना भी लालच दे, कितना भी डराए, लेकिन ये मत बताना कि तुम यहां देह व्यापार करती हो। सिर्फ इतना बताना कि मैं अपनी मौसी के घर रहती हूं और यहां घर का काम करती हूं।’ नाबालिग ने बताया, ‘मौसी ने ये भी कहा था कि अगर तुमने सच बताया तो फिर मेरा कुछ नहीं होगा, मैंने बहुत पैसे कमाए हैं, मैं तो छूट जाऊंगी, लेकिन तुम लोगों को पुलिस जेल भेज देगी। इसलिए शुरुआत में हम लोगों ने झूठ बोला था, लेकिन प्लीज आप लोग हम लोगों को जेल मत भेजना। जो भी है, हमने आप लोगों को सब सच बताया है।’ ‘आंखें बंद करती हूं, तो वो कमरा याद आता है, वो डरावने पल थे’ एक नाबालिग ने अपनी उम्र 14 साल बताई। उसने केहा कि मुझे देह व्यापार के दलदल से जब पुलिस ने निकाला तो लगा कि मैं मरकर दोबारा जिंदा हो गई हूं, बस मुझे मेरे घर भेज दिया जाए। मैं अपने माता-पिता के पास जाना चाहती हूं। चाहे जो भी हो, जैसे भी हो, मैं उनके साथ ही रहूंगी। मैं जब भी अपनी आंखें बंद करती हूं तो वहीं कमरा, वहीं लाइट, वहीं डरावनी आवाजें सुनाई देती हैं। उसने कहा कि घर में बहुत गरीबी है। पिता किसान हैं, लेकिन खेत छोटा है, कर्ज़ बहुत है। मां कहती थी कि बेटी, तू पढ़‑लिख नहीं पाएगी, घर चलाने में हाथ बंटा। एक दिन गांव की एक औरत (हम उसे ‘मौसी’ कहते थे) आई। बोली कि बेटी को शहर ले चलो, एक अच्छे घर में काम मिलेगा, कपड़े‑बर्तन धोना, बच्चे संभालना। महीने के 5 हजार देंगे। मां को लगा, यह अच्छा मौका है। मैंने भी सोचा कि शहर जाऊंगी, पैसे कमाऊंगी, घर कि मदद करूंगी। उन्होंने मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। रात को कोई आदमी आया, तो मुझे बुलाया गया और फिर उसके साथ कमरे में जाने को कहा गया। मैं बिल्कुल डर गई, फिर बुआ ने मुझे और डराया और कहा कि जो कह रही हूं नहीं करेगी तो तुम्हारी पिटाई करूंगी। अगर तुमने मेरे कहने के मुताबिक सब कुछ किया तो तुम्हें भी पैसे मिलेंगे और तुम्हारे माता-पिता को भी पैसे भेज दूंगी। उस रात मैं काफी रोई थी, लेकिन न तो कस्टमर ने और न ही बुआ ने, किसी ने मेरे आंसू नहीं देखे। ‘अगले दिन बुआ ने कहा- अब से तू यही काम करेगी’ अगले दिन सुबह बुआ ने कहा कि अब तू यहीं काम करेगी। अगर तुमने यहां से भागने कि कोशिश की तो तेरे घरवालों को मरवा देंगे। हमारे लोग गांव मेें ही हैं। मैं डर गई। मैंने सोचा, भागूंगी तो मां‑बाप कि जान खतरे में आ जाएगी। नाबालिग बताती है कि हमें कभी पैसा नहीं दिखता था। बुआ कहती कि तुम्हारा खाना‑पीना, रहना, सब हमारा खर्चा है, इसलिए पैसा तुम्हारा नहीं हमारा ही रहेगा। हम भूखे रहते थे। कभी‑कभी दो दिन तक कुछ नहीं मिलता था। उसने बताया कि एक लड़की भागने कि कोशिश कर रही थी। उसे पकड़कर बहुत मारा। हम सबको बाहर खड़ा करके दिखाया कि देखो, भागने कि कोशिश की तो यही होगा। उसके बाद किसी ने भागने कि हिम्मत नहीं की। लड़की ने बताया कि हम लड़कियां काफी डर सहमी रहती थीं, हम सोचते थे कि अगर घर वापस गए तो लोग क्या कहेंगे? लेकिन शुक्रवार को पुलिस आई। हमें लगा, अब तो जेल भेज देंगे। लेकिन एक दीदी (महिला अधिकारी) ने कहा कि डरो मत, तुम हमारे साथ सुरक्षित हो। शुक्रवार को ही लगा कि हम बच सकते हैं। रेस्क्यू फाउंडेशन के जांचकर्ता ने मुजफ्फरपुर नगर थाना में दर्ज कराई FIR रेस्क्यू फाउंडेशन के जांचकर्ता संजय प्रसाद गुप्ता की ओर से मुजफ्फरपुर नगर थाना में FIR दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि सूचना मिली थी कि मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान पर नाबालिग लड़कियों से देहव्यापार कराया जा रहा है। सूचना के सत्यापान के बाद नगर थाना से संपर्क कर लोकेशन पर छापेमारी कराई गई। दो अलग-अलग लोकेशन से देह कारोबार की दो संचालिकाओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों जगहों से 3-3 यानी कुल 6 नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। पहली छापेमारी शुक्ला रोड चतुर्भूज स्थान मैना गली में की गई, जहां से 65 साल की शबाना खातून उर्फ सुनीता और 37 साल की बानो खातून को गिरफ्तार किया गया। सुनीता के मकान में जहां लड़कियों को रखा गया था। वहां से पैकेट में पैक और यूज्ड कंडोम बरामद किए गए। यहां से बरामद तीन बच्चियों ने बताया कि वे चमड़ा गोदाम गली थाना नगर इलाके की रहने वाली हैं। इसके बाद, पुलिस की टीम ने शुक्ला रोड पर कुमारी पल्लवी के मकान में छापेमारी की। यहां से भी पुलिस ने तीन नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया। तीनों ने अपना घर मिठनपुरा मुजफ्फरपुर बताया। यहां से भी तलाशी के दौरान आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुमारी पल्लवी घर पर नहीं मिली। पुलिस ने तीनों महिलाओं के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। ‘बुआ और मौसी हम लोगों से जबरन गंदा काम कराती हैं, हम लोगों को बचा लीजिए। कहती हैं कि तुम अगर हम लोगों के कहे के मुताबिक काम करोगी, तो तुम लोगों को ढेर सारा पैसा मिलेगा, लेकिन अगर तुम लोगों ने हमारा कहना नहीं माना तो फिर तुम लोगों की पिटाई होगी, खाना भी नहीं देंगे, न ही तुम्हारे माता-पिता को पैसे भेजेंगे।’ ‘हम लोग जो कुछ करते थे, बुआ और मौसी के कहने पर ही करते थे। अगर इनकी बात नहीं मानते थे तो हमारी पिटाई भी होती थी। प्लीज दीदी, हम लोगों को जेल मत भेजिएगा। हम लोगों के माता-पिता काफी गरीब हैं। हम लोगों को घर का काम करने के बहाने यहां लाया जाता था, फिर जबरन हम लोगों से मारपीट कर गंदा काम कराया जा रहा था।’ ये बातें रेड लाइट एरिया से रेस्क्यू की गई लड़कियों ने कही। नाम न छापने की शर्त पर छापेमारी टीम में शामिल एक पुलिस कर्मी ने दैनिक भास्कर को ये बातें बताई हैं। पुलिस ने छापेमारी के दौरान दो महिलाओं शबाना खातून उर्फ सुनीता और बानो खातून को गिरफ्तार किया है, जबकि एक फरार महिला कुमारी पल्लवी की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू की गई लड़कियों ने शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार दोनों महिलाओं को बुआ और मौसी बता रही थी, लेकिन जब NGO और पुलिस की टीम ने उनसे किसी से न डरने और सब कुछ बताने को कहा, तो उन्होंने सारी सच्चाई बयां कर दी। रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियां कहां की रहने वाली थीं, पुलिस की टीम को छापेमारी के दौरान क्या मिला, कितने लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, रेस्क्यू के बाद नाबालिग लड़कियों ने पुलिस को क्या बताया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले नाबालिग लड़कियों ने जो कहा, वो पढ़िए रेस्क्यू की गई नाबालिग लड़कियों ने शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार दोनों महिलाओं को रिश्तेदार बताया। कहा कि हम लोग अपनी बुआ और मौसी के घर रहते हैं। लेकिन जब उनसे विस्तार से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि शबाना खातून और बानो खातून हमलोगों से जबरन देह व्यापार करने को कहती हैं और ऐसा नहीं करने पर हमारे साथ मारपीट की जाती है। नाबालिग बच्चियों ने बताया कि देह व्यापार के बदले जो भी रुपए कस्टमर देते थे, वो भी बुआ और मौसी रख लेती हैं। मांगने पर हम लोगों को पुलिस से पकड़वाने की धमकी दी जाती थी। छापेमारी के बाद गिरफ्तार बानो खातून के घर में उसकी नाबालिग बेटी भी मिली, जो किसी निजी स्कूल में पढ़ाई करती है। बानो के घर से रेस्क्यू की गई तीन बच्चियों को वो अपनी बेटी के साथ ही रखती थी, ताकि अगर किसी दिन पुलिस की छापेमारी भी हो तो पुलिस को ये न पता चल पाए कि इन बच्चियों से देह व्यापार कराया जा रहा था। छापेमारी के दौरान बानो की बेटी के कमरे से स्कूल की कॉपी और किताबें भी मिली। रेस्क्यू की गई एक लड़की ने बताया, ‘मुझे पढ़ाई का बहुत शौक है, मैं पढ़-लिखकर कुछ ऐसा करना चाहती हूं कि मेरे माता-पिता अच्छे घर में रह सके। बुजुर्ग हो तो उन्हें किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसलिए मैं बानो बुआ की बेटी की स्कूल की किताबें भी पढ़ती थी। जब भी पढ़ाई में मन लगता था, बुआ किसी कस्टमर को मुझे सौंप देती थी। मुझे काफी गुस्सा आता था, लेकिन फिर माता-पिता की मजबूरी देखकर मुझे चुप रहना पड़ता था।’ मौसी ने कहा था- कोई आए तो बताना कि ये मेरी आंटी है वहीं, शबाना के घर से रेस्क्यू की गई लड़कियों ने शुरुआत में अपना पता मधुबनी के राजनगर बताया, लेकिन जब उनसे दोबारा पूछताछ की गई तो उन्होंने खुद को मुजफ्फरपुर का ही रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि हमसे जोर जबरदस्ती कराई जाती है। एक नाबालिग ने बताया, ‘जब मैं यहां करीब एक साल पहले आई थी, तब मौसी ने मुझे डरा धमकाकर समझाया था कि कोई अचानक आ जाए, भले ही सादे लिबास में आए, हो सकता है कि वो पुलिस का आदमी हो, कितना भी प्रेशर दे, कितना भी लालच दे, कितना भी डराए, लेकिन ये मत बताना कि तुम यहां देह व्यापार करती हो। सिर्फ इतना बताना कि मैं अपनी मौसी के घर रहती हूं और यहां घर का काम करती हूं।’ नाबालिग ने बताया, ‘मौसी ने ये भी कहा था कि अगर तुमने सच बताया तो फिर मेरा कुछ नहीं होगा, मैंने बहुत पैसे कमाए हैं, मैं तो छूट जाऊंगी, लेकिन तुम लोगों को पुलिस जेल भेज देगी। इसलिए शुरुआत में हम लोगों ने झूठ बोला था, लेकिन प्लीज आप लोग हम लोगों को जेल मत भेजना। जो भी है, हमने आप लोगों को सब सच बताया है।’ ‘आंखें बंद करती हूं, तो वो कमरा याद आता है, वो डरावने पल थे’ एक नाबालिग ने अपनी उम्र 14 साल बताई। उसने केहा कि मुझे देह व्यापार के दलदल से जब पुलिस ने निकाला तो लगा कि मैं मरकर दोबारा जिंदा हो गई हूं, बस मुझे मेरे घर भेज दिया जाए। मैं अपने माता-पिता के पास जाना चाहती हूं। चाहे जो भी हो, जैसे भी हो, मैं उनके साथ ही रहूंगी। मैं जब भी अपनी आंखें बंद करती हूं तो वहीं कमरा, वहीं लाइट, वहीं डरावनी आवाजें सुनाई देती हैं। उसने कहा कि घर में बहुत गरीबी है। पिता किसान हैं, लेकिन खेत छोटा है, कर्ज़ बहुत है। मां कहती थी कि बेटी, तू पढ़‑लिख नहीं पाएगी, घर चलाने में हाथ बंटा। एक दिन गांव की एक औरत (हम उसे ‘मौसी’ कहते थे) आई। बोली कि बेटी को शहर ले चलो, एक अच्छे घर में काम मिलेगा, कपड़े‑बर्तन धोना, बच्चे संभालना। महीने के 5 हजार देंगे। मां को लगा, यह अच्छा मौका है। मैंने भी सोचा कि शहर जाऊंगी, पैसे कमाऊंगी, घर कि मदद करूंगी। उन्होंने मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। रात को कोई आदमी आया, तो मुझे बुलाया गया और फिर उसके साथ कमरे में जाने को कहा गया। मैं बिल्कुल डर गई, फिर बुआ ने मुझे और डराया और कहा कि जो कह रही हूं नहीं करेगी तो तुम्हारी पिटाई करूंगी। अगर तुमने मेरे कहने के मुताबिक सब कुछ किया तो तुम्हें भी पैसे मिलेंगे और तुम्हारे माता-पिता को भी पैसे भेज दूंगी। उस रात मैं काफी रोई थी, लेकिन न तो कस्टमर ने और न ही बुआ ने, किसी ने मेरे आंसू नहीं देखे। ‘अगले दिन बुआ ने कहा- अब से तू यही काम करेगी’ अगले दिन सुबह बुआ ने कहा कि अब तू यहीं काम करेगी। अगर तुमने यहां से भागने कि कोशिश की तो तेरे घरवालों को मरवा देंगे। हमारे लोग गांव मेें ही हैं। मैं डर गई। मैंने सोचा, भागूंगी तो मां‑बाप कि जान खतरे में आ जाएगी। नाबालिग बताती है कि हमें कभी पैसा नहीं दिखता था। बुआ कहती कि तुम्हारा खाना‑पीना, रहना, सब हमारा खर्चा है, इसलिए पैसा तुम्हारा नहीं हमारा ही रहेगा। हम भूखे रहते थे। कभी‑कभी दो दिन तक कुछ नहीं मिलता था। उसने बताया कि एक लड़की भागने कि कोशिश कर रही थी। उसे पकड़कर बहुत मारा। हम सबको बाहर खड़ा करके दिखाया कि देखो, भागने कि कोशिश की तो यही होगा। उसके बाद किसी ने भागने कि हिम्मत नहीं की। लड़की ने बताया कि हम लड़कियां काफी डर सहमी रहती थीं, हम सोचते थे कि अगर घर वापस गए तो लोग क्या कहेंगे? लेकिन शुक्रवार को पुलिस आई। हमें लगा, अब तो जेल भेज देंगे। लेकिन एक दीदी (महिला अधिकारी) ने कहा कि डरो मत, तुम हमारे साथ सुरक्षित हो। शुक्रवार को ही लगा कि हम बच सकते हैं। रेस्क्यू फाउंडेशन के जांचकर्ता ने मुजफ्फरपुर नगर थाना में दर्ज कराई FIR रेस्क्यू फाउंडेशन के जांचकर्ता संजय प्रसाद गुप्ता की ओर से मुजफ्फरपुर नगर थाना में FIR दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि सूचना मिली थी कि मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान पर नाबालिग लड़कियों से देहव्यापार कराया जा रहा है। सूचना के सत्यापान के बाद नगर थाना से संपर्क कर लोकेशन पर छापेमारी कराई गई। दो अलग-अलग लोकेशन से देह कारोबार की दो संचालिकाओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों जगहों से 3-3 यानी कुल 6 नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। पहली छापेमारी शुक्ला रोड चतुर्भूज स्थान मैना गली में की गई, जहां से 65 साल की शबाना खातून उर्फ सुनीता और 37 साल की बानो खातून को गिरफ्तार किया गया। सुनीता के मकान में जहां लड़कियों को रखा गया था। वहां से पैकेट में पैक और यूज्ड कंडोम बरामद किए गए। यहां से बरामद तीन बच्चियों ने बताया कि वे चमड़ा गोदाम गली थाना नगर इलाके की रहने वाली हैं। इसके बाद, पुलिस की टीम ने शुक्ला रोड पर कुमारी पल्लवी के मकान में छापेमारी की। यहां से भी पुलिस ने तीन नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया। तीनों ने अपना घर मिठनपुरा मुजफ्फरपुर बताया। यहां से भी तलाशी के दौरान आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुमारी पल्लवी घर पर नहीं मिली। पुलिस ने तीनों महिलाओं के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।  

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