मुजफ्फरपुर. देश की सेवा में 31 साल बिता चुके सीआरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक अशोक कुमार (51) को आज छत्तीसगढ़ लौटना था। बीजापुर में वो ड्यूटी पर तैनात थे। लेकिन छुट्टी खत्म होने से ठीक एक दिन पहले रेवा रोड पर हुए सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। शुक्रवार शाम ट्रक की ठोकर से गंभीर रूप से घायल हुए अशोक कुमार ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। छुट्टी का आखिरी दिन बना जिंदगी का आखिरी सफर अशोक कुमार 29 दिसंबर को छुट्टी लेकर सरैया थाना क्षेत्र के बहिलवारा भुआल उत्तरी स्थित अपने पैतृक गांव आए थे। शुक्रवार की शाम वे बैरिया स्थित अपने डेरा से बाइक से गांव लौट रहे थे। भगवानपुर–भामाशाह द्वार होते हुए रेवा रोड पर पहुंचते ही एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे सड़क पर गिर पड़े और मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद अस्पतालों की दौड़ स्थानीय लोगों की सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें गंभीर अवस्था में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक बताई। इसके बाद परिजन उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 1994 में हुई थी बहाली, बीजापुर में थे तैनात मृतक के पिता किशोरी भक्त सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं। इन्होंने बताया कि अशोक कुमार की सीआरपीएफ में बहाली साल 1994 में हुई थी। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 22वीं बटालियन के सिग्नल विभाग में रेडियो ऑपरेटर के पद पर तैनात थे। उनकी सेवा के अभी करीब नौ साल शेष थे। गांव पहुंचते ही मातम में बदला माहौल शनिवार की सुबह जैसे ही जवान का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बहिलवारा भुआल उत्तरी गांव पहुंचा, पूरे गांव में कोहराम मच गया। दरवाजे पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार ने माहौल को और भी गमगीन कर दिया। गार्ड ऑफ ऑनर में छलके आंसू झपहां स्थित सीआरपीएफ कैंप के इंस्पेक्टर दीनदयाल राम के नेतृत्व में जवानों की टुकड़ी ने अशोक कुमार को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राष्ट्रध्वज में लिपटे पार्थिव शरीर को देख हर आंख नम थी। इसके बाद पूरे गांव में शव यात्रा निकाली गई। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई गांव स्थित अशोक कुमार की निजी जमीन पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर मुखिया अजय चौधरी, सरपंच मुकेश झा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सीआरपीएफ की ओर से इंस्पेक्टर दीनदयाल राम ने शोकाकुल पत्नी को एक लाख रुपए की सहायता राशि सौंपी। दो बेटों के सिर से उठा पिता का साया अशोक कुमार अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। दोनों बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी शिक्षिका हैं। परिवार की हालत देख गांव वालों की आंखें भर आईं। मुजफ्फरपुर. देश की सेवा में 31 साल बिता चुके सीआरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक अशोक कुमार (51) को आज छत्तीसगढ़ लौटना था। बीजापुर में वो ड्यूटी पर तैनात थे। लेकिन छुट्टी खत्म होने से ठीक एक दिन पहले रेवा रोड पर हुए सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। शुक्रवार शाम ट्रक की ठोकर से गंभीर रूप से घायल हुए अशोक कुमार ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। छुट्टी का आखिरी दिन बना जिंदगी का आखिरी सफर अशोक कुमार 29 दिसंबर को छुट्टी लेकर सरैया थाना क्षेत्र के बहिलवारा भुआल उत्तरी स्थित अपने पैतृक गांव आए थे। शुक्रवार की शाम वे बैरिया स्थित अपने डेरा से बाइक से गांव लौट रहे थे। भगवानपुर–भामाशाह द्वार होते हुए रेवा रोड पर पहुंचते ही एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे सड़क पर गिर पड़े और मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद अस्पतालों की दौड़ स्थानीय लोगों की सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें गंभीर अवस्था में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उनकी हालत नाजुक बताई। इसके बाद परिजन उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 1994 में हुई थी बहाली, बीजापुर में थे तैनात मृतक के पिता किशोरी भक्त सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं। इन्होंने बताया कि अशोक कुमार की सीआरपीएफ में बहाली साल 1994 में हुई थी। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 22वीं बटालियन के सिग्नल विभाग में रेडियो ऑपरेटर के पद पर तैनात थे। उनकी सेवा के अभी करीब नौ साल शेष थे। गांव पहुंचते ही मातम में बदला माहौल शनिवार की सुबह जैसे ही जवान का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर बहिलवारा भुआल उत्तरी गांव पहुंचा, पूरे गांव में कोहराम मच गया। दरवाजे पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार ने माहौल को और भी गमगीन कर दिया। गार्ड ऑफ ऑनर में छलके आंसू झपहां स्थित सीआरपीएफ कैंप के इंस्पेक्टर दीनदयाल राम के नेतृत्व में जवानों की टुकड़ी ने अशोक कुमार को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। राष्ट्रध्वज में लिपटे पार्थिव शरीर को देख हर आंख नम थी। इसके बाद पूरे गांव में शव यात्रा निकाली गई। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई गांव स्थित अशोक कुमार की निजी जमीन पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर मुखिया अजय चौधरी, सरपंच मुकेश झा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सीआरपीएफ की ओर से इंस्पेक्टर दीनदयाल राम ने शोकाकुल पत्नी को एक लाख रुपए की सहायता राशि सौंपी। दो बेटों के सिर से उठा पिता का साया अशोक कुमार अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। दोनों बेटे पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी शिक्षिका हैं। परिवार की हालत देख गांव वालों की आंखें भर आईं।


