लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी का प्रवासी : प्रवासी की हिन्दी’ द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया।यह संगोष्ठी प्रवासी भारतीय दिवस और विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल वाराणसी और भारत सेवा ट्रस्ट वाराणसी के सहयोग सें आयोजित की गई थी।संगोष्ठी के दूसरे दिन भाषा, संस्कृति और डिजिटल युग में हिन्दी की भूमिका पर चर्चा हुईं। संगोष्ठी के दूसरे दिन का तीसरा तकनीकी सत्र ‘प्रवासी-आप्रवासी हिन्दी लेखन’ विषय पर केंद्रित रहा। इसकी अध्यक्षता भारत सरकार के प्रिंटिंग एवं प्रकाशन विभाग के पूर्व निदेशक अरुण कुमार सिन्हा ने की। उन्होंने कहा कि प्रवासी अपने साथ केवल शरीर ही नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति भी ले जाते हैं। उन्होंने गिरमिटिया हिन्दी को स्मृति, संघर्ष और संवेदना की भाषा बताया। मातृभाषा की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की सिन्हा ने बताया कि फिजी हिन्दी और सरनामी जैसी भाषाओं का विकास इसी पीड़ा और जिजीविषा से हुआ है। उन्होंने अंग्रेजी के प्रभाव में मातृभाषा की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की और जानकारी दी कि आज विश्व के 176 संस्थानों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है।नार्वे से जुड़े सुरेश चन्द्र शुक्ल ने कहा कि हिन्दी वहाँ-वहाँ लिखी जा रही है जहाँ सूरज नहीं डूबता। उन्होंने प्रवासी लेखकों को सम्मान देने वाले भारतीय साहित्यकारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। रामचरितमानस की वैश्विक भूमिका के बारे में बताया डॉ. भावना सक्सेना ने प्रवासियों को हिन्दी का संवाहक बताते हुए गिरमिटिया साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल करने और शोध केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा। डॉ. संत त्रिपाठी ने रामचरितमानस की वैश्विक भूमिका के बारे में बताया।चौथा तकनीकी सत्र ‘डिजिटल हिन्दी संचार : भविष्य की चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित किया गया।इस सत्र की अध्यक्षता दैनिक जागरण के राज्य संपादक आशुतोष शुक्ल ने की। विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इकोनॉमी में हिन्दी की संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।समापन सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने हिन्दी को राष्ट्रीय अस्मिता की आत्मा बताया। उन्होंने नई पीढ़ी को हिन्दी से जोड़ने का आह्वान किया। यह संगोष्ठी हिन्दी के वैश्विक भविष्य को लेकर एक सकारात्मक संदेश के साथ संपन्न हुई।


