साढ़े तीन घंटे भी थिएटर में बैठने को तैयार हैं दर्शक! शर्त बात एक ही है… मेकर्स को करना होगा ये काम

साढ़े तीन घंटे भी थिएटर में बैठने को तैयार हैं दर्शक! शर्त बात एक ही है… मेकर्स को करना होगा ये काम

Big-Screen Engagement: बॉलीवुड में 3 घंटे (180 मिनट) से ज्यादा रनटाइम वाली फिल्में कम हैं, लेकिन कई क्लासिक और ब्लॉकबस्टर इसी कैटेगरी में आती हैं। अब तक करीब 100 हिंदी फिल्में 3 घंटे से ज्यादा लंबी रिलीज हुई हैं। पुराने जमाने में गाने और ड्रामा की वजह से फिल्में लंबी होती थीं, जबकि अब एक्शन/एपिक स्टोरी वाली फिल्में लंबी बन रही हैं।

इनमें से अधिकांश हिट या सुपरहिट रहीं (लगभग 70-80 फीसदी), क्योंकि लंबी फिल्में अक्सर बड़े कैनवास वाली (महाकाव्य, वॉर, फैमिली ड्रामा) होती हैं, जो दर्शकों को पसंद आती हैं। पहले माना जाता था कि लंबी फिल्में दर्शकों को थका देती हैं, लेकिन ‘संगम’, ‘शोले’, ‘लगान’, ‘के3जी’ और हालिया ‘एनिमल’ व ‘धुरंधर’ ने साबित किया है कि अगर फिल्म में दम हो तो दर्शक 3.5 घंटे भी थिएटर में बैठने को तैयार हैं।

एक नजर में देखें लिस्ट

रैंक फिल्म का नाम रिलीज वर्ष ड्यूरेशन (समय)
1 एलओसी: कारगिल 2003 4 घंटे 15 मिनट
2 मेरा नाम जोकर 1970 4 घंटे 4 मिनट
3 संगम 1964 3 घंटे 58 मिनट
4 लगान 2001 3 घंटे 44 मिनट
5 खतरनाक 1990 3 घंटे 43 मिनट
6 मोहब्बतें 2000 3 घंटे 36 मिनट
7 सलाम-ए-इश्क 2007 3 घंटे 36 मिनट
8 कभी अलविदा ना कहना 2006 3 घंटे 35 मिनट
9 जोधा अकबर 2008 3 घंटे 34 मिनट
10 धुरंधर 2025 3 घंटे 34 मिनट
एक नजर में देखें लिस्ट

अन्य बड़ी फिल्में

‘सौदागर’ (3 घंटे 33 मिनट), ‘हम आपके हैं कौन’ (3 घंटे 26 मिनट), ‘कभी खुशी कभी गम’ (3 घंटे 30 मिनट), ‘स्वदेस’ (3 घंटे 10 मिनट), ‘व्हाट्स योर राशि’ (3 घंटे 31 मिनट), रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ (3 घंटे 21 मिनट) भी तीन घंटे से ज्यादा लंबी फिल्म है।

इसी सप्ताह हुई रिलीज

सेंसर बोर्ड ने ‘द राजा साब’ को यू/ए 16 प्लस सर्टिफिकेट दे दिया है। फिल्म की अंतिम लंबाई 189.00 मिनट है। इसका क्लैश थलपति विजय की आखिरी मूवी ‘जन नायकन’ (जो हिंदी में ‘जन नेता’ से रिलीज हो रही है) से होगा। वह भी 3 घंटे 3 मिनट लंबी है।

हिट/सुपरहिट होने के मुख्य कारण

बॉलीवुड में कोई फिल्म हिट या सुपरहिट बनती है तो इसके पीछे कई फैक्टर्स मिलकर काम करते हैं। कोई एक वजह नहीं होती बल्कि ये सबका कॉम्बिनेशन होता है। इन फिल्मों की स्टोरी ग्रिपिंग, इमोशनल कनेक्ट और नयापन था। इसी के साथ पहला वीकेंड अच्छा हो तो वर्ड ऑफ माउथ से लाइफटाइम कलेक्शन बढ़ता है। इसके मास एक्शन, फैमिली ड्रामा, पैट्रियॉटिक, कॉमेडी के कारण भी दर्शक सिनेमाघरों में पहुंचे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हिट होने के लिए कंटेंट किंग है, लेकिन स्टार + मार्केटिंग + टाइमिंग से बूस्ट मिलता है।

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