प्रतापगढ़ शहर के प्राकृतिक नाले पर हुए अवैध निर्माण को लेकर कलेक्टर ने नगर परिषद को सात दिन के भीतर सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर नाले को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का निर्देश दिया है। आयुक्त नगर परिषद प्रतापगढ़ को भेजे गए पत्र में बताया कि दैनिक जनसुनवाई में मिली शिकायतों और गठित जांच समिति की रिपोर्ट से यह प्रमाणित हुआ है कि नाला क्षेत्र में न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना की गई है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद नाला भूमि पर अतिक्रमण कर उसे संकुचित किया गया है। मालीखेड़ा से देवगढ़ दरवाजा किला रोड तक लगभग 1600 मीटर लंबे इस नाले की वास्तविक चौड़ाई 9 से 19 मीटर दर्ज है। अवैध निर्माणों के कारण नाले की चौड़ाई घटकर मात्र 5.6 मीटर रह गई है। इससे प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है और क्षेत्र में जल एवं वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि वह विधिक प्रक्रिया के तहत नाला क्षेत्र और उसकी परिधि में किए गए सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करे। साथ ही, नाले की सफाई, स्वच्छता और संरक्षण सुनिश्चित कर उसकी पूर्व स्थिति बहाल की जाए। आदेश की अवहेलना करने पर न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई प्रस्तावित करने की चेतावनी भी दी गई है।


