नवादा के कौआकोल प्रखंड में इन दिनों प्रशासनिक अफसरों के बीच दहशत का माहौल है। 9 जनवरी को हुई एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। महिला सीडीपीओ अंजली कुमारी ने 20 सूत्री समिति के उपाध्यक्ष अंकित विश्वकर्मा और उनके साथी विनय कुशवाहा के खिलाफ कौआकोल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। कार्यालय में जबरन घुसकर काम रोकने की धमकी दी सीडीपीओ के अनुसार, दोनों नेता उनके कार्यालय में जबरन घुसे और काम रोकने की धमकी दी। विनय कुशवाहा ने कहा, तुम्हें काम करने नहीं देंगे, देख लेना। आरोप है कि दोनों ने रंगदारी की भी मांग की। अंजली कुमारी ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। पहले भी अंकित विश्वकर्मा उनके काम में दखल देते रहे, निरीक्षण के दौरान घेरकर मारने तक की धमकी दे चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल में रिकॉर्ड मौजूद सीडीपीओ के पास कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल में रिकॉर्ड की गई धमकी की ऑडियो। इन साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी में धारा 506 (आपराधिक धमकी), 384 (रंगदारी), 447 (अनधिकृत प्रवेश) सहित अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कई कर्मचारी डर के मारे छुट्टी पर चले गए। सीडीपीओ ने खुद को और परिवार को असुरक्षित महसूस करते हुए उच्चाधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है। स्थानीय लोग इस घटना को राजनीतिक गुंडागर्दी का स्पष्ट उदाहरण मान रहे हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक सरकारी अफसरों को राजनीतिक दबाव और धमकियों का शिकार होना पड़ेगा? क्या इस बार साक्ष्यों के बावजूद मामला दब जाएगा या कानून अपना काम करेगा? नवादा के कौआकोल प्रखंड में इन दिनों प्रशासनिक अफसरों के बीच दहशत का माहौल है। 9 जनवरी को हुई एक चौंकाने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। महिला सीडीपीओ अंजली कुमारी ने 20 सूत्री समिति के उपाध्यक्ष अंकित विश्वकर्मा और उनके साथी विनय कुशवाहा के खिलाफ कौआकोल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। कार्यालय में जबरन घुसकर काम रोकने की धमकी दी सीडीपीओ के अनुसार, दोनों नेता उनके कार्यालय में जबरन घुसे और काम रोकने की धमकी दी। विनय कुशवाहा ने कहा, तुम्हें काम करने नहीं देंगे, देख लेना। आरोप है कि दोनों ने रंगदारी की भी मांग की। अंजली कुमारी ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। पहले भी अंकित विश्वकर्मा उनके काम में दखल देते रहे, निरीक्षण के दौरान घेरकर मारने तक की धमकी दे चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल में रिकॉर्ड मौजूद सीडीपीओ के पास कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल में रिकॉर्ड की गई धमकी की ऑडियो। इन साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी में धारा 506 (आपराधिक धमकी), 384 (रंगदारी), 447 (अनधिकृत प्रवेश) सहित अन्य गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कई कर्मचारी डर के मारे छुट्टी पर चले गए। सीडीपीओ ने खुद को और परिवार को असुरक्षित महसूस करते हुए उच्चाधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है। स्थानीय लोग इस घटना को राजनीतिक गुंडागर्दी का स्पष्ट उदाहरण मान रहे हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक सरकारी अफसरों को राजनीतिक दबाव और धमकियों का शिकार होना पड़ेगा? क्या इस बार साक्ष्यों के बावजूद मामला दब जाएगा या कानून अपना काम करेगा?


