ड्रोन के जरिये पाकिस्तान की नापाक साजिश नाकाम, भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से बड़ा खतरा टला

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के उस पुराने लेकिन खतरनाक हथकंडे का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें सीमा पार से ड्रोन के जरिये हथियार और विस्फोटक भेजकर शांति भंग करने की कोशिश की जाती है। हम आपको बता दें कि सांबा ज़िले में ड्रोन से गिराई गई हथियारों की खेप की बरामदगी और जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्र से संदिग्ध ‘नैनो ड्रोन’ का मिलना, इस बात का साफ संकेत हैं कि पाकिस्तान गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर से पहले घाटी में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा था। लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने इन मंसूबों को पूरी तरह विफल कर दिया।
हम आपको बता दें कि आज जम्मू-कश्मीर के सांबा जिला में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित अग्रिम क्षेत्र से पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से गिराई गई हथियारों की एक खेप बरामद की गई। अधिकारियों ने बताया कि यह खेप ड्रोन के जरिये रात के अंधेरे में गिराई गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से बचा जा सके। बरामद सामान में दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 कारतूस, एक ग्रेनेड और अन्य संदिग्ध सामग्री शामिल थी। यह बरामदगी उस समय हुई, जब सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही गणतंत्र दिवस समारोह को ध्यान में रखते हुए हाई अलर्ट पर थीं।

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सीमा पार से ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही सीमा सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की संयुक्त टीम ने सांबा के घगवाल क्षेत्र के पलोरा गांव में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। रात भर चले इस अभियान के दौरान एक नाले के किनारे पीले रंग की टेप में लिपटा एक पैकेट मिला। बम निरोधक दस्ते की मदद से जब इसे सुरक्षित तरीके से खोला गया, तो अंदर से हथियारों की खेप बरामद हुई। अंतिम सूचना मिलने तक इलाके में तलाशी अभियान जारी था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और संदिग्ध सामग्री मौजूद न हो।
हम आपको यह भी बता दें कि अभी एक दिन पहले ही जम्मू जिले के आर.एस. पुरा सेक्टर के चकरोई सीमावर्ती क्षेत्र से एक संदिग्ध ‘नैनो ड्रोन’ बरामद किया गया था। यह ड्रोन जमीन पर पड़ा हुआ मिला, जिसकी सूचना स्थानीय निवासी ने सुरक्षा बलों को दी। अधिकारियों ने बताया कि यह नैनो ड्रोन छोटे आकार का है और इसे आसानी से सीमा पार से भेजा जा सकता है, जिससे यह आतंकियों के लिए एक प्रभावी लेकिन खतरनाक साधन बन जाता है। ड्रोन की बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जाना था और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय है।
इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर बिल्कुल साफ है। पाकिस्तान लगातार ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकवादियों को हथियार और संसाधन मुहैया कराने की कोशिश कर रहा है, ताकि सीधे संघर्ष से बचते हुए भारत के भीतर अस्थिरता पैदा की जा सके। नैनो ड्रोन जैसे छोटे उपकरणों का प्रयोग इस बात का सबूत है कि दुश्मन अब नई तकनीक के सहारे सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने के नए रास्ते तलाश रहा है।
लेकिन इन नापाक इरादों के सामने भारतीय सुरक्षा बल एक मजबूत दीवार बनकर खड़े हैं। समय रहते मिली खुफिया सूचनाएं, स्थानीय नागरिकों की जागरूकता और बीएसएफ व जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच बेहतर तालमेल ने एक संभावित बड़े आतंकी खतरे को टाल दिया। खासकर गणतंत्र दिवस जैसे संवेदनशील मौके से पहले यह सफलता यह दिखाती है कि सुरक्षा एजेंसियां हर स्तर पर सतर्क हैं और किसी भी साजिश को अंजाम तक पहुंचने नहीं देंगी।
बहरहाल, सांबा में हथियारों की खेप की बरामदगी और आर.एस. पुरा में नैनो ड्रोन का मिलना पाकिस्तान के उस असफल प्रयास की कहानी कहता है, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने सूझबूझ, साहस और त्वरित कार्रवाई से नाकाम कर दिया। यह न सिर्फ एक सामरिक सफलता है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता पर जनता के भरोसे को और मजबूत करने वाला संदेश भी है।

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