रामपुर के चमरौआ इलाके में माइनर नहरों से छोड़े गए पानी ने किसानों की गेहूं और सरसों की फसलें बर्बाद कर दी हैं। पिछले सप्ताह नहरों में पानी आने से कई खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्र में स्थित अधिकांश माइनर नहरों की हालत जर्जर है। उनकी पटरियां जगह-जगह टूटी हुई हैं और वे सिल्ट से अटी पड़ी हैं। इस कारण जब भी नहरों में पानी छोड़ा जाता है, वह नियंत्रित न होकर खेतों में फैल जाता है। पहाड़ी गांव सहित आसपास के कई गांवों में ऐसी ही स्थिति बनी, जहां नहर का पानी सीधे खेतों में घुस गया। किसानों का आरोप है कि पहले तो महीनों तक नहरों में पानी नहीं आता, और जब आता है तो बदहाल व्यवस्था के कारण वही पानी फसलों को डुबो देता है। इससे सिंचाई का लाभ मिलने के बजाय नुकसान ही अधिक होता है। कई किसानों की सरसों की फसल पूरी तरह गिर गई है, जबकि गेहूं की फसल में सड़न शुरू हो गई है। इस बड़े नुकसान के बावजूद, नहर विभाग या कृषि विभाग की ओर से अभी तक कोई सर्वे या क्षति का आकलन नहीं किया गया है। हालांकि किसानों ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन वे आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
पहाड़ी गांव के इख्तियार हुसैन ने बताया कि कई किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों ने मांग की है कि यदि समय रहते नहरों की मरम्मत और पानी के नियंत्रित वितरण की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।


