विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट सूची प्रकाशित हो चुकी है। जिले में 6 लाख 45 हजार से अधिक वोट मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। गोरखपुर जिले में 9 में से 8 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां जीत-हार के मार्जिन से अधिक मतदाताओं के नाम कट गए हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में इसके प्रभाव को लेकर बहस शुरू हो गई है। लेकिन अगर इन सीटों पर हुए चुनावों के परिणाम पर गौर करें तो एक बात सामने आती है कि जितने मतदाताओं के नाम कटे हैं, उसके दोगुने से अधिक मतदाता कभी बूथ तक पहुंचे ही नहीं। चाहे 2007 का विधानसभा चुनाव रहा हो या फिर 2012, 2017 या 2022 का। यानी इस बात की संभावना अधिक है कि जो नाम काटे गए हैं, वे उन्हीं मतदाताओं में से हैं, जो कभी वोट देने नहीं जाते। पिछले चार विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो मतदान प्रतिशत अधिकतम 60 तक रहा है। यानी 40 प्रतिशत से अधिक मतदाता अनुपस्थित रहे हैं। अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा और कम रहा है। यानी जो नाम मदताता सूची से कटे हैं, उनसे मतदान प्रतिशत में सुधार होगा। जितने लोग मतदान करने बूथ तक आते रहे हैं, उनकी संख्या में खास फर्क नजर नहीं आएगा। 2007 से 2022 तक के चुनावों को देखें तो मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी उसी अनुपात में हुई है, जिसमें नए मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
राजनीतिक विश्लेषक कुमार हर्ष बताते हैं कि अक्सर ऐसी खबरें आती थीं कि कुछ बूथों पर बहुत कम वोट पड़े। हकीकत यही थी कि वहां से लोग दूसरी जगह जाकर बस चुके थे इसलिए वोट देने नहीं जाते थे। मतदान प्रतिशत अगर 70 से नीचे है तो यह मानना चाहिए कि जो नाम कटे हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि उससे अधिक वोटर तो अनुपस्थित रहते ही हैं। उन्होंने कहा कि यदि 70 प्रतिशत या इससे अधिक मतदान वाली सीट पर बड़ी संख्या में वोट कटे हैं तो वहां राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। इतना जरूर है कि अब सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बेहतर हो सकेगा। अब जानिए अलग-अलग चुनावों में क्या स्थिति रही कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में 68242 वोट कटे हैं। 2022 के चुनाव में यहां 1 लाख 59 हजार 152 मतदाता अनुपस्थित थे। 2017 में अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या 1 लाख 47 हजार 513 थी। इसी तरह 2012 के चुनाव में 1 लाख 40 हजार 231 मतदाता अनुपस्थित थे। 2012 में यह विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में नहीं था लेकिन मानीराम का बड़ा हिस्सा इसमें आता था। वहां 2 लाख 17 हजार से अधिक मतदाता अनुपस्थित थे। इसी तरह पिपराइच में 62 हजार 157 मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। यहां 2022 में 1 लाख 48 हजार 31 मतदाता अनुपस्थित रहे। 2017 में 1 लाख 40 हजार 440, 2012 में 1 लाख 34 हजार 879 मतदाता वोट देने नहीं आए। इसी तरह 2012 में 1 लाख 45 हजार 207 लोग मतदान बूथ तक नहीं पहुंचे।
गोरखपुर शहर में 62 हजार 152 वोट कटे हैं। अनुपस्थित मतदाताओं की बात करें तो 2022 में 2 लाख 14 हजार 563 मतदाता नहीं आए। 2017 में 2 लाख 9 हजार 787 लोग बूथ तक नहीं गए। 2012 में 1 लाख 92 हजार 171 लोग मताधिकार का प्रयोग करने नहीं पहुंचे। 2012 में 2 लाख 26 हजार 369 लोगों ने वोट देने में रुचि नहीं दिखाई। गोरखपुर ग्रामीण में 70 हजार 763 लोगों के नाम कटे हैं। यहां 2022 में 1 लाख 64 हजार 110 लोग अनुपस्थित रहे। 2017 में यह संख्या 1 लाख 58 हजार 335 रही। 2012 में 1 लाख 52 हजार 662 लोग वोट देने नहीं गए थे। 2007 में यह विधानसभा अस्तित्व में नहीं थे। उस वक्त के कौड़ीराम, मुंडेरा बाजार क्षेत्र के हिस्सों को मिलाकर यह विधानसभा बनी है। उन दोनो विधानसभा क्षेत्रों में 1 लाख 78 हजार 1 लाख 69 हजार लोग वोट देने नहीं गए थे। बात सहजनवा की करें तो यहां 61 हजार 130 वोट कटे हैं। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में 1 लाख 55 हजार 138 लोग वोट देने नहीं आए थे। 2017 में 1 लाख 46 हजार 716 लोग मतदान के लिए नहीं पहुंचे। 2012 में अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या 1 लाख 40 हजार 776 थी। 2007 में 1 लाख 42 हजार 905 लोग मतदान के लिए बूथ तक नहीं आए थे। खजनी विधानसभा क्षेत्र में 83 हजार 14 वोट कटे हैं। यहां 2022 में 1 लाख 81 हजार लोगों ने वोट नहीं दिया था। 2017 में 1 लाख 76 हजार लोग वोट देने नहीं आए। इसी तरह 2012 में अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या 1 लाख 60 हजार 212 थी।
चौरी चौरा में 67 हजार 355 नाम कटे हैं। यहां 2022 में 1 लाख 48 हजार 621 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। इसी तरह 2017 में 1 लाख 46 हजार 45 लोग वोट देने नहीं आए। 2012 में वोट न देने वाले मतदाताओं की संख्या 1 लाख 47 हजार 143 रही। 2007 में यह सीट मुंडेरा बाजार के नाम से थी। यहां 1 लाख 69 हजार 915 लोग वोट देने नहीं आए। बांसगांव सीट पर 83 हजार 62 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। 2022 में यहां 1 लाख 92 हजार 306 मतदाता अनुपस्थित थे। 2017 में 1 लाख 91 हजार 959 लोग वोट देने नहीं आए। इसी तरह 2012 में 1 लाख 77 हजार 143 लोग मतदेय स्थल तक नहीं पहुंचे। 2007 में 1 लाख 93 हजार 658 लोग वोट देने नहीं गए थे। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में 87 हजार 732 नाम कटे हैं। 2022 में यहां 2 लाख 1 हजार 507 लोग मतदान के लिए नहीं आए। 2017 में 2 लाख 11 हजार 76 तथा 2012 में 2 लाख 210 मतदाता मतदान के लिए नहीं आए। 2007 में 2 लाख 2 हजार 797 लोग अनुपस्थित थे। जानिए विभिन्न चुनावों में मतदान प्रतिशत व अनुपस्थित मतदाताओं की स्थिति क्या थी
विधानसभा – 2022 – 2017 – 2012 कैंपियरगंज – 58.52% /159152/42656 – 59.50% /147513/32854 – 58.33%/140231/8958
पिपराइच – 63.61% / 148031/65357 – 63.66%/140440/12809 – 59.72%/134879/35635
गोरखपुर शहर – 53.85% /214563 – 51.12%/209787/60730 – 46.19%/192171/47454
गोरखपुर ग्रामीण – 60.86% /164110 – 59.85%/158335/4410 – 55.18%/152662/16985
सहजनवा – 59.13% /155138 – 58.81%/146716/15377 – 56.11%/140776/12691
खजनी – 52.34% /181130 – 51.54%/176648/20079 – 50.75%/160212/9436
चौरी चौरा – 58.15% /148621 – 57.03%/146045/45660 – 53.56%/147143/20601
बांसगांव – 49.53% /192306 – 48.23%/191959/22873 – 45.84%/177965/8346
चिल्लूपार – 53.13% /201507 – 51.08%/211076/3359 – 49.99%/200210/11153 2007 (परिसीमन के पहले) में यह रही स्थिति
बांसगांव सुरक्षित – 38.30%/193658/2284
धुरियापार – 41.34%/181640/559
चिल्लूपार – 38.32%/202797/6933
कौड़ीराम – 44.17%/178931/13924
मुंडेरा बाजार सुरक्षित – 41.21%/169915/8729
पिपराइच – 48.16%/145207/9326
गोरखपुर – 28.62%/226369/22392
मानीराम – 40.60%/217115/3248
सहजनवा – 48.59%/142905/3057
नोट : आंकड़े मतदान प्रतिशत/जो वोट नहीं पड़े/जीत-हार की मार्जिन के क्रम में हैं। अब जानिए विधानसभा क्षेत्रवार क्या स्थिति रही विधानसभा क्षेत्र – कुल मतदाता – इतने नाम कटे कैंपियरगंज – 392427 – 68242
पिपराइच – 414711 – 62175
गोरखपुर शहर – 480892 – 62152
गोरखपुर ग्रामीण – 429833 – 70763
सहजनवा – 383221 – 61130
खजनी – 387022 – 83014
चौरी चौरा – 360030 – 67355
बांसगांव – 378779 – 83062
चिल्लूपार – 439618 – 87732


