बॉलीवुड की पूर्व एक्ट्रेस मंदाकिनी शनिवार दोपहर चित्तौड़गढ़ पहुंचीं। यहां आने के बाद उन्होंने कहा कि वे सिर्फ चित्तौड़ दुर्ग स्थित पद्मिनी महल ही देखना चाहती हैं। इसके अलावा उन्होंने किसी और जगह जाने की इच्छा नहीं जताई। उनकी इस इच्छा के अनुसार उन्हें सीधे पद्मिनी महल ले जाया गया। वहां पहुंचकर उन्होंने रानी पद्मिनी से जुड़े इतिहास के बारे में जानकारी ली और महल को देखा। उनका यह दौरा पूरी तरह से इतिहास जानने और समझने से जुड़ा रहा। रानी पद्मिनी के बारे में जानने की इच्छा पद्मिनी महल में मंदाकिनी ने रानी पद्मिनी के जीवन और उनके बलिदान के बारे में ध्यान से सुना। उन्होंने कहा कि रानी पद्मिनी के बारे में उन्होंने पहले बहुत कुछ सुन रखा था और लंबे समय से इस जगह को देखने की इच्छा थी। मंदाकिनी ने यह भी कहा कि पहले कई जगहों पर रानी पद्मिनी के बारे में गलत इतिहास बताया गया था। लेकिन खुशी है कि अब लोगों को सही इतिहास बताया जा रहा है और सच्चाई सामने आ रही है। जल महल और गार्डन को दूर से देखा अपने छोटे से दौरे के दौरान मंदाकिनी ने रानी पद्मिनी के जल महल को दूर से देखा। इसके साथ ही उन्होंने आसपास बने गार्डन को भी देखा। उन्होंने महल की बनावट और वहां के शांत माहौल की तारीफ की। हालांकि उनका समय बहुत कम था और वे जल्दी में नजर आईं। इसी कारण वे करीब 20 मिनट ही दुर्ग में रुक सकीं और इसके बाद वापस लौट गईं। मंदाकिनी को देखने लगी लोगों की भीड़ पूर्व अभिनेत्री के चित्तौड़गढ़ पहुंचने की खबर मिलते ही पद्मिनी महल और आसपास के इलाकों में लोग इकट्ठा हो गए। कई लोग उन्हें देखने और उनकी एक झलक पाने के लिए वहां पहुंचे। हालांकि मंदाकिनी ने किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की, लेकिन फिर भी लोगों में उन्हें लेकर खास उत्साह देखा गया। लोग शांति से उनके जाने तक वहां मौजूद रहे। स्थानीय नेताओं ने किया स्वागत मंदाकिनी के दौरे के समय चित्तौड़ दुर्ग के पूर्व पार्षद अशोक वैष्णव, विजय चौहान और कांग्रेस के अन्य पार्षद भी वहां मौजूद थे। सभी ने उनका स्वागत किया और उन्हें चित्तौड़ दुर्ग का एक फोटो भेंट किया। मंदाकिनी ने सभी का धन्यवाद किया और चित्तौड़गढ़ आने का अनुभव अच्छा बताया। कम समय के इस दौरे के बावजूद उनका आना शहर के लिए खास रहा और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। इसके बाद वे उदयपुर की और चली गई।


