भभुआ जिले के सदर अस्पताल में नाक-कान-गला (ईएनटी) और हड्डी रोग विशेषज्ञ सर्जन तैनात हैं। इसके बावजूद, इन विभागों में अब तक एक भी सर्जरी नहीं की गई है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को सर्जरी के बजाय सामान्य ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। जनरल सर्जरी विभाग में भी पिछले छह महीनों में केवल 52 सर्जरी हुई हैं, जिसका औसत प्रति माह 8-9 ऑपरेशन है। यह स्थिति केवल सदर अस्पताल तक सीमित नहीं है। मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में भी जनरल सर्जन द्वारा अपेंडिक्स, हर्निया और हाइड्रोसील जैसी सामान्य सर्जरी पिछले छह महीने में बिल्कुल नहीं की गई हैं। नए जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह द्वारा स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। इसके बाद जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर सर्जरी न करने वाले चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगने और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सर्जरी के लिए इन्हीं अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता
सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों को छोड़कर किसी भी सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को सर्जरी के लिए इन्हीं अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञ सर्जनों की उपलब्धता के बावजूद इन अस्पतालों में सर्जरी की संख्या शून्य बनी रहना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। भभुआ जिले के सदर अस्पताल में नाक-कान-गला (ईएनटी) और हड्डी रोग विशेषज्ञ सर्जन तैनात हैं। इसके बावजूद, इन विभागों में अब तक एक भी सर्जरी नहीं की गई है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को सर्जरी के बजाय सामान्य ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। जनरल सर्जरी विभाग में भी पिछले छह महीनों में केवल 52 सर्जरी हुई हैं, जिसका औसत प्रति माह 8-9 ऑपरेशन है। यह स्थिति केवल सदर अस्पताल तक सीमित नहीं है। मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में भी जनरल सर्जन द्वारा अपेंडिक्स, हर्निया और हाइड्रोसील जैसी सामान्य सर्जरी पिछले छह महीने में बिल्कुल नहीं की गई हैं। नए जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह द्वारा स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। इसके बाद जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर सर्जरी न करने वाले चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगने और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सर्जरी के लिए इन्हीं अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता
सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों को छोड़कर किसी भी सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को सर्जरी के लिए इन्हीं अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञ सर्जनों की उपलब्धता के बावजूद इन अस्पतालों में सर्जरी की संख्या शून्य बनी रहना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है।


