सिटी रिपोर्टर| बेगूसराय मंझौल पंचायत-1, 3 एवं 4 के दलित, महादलित एवं पिछड़ा समाज के 41 पर्चा धारी तीस वर्ष से सरकार द्वारा दी गई जमीन पर अपना मालिकाना हक के लिए भटक रहे हैं। इसको लेकर डीएम कार्यालय पर तीसरी बार अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए हैं। लेकिन इनका सुनने वाला कोई नहीं है। पर्चा धारियों का कहना है कि 1995 में तत्कालीन मंत्री एवं डीएम द्वारा उन्हें एक समारोह में बुलाकर पर्चा दिया गया था। लेकिन स्थानीय मुखिया द्वारा पंचायत सरकार भवन बना दिया गया। साथ ही शेष जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इसकी वजह से उन्हें पर्चा तो मिला है। लेकिन जमीन पर स्थानीय बीडीओ एवं सीओ द्वारा कब्जा नहीं दिलाई गई है। इसकी वजह से आज भी वे बेघर हैं। अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे वैधनाथ राम, सूलो देवी, भीखन मल्लिक, सुन्दरी देवी, शंभू साव, अशोक पासवान, उत्तम रजक, सुमित्रा देवी आदि ने कहा कि अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन भू-माफिया से मिला हुआ है। इसकी वजह से उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। ऐसे में अब अंतिम दम तक धरना पर बैठे रहेगें। उन्हें जबतक जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया जाएगा, जबतक धरना जारी रहेगा। संतोष कुमार ईश्वर ने कहा कि एक भी अधिकारी इन से मिलने नहीं आए हैं। सिटी रिपोर्टर| बेगूसराय मंझौल पंचायत-1, 3 एवं 4 के दलित, महादलित एवं पिछड़ा समाज के 41 पर्चा धारी तीस वर्ष से सरकार द्वारा दी गई जमीन पर अपना मालिकाना हक के लिए भटक रहे हैं। इसको लेकर डीएम कार्यालय पर तीसरी बार अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए हैं। लेकिन इनका सुनने वाला कोई नहीं है। पर्चा धारियों का कहना है कि 1995 में तत्कालीन मंत्री एवं डीएम द्वारा उन्हें एक समारोह में बुलाकर पर्चा दिया गया था। लेकिन स्थानीय मुखिया द्वारा पंचायत सरकार भवन बना दिया गया। साथ ही शेष जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इसकी वजह से उन्हें पर्चा तो मिला है। लेकिन जमीन पर स्थानीय बीडीओ एवं सीओ द्वारा कब्जा नहीं दिलाई गई है। इसकी वजह से आज भी वे बेघर हैं। अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे वैधनाथ राम, सूलो देवी, भीखन मल्लिक, सुन्दरी देवी, शंभू साव, अशोक पासवान, उत्तम रजक, सुमित्रा देवी आदि ने कहा कि अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन भू-माफिया से मिला हुआ है। इसकी वजह से उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। ऐसे में अब अंतिम दम तक धरना पर बैठे रहेगें। उन्हें जबतक जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया जाएगा, जबतक धरना जारी रहेगा। संतोष कुमार ईश्वर ने कहा कि एक भी अधिकारी इन से मिलने नहीं आए हैं।


